प्र1.
1. ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए। [साक्षात्कार के मुख्य बिंदु — • साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम • प्रश्नोत्तर • भावनात्मक वातावरण • आमंत्रण, स्वागत और परिचय • उत्तर देने की शैली का संकेत • विचार और उदाहरण • संस्मरण • समापन]
उत्तर
पुस्तक में यह तालिका आधी भरी है — बाएँ खाने में विधा के आठ बिंदु दिए हैं और दाएँ खाने में आपको पाठ की पंक्तियाँ भरनी हैं। पूरी भरी हुई तालिका इस प्रकार बनेगी —
| साक्षात्कार का मुख्य बिंदु | पाठ की पंक्ति / अंश | वह इस बिंदु को कैसे रेखांकित करता है |
|---|---|---|
| साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम | शीर्षक के नीचे — “ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)”; और पूरे पाठ में हर बार — “यतींद्र मिश्र : …” तथा “लता मंगेशकर : …” | साक्षात्कार में हर कथन के आगे बोलने वाले का नाम लिखा जाता है, ताकि पाठक को किसी क्षण संदेह न रहे कि यह किसकी आवाज़ है। नाटक के संवाद भी इसी तरह छपते हैं। |
| प्रश्नोत्तर | “यतींद्र मिश्र : पिताजी से संगीत के अलावा आपने क्या-क्या और सीखा?” “लता मंगेशकर : सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा।” | यही साक्षात्कार का आधार-ढाँचा है — एक प्रश्न, एक उत्तर, और फिर अगला प्रश्न। पूरा पाठ इसी जोड़ी में आगे बढ़ता है। |
| भावनात्मक वातावरण | “(हँसते हुए) अरे! यह तो हम सब भाई-बहन बहुत करते थे।”; “(खिलखिलाकर हँसती हैं)”; “(हँसते हुए) बड़ा मजेदार प्रश्न है आपका।”; “इस पर वे लाड़ से भरकर बोले—”; “उन्होंने एक बड़ी मार्मिक बात कही, जो आज तक मुझे भूलती नहीं।” | कोष्ठक में दिए गए ये संकेत बताते हैं कि उस समय वातावरण कैसा था। लिखित शब्द हँसी, ठहराव या भावुकता को नहीं पकड़ पाते, इसलिए साक्षात्कारकर्ता उन्हें कोष्ठक में दर्ज करता है। |
| आमंत्रण, स्वागत और परिचय | “दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं… आप अगर तैयार हों, तो मैं ऐसे असंख्य शुभचिंतकों… की ओर से प्रणाम करते हुए आपसे प्रश्न पूछना चाहूँगा…” उत्तर — “जी, जरूर। आपका बेहद शुक्रिया कि आपका ऐसा कुछ करने का मन है। आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।” | यह साक्षात्कार का आरंभिक कथन (भूमिका) है। इसमें तीनों काम एक साथ होते हैं — बात करने की अनुमति माँगना, अतिथि का स्वागत करना और पाठक को यह बताना कि यह बातचीत क्यों हो रही है। |
| उत्तर देने की शैली का संकेत | “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।”; “कहना मुश्किल है इस पर क्या बोलूँ?”; “यह कह पाना मुश्किल होगा कि…”; “ऐसी कोई खास बात मुझे याद नहीं आती। अलबत्ता इतना जरूर कहूँगी…” | ये वाक्य बताते हैं कि उत्तर किस मनोदशा से दिए जा रहे हैं — बिना दावे के, अनुभव के आधार पर, और जहाँ न पता हो वहाँ साफ़ मना करते हुए। इसी को ‘उत्तर देने की शैली’ कहते हैं। |
| विचार और उदाहरण | विचार — “संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित वह जरूर रच देता है।” उदाहरण — उस्ताद अली अकबर खाँ का सरोद का तार टूटना और उनका कथन “बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।” | अच्छे साक्षात्कार में उत्तर देने वाला विचार को हवा में नहीं छोड़ता — उसे किसी घटी हुई घटना से बाँध देता है। इसी से बात पाठक के मन में उतरती है। |
| संस्मरण | (क) दीवाली की सुबह साढ़े पाँच बजे नौशाद साहब के घर मिठाई लेकर पहुँचना और उनका कहना — “हम सारे संगीतकारों को मिलकर तो तुम्हें मिठाई खिलानी चाहिए, जो तुमने हमारी धुनों में इतनी मिठास घोली है।” (ख) ‘संत तुकाराम’ फिल्म की नकल — तकिये जमाकर स्वर्ग बनाना और उस पर बैठकर गाना। (ग) कुमार गंधर्व को काली शेरवानी में मेडल लगाए देखना। | संस्मरण साक्षात्कार का सबसे जीवंत अंग है। ये बीते हुए दृश्य हैं, जिन्हें बोलने वाला अपनी स्मृति से खींचकर सामने रख देता है — इससे व्यक्ति का चरित्र आँकड़ों से नहीं, चित्रों से खुलता है। |
| समापन | “आज मुझे लगता है कि हे प्रभु! तुमने जो भी दिया, वह बहुत दिया, दूसरों से कहीं ज्यादा दिया। अपनी कृपा की छाया से जैसे मुझे छाँह दी है, वैसे ही हर एक कलाकार और नेक इंसानों के ऊपर भी रखना… यही प्रार्थना है।” | साक्षात्कार अंतिम प्रश्न के उत्तर पर ही समाप्त नहीं होता; अच्छा समापन उसे एक ऊँचाई देकर छोड़ता है। यहाँ बात व्यक्तिगत से उठकर सब कलाकारों के लिए प्रार्थना बन जाती है — इसी को समापन का उठान कहते हैं। |
इस तालिका से क्या सीखने को मिलता है: साक्षात्कार केवल ‘सवाल-जवाब’ नहीं है। एक अच्छे साक्षात्कार का ढाँचा तीन हिस्सों का होता है — भूमिका (परिचय और स्वागत), मुख्य भाग (प्रश्नोत्तर, जिनमें विचार, उदाहरण और संस्मरण गुँथे रहते हैं) और समापन। इनके बीच कोष्ठक में दिए गए भाव-संकेत वातावरण बनाते हैं। इन्हीं आठ बिंदुओं की मौजूदगी इस पाठ को कहानी या रेखाचित्र से अलग करके साक्षात्कार सिद्ध करती है।