गंगा अध्याय 4 गतिविधियाँ

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
1. ‘नाम रह जाएगा’ वाक्य के लिए एक सुंदर पोस्टर बनाइए। इसके ऊपर ‘नाम रह जाता है…’ लिखिए और नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में ‘नाम’ शब्द (जैसे– नाव, नालो, नांउ, नाउँ, मिङ्, पेरु, नामम् आदि) लिखिए। साथ ही कक्षा में सब विद्यार्थी मिलकर एक प्रतिज्ञा लें— ‘हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।’
उत्तर

पोस्टर बनाने की विधि — पोस्टर में तीन ही चीज़ें होनी चाहिए — एक बड़ा शीर्षक, एक चित्र और थोड़े-से शब्द। भीड़ मत कीजिए; पोस्टर दूर से पढ़ा जाना चाहिए।

  • सबसे ऊपर बड़े अक्षरों में — “नाम रह जाता है…”
  • बीच में चित्र — एक पेड़ या एक बहती नदी, जिसके किनारे धुँधले हों पर पानी पर तैरता हुआ एक शब्द चमक रहा हो — ‘नाम’। (या एक माइक, जिसकी ध्वनि-तरंगों में अलग-अलग भाषाओं के अक्षर बिखरे हों।)
  • नीचे भाषाओं में ‘नाम’ — नीचे दी गई सूची अक्षरों के अलग-अलग रंगों में लिखिए।
  • सबसे नीचे प्रतिज्ञा — “हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।” — इसे सबसे बड़े अक्षरों में मत लिखिए; इसे शांत रखिए, तभी उसका वज़न बना रहेगा।
भाषा‘नाम’ शब्द
हिंदी / संस्कृतनाम / नामन्
मराठीनाव
ओड़िआनाम
अवधी / भोजपुरीनाउँ / नाँव
कोंकणीनांव
मणिपुरीमिङ्
तेलुगुपेरु
तमिल / मलयालमपेयर् / पेरु
कन्नड़हेसरु
बांग्ला / असमियानाम
पंजाबीनां
गुजरातीनाम
उर्दूनाम
प्रतिज्ञा कैसे लीजिए: पोस्टर कक्षा की दीवार पर लगाइए और सब मिलकर एक स्वर में कहिए — “हम हर भाषा का सम्मान करेंगे। हम किसी की बोली पर हँसेंगे नहीं।” दूसरा वाक्य जोड़ना ज़रूरी है, क्योंकि भाषा का अपमान प्रायः हँसी के रूप में ही होता है।
प्र2.
2. कागज पर एक पेड़ का चित्र बनाइए। इसे नाम दीजिए— भाषा-वृक्ष। इसकी जड़ में लिखिए— ‘भारतीय संस्कृति’; तने पर और शाखाओं पर लिखिए— हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि। हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़िए।
उत्तर

बनाने की विधि — बड़ा कागज़ लीजिए। नीचे मोटी जड़ें बनाइए और उनमें लिखिए ‘भारतीय संस्कृति’। तने पर लिखिए ‘भारत की भाषाएँ’। ऊपर से कई शाखाएँ निकालिए — हर शाखा एक भाषा। हर शाखा के पत्ते पर उस भाषा का एक सुंदर शब्द और उसका अर्थ लिखिए।

शाखा (भाषा)एक प्यारा शब्दअर्थ
हिंदीउजासप्रकाश, उजाला
मराठीमायाममता, स्नेह
संस्कृतसङ्गीतम्संगीत
बांग्लाभालोबासाप्रेम
गुजरातीमीठासमिठास
पंजाबीचढ़दी कलासदा ऊँचा उत्साह
तमिलअन्बुप्रेम
तेलुगुपाटगीत
कन्नड़नन्नुडिमेरी बोली
मलयालमस्नेहम्स्नेह
असमियाबिहूअसम का प्रमुख उत्सव
ओड़िआजगन्नाथजगत के स्वामी
कश्मीरीवुछुनदेखना
उर्दूख़ुलूसनिश्छल प्रेम, सच्चाई
यह वृक्ष क्या सिखाता है: जड़ एक है — भारतीय संस्कृति; शाखाएँ अनेक हैं। शाखा जड़ से अलग होकर जीवित नहीं रह सकती और जड़ बिना शाखाओं के फल नहीं दे सकती। यही ‘अनेकता में एकता’ का सही अर्थ है — एकता का मतलब सबका एक जैसा होना नहीं, सबका एक जड़ से जुड़ा होना है।
प्र3.
3. समूह में मिलकर किसी विषय पर एक छोटा समाचार बुलेटिन तैयार कीजिए जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और किसी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण के लिए, एक विषय हो सकता है— ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।’
उत्तर

