गंगा अध्याय 4 खोजबीन

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
1. “जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तब मुझे भी ऐसे ही मेडल मिलेंगे।” लता जी ने बचपन में मेडल पाने की कल्पना की और जीवन में अनगिनत पुरस्कार और मेडल प्राप्त भी किए। पता कीजिए कि उन्होंने जीवन-भर में कौन-कौन से ‘मेडल’ और पुरस्कार प्राप्त किए?
उत्तर

बचपन में कुमार गंधर्व को काली शेरवानी पर मेडल लगाए देखकर लता जी के मन में जो इच्छा जगी थी, वह जीवन-भर में कई गुना पूरी हुई। मुख्य सम्मान इस प्रकार हैं —

वर्षसम्मानकिसका
1969पद्म भूषणभारत सरकार — तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान
1989दादासाहेब फाल्के पुरस्कारभारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान
1997महाराष्ट्र भूषणमहाराष्ट्र सरकार
1999पद्म विभूषणभारत सरकार — दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान
2001भारत रत्नदेश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान — यह पाने वाली वे संगीत जगत की गिनी-चुनी विभूतियों में हैं
2007ऑफ़िसर ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनरफ़्रांस सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
विभिन्न वर्षराष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार — सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका (तीन बार)भारत सरकार
विभिन्न वर्षफ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका पुरस्कार (अनेक बार) तथा फ़िल्मफेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट1974 के बाद उन्होंने नए गायकों को अवसर देने के लिए यह पुरस्कार लेना स्वयं बंद कर दिया
अनेक राज्यों तथा विश्वविद्यालयों की मानद उपाधियाँ; मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हीं के नाम पर ‘लता मंगेशकर पुरस्कार’ आरंभ किया
खोजबीन कैसे कीजिए: पुरस्कारों की सूची के लिए सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं — भारत सरकार के पद्म पुरस्कारों का सरकारी पृष्ठ, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों की वार्षिक विवरणिका, और पुस्तकालय का कोई विश्वकोश। एक ही तथ्य कम-से-कम दो स्रोतों से मिलाइए, क्योंकि इंटरनेट पर वर्ष अकसर गलत मिलते हैं।
सोचने की बात: बचपन में जिस मेडल की कल्पना की थी, वह मिल जाने के बाद भी उन्होंने उसे कभी पहनकर नहीं दिखाया — वे सादी सफ़ेद साड़ी में ही मंच पर आती रहीं। इससे उनके व्यक्तित्व का वही पक्ष उजागर होता है जो पूरे साक्षात्कार में दिखता है — उपलब्धि का सुख, पर प्रदर्शन का मोह नहीं
प्र2.
2. पाठ में लता मंगेशकर ने कई फिल्मों और गीतों का उल्लेख किया है। इंटरनेट की सहायता से इनमें से किसी एक फिल्म और गीत को देखकर उसके विषय में अपने विचार लिखिए। आपको यह फिल्म और गीत कैसा लगा और क्यों?
उत्तर

पाठ में उल्लिखित फ़िल्में और गीत —

फ़िल्मगीतसंगीतकार
महल (1949)‘आएगा आने वाला’खेमचंद प्रकाश
बरसात (1949)‘हवा में उड़ता जाए मोरा लाल दुपट्टा मलमल का’शंकर-जयकिशन
बड़ी बहन (1949)‘चले जाना नहीं नैन मिला के’हुस्नलाल-भगतराम
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे (1995)‘मेरे ख्वाबों में जो आए’जतिन-ललित
संत तुकाराम (मराठी)‘अमी जातो अमचा गावा, अमचा राम-राम ध्यावा’प्रभात फ़िल्म कंपनी की फ़िल्म
छत्रपति शिवाजीअंतिम गीत की दो पंक्तियाँ लता जी ने स्वयं गाईंनिर्देशक भालजी पेंढारकर
तराना, बाजार, संगदिलपार्श्वगायन

नमूना उत्तर — गीत: ‘आएगा आने वाला’ (फ़िल्म ‘महल’, 1949)

यह गीत सुनते ही समझ आ जाता है कि इसे ‘नए युग का सूत्रपात’ क्यों कहा गया। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है इसका आरंभ — आवाज़ पहले बहुत दूर से, धुँधली-सी सुनाई देती है और धीरे-धीरे पास आती जाती है। लता जी ने पाठ में इसका रहस्य स्वयं बताया है — “मुझे हॉल में बहुत दूर से चलकर दबे पाँव रेकॉर्डिंग वाले माईक तक आना पड़ता था और उसी अनुपात में रेकॉर्डिंग के माईक पर स्वर का उतार-चढ़ाव कैद किया जाता था।” आज यह काम कंप्यूटर पर एक क्लिक से हो जाता है; तब यह पाँव से चलकर किया गया था।

