गंगा अध्याय 3 मेरे प्रश्न

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया। प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? प्रश्न ख : ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
उत्तर

उपयुक्त प्रश्न — प्रश्न क : “ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?”

कारण — दिए गए उत्तर का कर्ता ‘मिट्ठू’ है और उसमें बताई गई क्रिया है ‘सहारा देना’। प्रश्न क ठीक यही दो बातें पूछता है — किसने (कर्ता) और सहारा दिया (क्रिया)। ‘अकेलापन’ और ‘सूनापन’ पर्यायवाची हैं, इसलिए अर्थ भी पूरी तरह मेल खाता है।

प्रश्न ख क्यों नहीं — वह पूछता है कि मिट्ठू को भेंट में किसने दिया। उसका उत्तर मिट्ठू नहीं, गनपत होगा — “भला हो गनपत का, जिसने ताई के सूनेपन को सहारा दे दिया था, वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।” उत्तर में गनपत का नाम है ही नहीं, इसलिए वह प्रश्न इस उत्तर के लिए उपयुक्त नहीं।

नियम याद रखिए: प्रश्न मिलाते समय देखिए कि उत्तर का कर्ता कौन है। प्रश्नवाचक शब्द (कौन, कब, कहाँ, क्यों, कैसे) उसी सूचना को माँगे, जो उत्तर में नई है।
प्र2.
उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था। प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था? प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
उत्तर

उपयुक्त प्रश्न — प्रश्न ख : “ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?”

कारण — उत्तर में दो सूचनाएँ हैं — (1) समय: लौटने से पहले, और (2) घटना: मिट्ठू का उड़ जाना। प्रश्न ख दोनों को ठीक-ठीक पकड़ता है; ‘अनहोनी’ शब्द भी कहानी का ही है — “गाँव में सभी के मन में इस अनहोनी घटना ने एक गहरी आशंका को जन्म दे दिया था।”

प्रश्न क क्यों नहीं — उसमें दो गलतियाँ हैं। पहली, समय उलटा है — वह ‘लौटने के बाद’ पूछ रहा है, जबकि घटना लौटने से पहले हुई थी। दूसरी, वह ‘कहाँ’ पूछ रहा है, यानी स्थान माँग रहा है; और उसका उत्तर कहानी में है ही नहीं — लेखक स्वयं कहता है, “न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।”

प्र3.
उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? प्रश्न ख : गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
उत्तर

उपयुक्त प्रश्न — प्रश्न क : “गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?”

कारण — उत्तर में ‘डर’ और उसका कारण दोनों हैं, और प्रश्न क ठीक कारण (‘क्यों’) माँगता है। कहानी भी यही कहती है — “ताई के तेज स्वभाव के अतिरिक्त मिट्ठू के प्रति उनके लगाव को सभी जानते थे और लौटकर मिट्ठू को न पाने पर उनकी क्या दशा हो सकती है, इसका अनुमान वे भली-भाँति लगा सकते थे।” इसी चिंता से गनपत ने एवजी तोता लाने का सुझाव दिया।

प्रश्न ख क्यों नहीं — उसमें एक गलत पूर्वधारणा छिपी है — कि गाँववाले खुश थे। पाठ इसका उलटा कहता है: वे खुश नहीं, चिंतित और आशंकित थे। जिस प्रश्न की मान्यता ही झूठी हो, उसका कोई उत्तर सही नहीं हो सकता।

प्र4.
उत्तर: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है। प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है? प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
उत्तर

उपयुक्त प्रश्न — प्रश्न ख : “शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?”

कारण — दिया गया उत्तर शीर्षक का अर्थ खोल रहा है — कि यह जीवन में छाए मौन का प्रतीक है। ‘भावार्थ’ का अर्थ ही है भीतर छिपा भाव। इसलिए प्रश्न और उत्तर का प्रकार एक ही है — दोनों व्याख्यात्मक हैं।

प्रश्न क क्यों नहीं — वह शीर्षक की अनुपयुक्तता पर तर्क माँगता है, यानी उसका उत्तर शीर्षक के विरुद्ध होना चाहिए। दिया गया उत्तर तो शीर्षक की सार्थकता बता रहा है। प्रश्न और उत्तर की दिशा उलटी है, इसलिए मेल नहीं बैठता।

याद रखिए: ‘क्यों उपयुक्त नहीं है’ जैसे प्रश्न निषेधात्मक होते हैं। उनका उत्तर भी निषेधात्मक तर्क माँगता है। प्रश्न-मिलान में सबसे पहले यही देखिए कि प्रश्न की दिशा (सकारात्मक/नकारात्मक) उत्तर की दिशा से मिलती है या नहीं।
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