आशयः — युगानाम् आरम्भे नाभिः नाम कश्चन महाराजः आसीत्, यः प्रजानां प्रियः, राजनीतौ युद्धतन्त्रे प्रशासने च समर्थः च आसीत्। तस्य पत्नी मरुदेवी बुद्धिमती करुणाशालिनी च आसीत्। तयोः प्रियः पुत्रः ऋषभः सर्वगुणसम्पन्नः, विद्यायाम् अधीतः, राजनीतिज्ञः च आसीत्। यौवनेन शोभमानं तं राजकुमारं दृष्ट्वा नाभिः तस्मै राज्यभारं दातुं चिन्तितवान्।
(हिन्दी — युगों के आरम्भ में नाभि नाम का एक महाराज था, जो प्रजा को प्रिय था तथा राजनीति, युद्धतन्त्र और प्रशासन आदि में समर्थ था। उसकी पत्नी मरुदेवी बुद्धिमती और करुणामयी थी। उन्हीं दोनों का प्रिय पुत्र था ऋषभ — सब गुणों से युक्त, पढ़ा-लिखा और राजनीति का जानकार। यौवन से शोभित उस राजकुमार को देखकर नाभि ने सोचा कि उसे राज्य का भार सौंप दिया जाए।)
| पदम् | व्याकरण-रूपः | अर्थः |
|---|---|---|
| युगानाम् आरम्भे | ष.ब.व. + स.ए.व. | युगों के आरम्भ में — कथा को अत्यन्त प्राचीन काल में रखने वाला वाक्यांश |
| नाभिनामकः | बहुव्रीहि, पुं.प्र.ए.व. | नाभिः नाम यस्य सः — नाभि नाम वाला |
| करुणाशालिनी | स्त्री.प्र.ए.व. | दयायुक्ता — दयालु (पुस्तक का शब्दार्थ) |
| अधीतविद्यः | बहुव्रीहि, पुं.प्र.ए.व. | अधीता विद्या येन सः — जिसने विद्या पढ़ ली, पढ़ा-लिखा |
| विलसन्तम् | शतृ-कृदन्त, पुं.द्वि.ए.व. | शोभमानम् — शोभा पाते हुए (को) |
| वीक्ष्य | ल्यबन्त (वि + √ईक्ष् + ल्यप्) | दृष्ट्वा — देखकर |
| समर्पयितुम् | तुमुन्नन्त | दातुम् — सौंपने के लिए |
| अचिन्तयत् | √चिन्त्, लङ्, प्र.पु.ए.व. | चिन्तितवान् — विचार किया (पुस्तक का शब्दार्थ) |