तैयारी की विधि — पाँच-छह के समूह बनाइए और काम बाँट लीजिए — एक समाचार-वाचक हिंदी में, एक अंग्रेज़ी में, एक क्षेत्रीय भाषा में; एक संवाददाता जो ‘मौके से’ रिपोर्ट दे; एक साक्षात्कार लेने वाला; और एक जो समय व क्रम सँभाले। बुलेटिन पाँच से सात मिनट का रखिए।

नमूना बुलेटिन — विषय: ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं’

[शीर्षक-संगीत, फिर वाचक-1 — हिंदी]
“नमस्कार। आप देख-सुन रहे हैं ‘स्वर सेतु’ — कक्षा नौ का समाचार बुलेटिन। आज की मुख्य ख़बर — हमारे विद्यालय में हुए ‘भाषा संगम दिवस’ में नौ भाषाओं के गीत एक ही मंच पर गाए गए।”

[वाचक-2 — English]
“Good morning. In today’s bulletin: students from Classes 8 and 9 presented songs in nine Indian languages. The message was simple — art unites, it does not divide.”

[वाचक-3 — क्षेत्रीय भाषा, जैसे मराठी]
“नमस्कार. आजची मुख्य बातमी — आमच्या शाळेत नऊ भाषांमधली गाणी एकाच मंचावर सादर झाली. कला जोडते, तोडत नाही.”

[संवाददाता — मौके से]
“मैं इस समय विद्यालय के प्रांगण में हूँ। यहाँ मंच पर अभी-अभी एक मराठी अभंग समाप्त हुआ है और अब भोजपुरी का सोहर शुरू होने वाला है। दर्शकों में वे विद्यार्थी भी ताली बजा रहे हैं जिन्हें इन गीतों की भाषा नहीं आती — और यही आज की सबसे बड़ी ख़बर है।”

[साक्षात्कार — संगीत शिक्षक से]
प्रश्न: “सर, अलग-अलग भाषाओं के गीत एक मंच पर लाने का विचार कैसे आया?”
उत्तर: “लता जी ने छत्तीस से अधिक भाषाओं में गाया। उन्हें सुनते हुए लगा कि सुर किसी भाषा का मोहताज नहीं होता। बच्चों को यही दिखाना था।”

[समापन — हिंदी]
“यही थीं आज की मुख्य ख़बरें। अंत में लता मंगेशकर की एक बात — ‘गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।’ नमस्कार।”
बुलेटिन में ध्यान रखने योग्य बातें: समाचार की भाषा छोटी, सीधी और तथ्यपूर्ण होती है — उसमें राय नहीं मिलाई जाती। हर ख़बर में चार बातें अवश्य हों — क्या, कब, कहाँ और किसने। और भाषा बदलते समय अनुवाद मत दोहराइए; हर भाषा में नई जानकारी दीजिए, वरना सुनने वाला ऊब जाएगा।
प्र4.
4. भाषाई स्मृति पोटली — अपने परिवार में प्रयुक्त अलग-अलग भाषाओं के पाँच शब्द एकत्र कीजिए (जैसे– दादी मराठी बोलती हों, माँ हिंदी)। उन्हें एक ‘शब्द पोटली’ में कार्ड पर सजाइए।
उत्तर

करने की विधि — रंगीन कागज़ के छोटे-छोटे कार्ड काटिए। हर कार्ड पर चार बातें लिखिए — (1) शब्द, (2) वह किस भाषा/बोली का है, (3) उसका अर्थ, (4) वह घर में किससे सुना। सब कार्ड एक कपड़े की छोटी पोटली में रखिए और पोटली पर लिखिए — ‘मेरी भाषाई स्मृति’।

नमूना उत्तर — मेरी पोटली के कार्ड:

शब्दभाषा / बोलीअर्थकिससे सुना
अंगनाअवधीआँगनदादी, जब वे गाँव की बातें करती हैं
मायामराठीममता, दुलारनानी, जब वे छोटे भाई को गोद में लेती हैं
बिहानभोजपुरीसवेरा, अगली सुबहबाबा, “बिहान चलब”
ठीक बाभोजपुरीठीक हैचाचा, फोन पर
चल्लोपंजाबीचलोपड़ोस की आंटी
तड़काहिंदी (रसोई की भाषा)छौंकमाँ, हर दिन
पोटली को जीवित रखिए: हर महीने एक-दो कार्ड और जोड़िए। साल के अंत में गिनिए कि आपके घर में कितनी भाषाओं के शब्द रहते हैं — प्रायः यह संख्या तीन-चार से कम नहीं निकलती। हर घर अपने आप में एक छोटा भाषा संगम है।
प्र5.
5. स्वर-कोलाज — लता जी के जीवन के प्रेरक वाक्यों और गीतों का चित्रमय कोलाज बनाइए।
उत्तर

