सही उत्तर — (ख) ममता और स्नेह।
यह उत्तर उपयुक्त क्यों है — कहानी स्वयं इस भाव का नाम लेकर बताती है: “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” यह ममता केवल कहने की नहीं, करने की है। जो ताई “अपनी खातिर चूल्हा जलाने में आलस्य कर जाती थीं, वही अब नियमपूर्वक मिट्ठू के लिए दाल-भात बनातीं।” वे उसके “वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए रोटी बचाकर” रखती हैं और यह तक जान लेती हैं कि “किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं।” दूसरी ओर स्नेह एकतरफा नहीं है — मिट्ठू ताई को “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” कहकर ढाढ़स बँधाता है और ताई उसे “जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ” का आशीष देती हैं। ‘बेटा’ संबोधन ही सिद्ध कर देता है कि यह रिश्ता माँ-बेटे की ममता का है।
- (क) परोपकार और त्याग — परोपकार में देने वाला ऊपर और पाने वाला नीचे होता है, और वह किसी अनजान पर किया जाता है। ताई मिट्ठू पर उपकार नहीं करतीं; वे उससे अपना अकेलापन बाँटती हैं। त्याग का भाव यहाँ गौण है, मुख्य नहीं।
- (ग) करुणा और क्रोध — “मेरी जान खाने को आ गया है, मर जा!” जैसी खीझ कहानी में है ज़रूर, पर वह क्षणिक है — लेखक तुरंत जोड़ता है, “फिर मान-मनौवल का दौर चलता और ताई और मिट्ठू की दुनिया पहले की तरह प्रेम से चलने लगती।” जो भाव स्थायी नहीं, वह संबंध को परिभाषित नहीं कर सकता।
- (घ) जिज्ञासा और सहायता — जिज्ञासा का कोई प्रसंग कहानी में है ही नहीं। सहायता का भाव है, पर वह ममता का परिणाम है, संबंध का मूल नहीं।