प्र1.
मञ्जूषायाः पदम् उपयुज्य वाक्यं रचयत। — मञ्जूषा : वाणीपरिष्कारिका, एकता, सर्वतः, सेवा, सुन्दरम्, पूर्वजानाम्, सत्पथे प्रेरयितुम्, विश्वकल्याणाय, त्यागस्य, सन्तोषस्य, विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्
उत्तर
वाक्यम् — संस्कृतेन भारतीयानाम् एकता भवति। (हिन्दी — संस्कृत से भारतीयों की एकता होती है।)
प्रयुक्तं मञ्जूषापदम् — एकता (स्त्रीलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन)
क्रिया — भवति (लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन) — कर्ता ‘एकता’ एकवचन है, अतः क्रिया भी एकवचन
‘संस्कृतेन’ — करणे तृतीया (जिस साधन से)
क्रिया — भवति (लट्, प्रथमपुरुष, एकवचन) — कर्ता ‘एकता’ एकवचन है, अतः क्रिया भी एकवचन
‘संस्कृतेन’ — करणे तृतीया (जिस साधन से)
वाक्य कैसे बनाया गया: मञ्जूषा का शब्द ‘एकता’ प्रथमा में दिया है, इसलिए उसे कर्ता बनाना सबसे सरल है। कर्ता प्रथमा में, साधन तृतीया में और क्रिया कर्ता के वचन के अनुसार — यही तीन नियम वाक्यरचना के हर प्रश्न में काम आते हैं। आधार पाठ का श्लोक १ है — ‘भारतीयैकतासाधकं संस्कृतम्’।