यह प्रश्न आपके अपने अनुभव का है, इसलिए उत्तर आपका अपना ही होगा। एक अच्छे उत्तर में तीन बातें अवश्य होनी चाहिए — (1) घटना कब और कहाँ हुई, (2) आपने कौन-सा पक्ष लिया और सामने कौन-कौन थे, (3) उसका परिणाम क्या रहा और आपने उससे क्या सीखा। घटना छोटी हो तो भी चलेगी — सही बात पर खड़ा होना बड़ी घटना की माँग नहीं करता।
नमूना उत्तर: पिछले वर्ष हमारी कक्षा में एक अर्धवार्षिक परीक्षा के बाद कुछ साथियों ने तय किया कि वे शिक्षक से मिलकर कहेंगे कि प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर था, जबकि वास्तव में वह पूरा पाठ्यक्रम के भीतर से ही था। उन्होंने मुझसे भी साथ चलने को कहा। मुझे यह बात सही नहीं लगी, क्योंकि हम अपनी कम तैयारी का दोष शिक्षक पर डाल रहे थे। मैंने साफ मना कर दिया। दो-तीन दिन तक मित्रों ने मुझसे बात नहीं की और मुझे बहुत अकेला लगा। फिर जब शिक्षक ने कक्षा में हर प्रश्न का पाठ-संदर्भ दिखाया, तब सबको अपनी बात का खोखलापन समझ आया। मुझसे किसी ने कुछ कहा तो नहीं, पर उस दिन के बाद मुझे लगा कि अकेले रह जाना उतना कठिन नहीं होता, जितना अपनी नज़र में गिर जाना। मैंने यह सीखा कि सही बात पर खड़े होते समय आवाज़ ऊँची करने की ज़रूरत नहीं होती — शांत रहकर मना कर देना भी काफी होता है।