मुझे यह गीत इसलिए अच्छा लगा कि इसमें आवाज़ स्वयं अभिनय कर रही है। फ़िल्म में परदे पर मधुबाला हैं, पर डर, प्रतीक्षा और रहस्य — तीनों भाव गले से पैदा होते हैं, चेहरे से नहीं। गीत की धुन में बहुत कम वाद्य हैं, इसलिए आवाज़ के चारों ओर एक खालीपन बना रहता है, जो भूतिया वातावरण को और गहरा कर देता है। यह गीत सिखाता है कि प्रभाव साधनों की अधिकता से नहीं, उनके सही चुनाव से बनता है

अपना उत्तर लिखते समय: केवल ‘अच्छा लगा’ मत लिखिए। तीन बातें अवश्य लिखिए — (1) गीत/फ़िल्म किस बारे में है, (2) उसमें आपको कौन-सी एक चीज़ सबसे विशेष लगी (धुन, शब्द, आवाज़, दृश्य), और (3) वह विशेष क्यों लगी। तीसरी बात ही आपका अपना विचार है।
प्र3.
3. अब आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी की सहायता से लता मंगेशकर द्वारा गाया हुआ गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ सुन सकते हैं।
उत्तर

यह गतिविधि सुनने की है — पुस्तक चाहती है कि आप गीत को केवल पढ़ें नहीं, सुनें। सुनने से पहले इतना जान लीजिए, तो गीत कहीं गहरा उतरेगा —

बातविवरण
गीतकारकवि प्रदीप
संगीतकारसी. रामचंद्र — जिनका नाम पाठ में भी आया है
गायिकालता मंगेशकर
पहला गायन27 जनवरी 1963, नई दिल्ली — गणतंत्र दिवस के अगले दिन हुए समारोह में
पृष्ठभूमिसन् 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में। यह किसी फ़िल्म का गीत नहीं है — यह एक श्रद्धांजलि-गीत है।
प्रसिद्ध पंक्तियाँ“ऐ मेरे वतन के लोगो, ज़रा आँख में भर लो पानी / जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो क़ुरबानी”
प्रसिद्ध प्रसंगकहा जाता है कि यह गीत सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की आँखें भर आई थीं।

सुनते समय इन बातों पर ध्यान दीजिए —

  • गीत की गति बहुत धीमी है। तेज़ लय जोश जगाती है, धीमी लय शोक और आदर — यहाँ दूसरा भाव चाहिए था।
  • पहली पंक्ति में ही ‘आँख में भर लो पानी’ कहकर श्रोता से कुछ माँगा गया है। गीत उपदेश नहीं देता, निवेदन करता है — इसीलिए वह चुभता नहीं, भीतर उतर जाता है।
  • पूरे गीत में गायिका की आवाज़ कहीं ऊँची नहीं होती। शोक को चिल्लाकर नहीं, ठहरकर व्यक्त किया गया है।
पुस्तक के इस अंश में एक बात खटकती है: प्रश्न कहता है “नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी की सहायता से”, पर मुद्रित पृष्ठ 82 पर उसके नीचे कोई कड़ी या क्यू-आर कोड छपा नहीं है। ऐसे में विद्यालय के पुस्तकालय, शिक्षक की सहायता, या पाठ के आरंभ (पृष्ठ 62) पर दिए गए क्यू-आर कोड से काम चलाइए। सुनने के बाद अपनी लेखन-पुस्तिका में तीन-चार वाक्य लिखिए कि गीत सुनते समय आपको क्या महसूस हुआ।
इस गीत का लता जी के जीवन में स्थान: उन्होंने हज़ारों प्रेमगीत गाए, पर जिस गीत से उनका नाम सबसे अधिक जुड़ा, वह न फ़िल्म का है, न प्रेम का — वह शहीदों का है। यही उस बात को सिद्ध करता है जो वे साक्षात्कार के अंत में कहती हैं — “मेरा गाना अमर है।” गीत तभी अमर होता है जब वह किसी एक व्यक्ति का न रहकर पूरे देश का हो जाए।
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