बनाने की विधि — एक चार्ट पेपर लीजिए। बीच में लता जी का चित्र या माइक का चित्र चिपकाइए। उसके चारों ओर काग़ज़ की पर्चियों पर उनके प्रेरक वाक्य और गीतों की पंक्तियाँ लिखकर चिपकाइए। पत्रिकाओं-अख़बारों से काटे गए चित्र, संगीत के चिह्न (♪), पुराने फिल्मी पोस्टर की नकल — इन सबको मिलाकर कोलाज बनता है। रंग सादे रखिए — सफ़ेद, सुनहरा और हल्का नीला — क्योंकि विषय स्वयं सादगी का है।

कोलाज में डालने योग्य वाक्य (सब पाठ से) —

  • “मेरी आवाज़ ही पहचान है!”
  • “सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा।”
  • “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
  • “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
  • “बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।” — उस्ताद अली अकबर खाँ
  • “तुमने हमारी धुनों में इतनी मिठास घोली है।” — नौशाद
  • “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”
  • “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन।”
  • “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।”

गीतों की पंक्तियाँ / नाम (पाठ में उल्लिखित) — ‘आएगा आने वाला’ (महल), ‘हवा में उड़ता जाए मोरा लाल दुपट्टा मलमल का’ (बरसात), ‘चले जाना नहीं नैन मिला के’ (बड़ी बहन), ‘मेरे ख्वाबों में जो आए’ (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे), और ‘अमी जातो अमचा गावा’ (संत तुकाराम)।

कोलाज का नियम: कोलाज में खाली जगह भी एक तत्व है। सब कुछ भर देने से आँख कहीं टिकती नहीं। एक वाक्य को सबसे बड़ा रखिए — जैसे “मेरी आवाज़ ही पहचान है!” — और बाकी को उसके चारों ओर छोटा रखिए।
प्र6.
6. समय-रेखा — लता जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ कालानुक्रम में दर्शाइए।
उत्तर

बनाने की विधि — कागज़ पर बाएँ से दाएँ एक सीधी रेखा खींचिए। उस पर बराबर दूरी पर बिंदु लगाइए और हर बिंदु के ऊपर वर्ष तथा नीचे घटना लिखिए। जो घटनाएँ पाठ से मिली हैं, उन्हें एक रंग से; जो खोजबीन से मिलीं, उन्हें दूसरे रंग से लिखिए — इससे पता चलता रहेगा कि कौन-सी जानकारी कहाँ से आई।

वर्षघटनास्रोत
192928 सितंबर को इंदौर (मध्य प्रदेश) में जन्म; पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर, माता शेवंती (शुद्धमती)पाठ की भूमिका + खोजबीन
लगभग 1934मात्र पाँच वर्ष की आयु में पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षापाठ से
1942पिता का निधन; 13 वर्ष की आयु में माँ और छोटे भाई-बहनों (मीना, आशा, उषा, हृदयनाथ) का उत्तरदायित्व; आजीविका के लिए अभिनय व गायनपाठ से
1942–48छह-सात फिल्मों में अभिनय, जो उन्हें कभी अच्छा नहीं लगा — “मुझे कभी अच्छा नहीं लगा मेकअप करना”पाठ से
1949–50निर्णायक वर्ष — ‘आएगा आने वाला’ (महल, संगीत खेमचंद प्रकाश), ‘हवा में उड़ता जाए’ (बरसात, शंकर-जयकिशन), ‘चले जाना नहीं नैन मिला के’ (बड़ी बहन, हुस्नलाल-भगतराम)। एक नए युग का सूत्रपातपाठ से
पचास का दशकदीवाली के दिन तड़के संगीतकारों के घर मिठाई पहुँचाने का चलन; ‘तराना’, ‘बाजार’, ‘संगदिल’ के लिए पार्श्वगायनपाठ से
1960कोरस गाने वालों का जो समूह मिला, वह लगभग अस्सी तक साथ चला; ‘मुगल-ए-आजम’ का ‘प्यार किया तो डरना क्या’पाठ + खोजबीन
196327 जनवरी को नई दिल्ली में ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ का पहला गायन — 1962 के युद्ध में शहीद सैनिकों की स्मृति मेंखोजबीन
1969पद्म भूषणखोजबीन
1980 के आस-पासरेकॉर्डिंग की पद्धति बदली — कोरस पहले, मुख्य गायन बाद मेंपाठ से
1989दादासाहेब फाल्के पुरस्कारखोजबीन
1999पद्म विभूषणखोजबीन
2001भारत रत्न — देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मानपाठ की भूमिका + खोजबीन
2007फ़्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑफ़िसर ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनर’खोजबीन
20226 फरवरी को मुंबई में निधनखोजबीन
ध्यान रखिए: समय-रेखा बनाते समय हर तिथि को किसी विश्वसनीय स्रोत से मिलाकर ही लिखिए — पाठ्यपुस्तक, विश्वकोश, या सरकारी पुरस्कार-सूची। इंटरनेट पर एक ही घटना की अलग-अलग तिथियाँ मिल सकती हैं; ऐसे में दो-तीन स्रोत मिलाकर देखिए।
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