प्र1.
विद्वांसः …………………… भवन्ति।
उत्तर
उत्तरम् — विद्वांसः तेजोराशयः भवन्ति। (हिन्दी — विद्वान् तेज के पुञ्ज होते हैं।)
कर्ता — विद्वांसः (पुंलिङ्ग · प्रथमा · बहुवचन)
क्रिया — भवन्ति (लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
अतः विधेय-विशेषण भी बहुवचन में चाहिए → तेजोराशयः
सन्धिः — तेजस् + राशयः → विसर्ग → ओ (विसर्गसन्धि)
क्रिया — भवन्ति (लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
अतः विधेय-विशेषण भी बहुवचन में चाहिए → तेजोराशयः
सन्धिः — तेजस् + राशयः → विसर्ग → ओ (विसर्गसन्धि)
यही पद क्यों: मञ्जूषा के छह पदों में केवल ‘तेजोराशयः’ ही बहुवचन में है — ‘उल्लासः, किरणः, अनुपमा, मानम्, जगत्’ सब एकवचन हैं। कर्ता ‘विद्वांसः’ बहुवचन है और क्रिया ‘भवन्ति’ भी, इसलिए वचन का मेल केवल यही पद बैठाता है। यह पर्यायपद किसका है ? — पाठ के ‘ज्ञानपुञ्जप्रभा’ का; ‘पुञ्ज’ = राशि और ‘प्रभा’ = तेज, दोनों मिलकर ‘तेजोराशिः’ बनते हैं।