शारदा अध्याय 10 णमो अरिहन्ताणम् के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-06
इस अध्याय के बारे में
पाठ-परिचय — यह गद्यकथा है, कोई काव्य नहीं। कथा का नायक है ऋषभ — राजा नाभि तथा रानी मरुदेवी का पुत्र, जो आगे चलकर प्रजा के प्रेम से ‘ राजा ऋषभदेवः ’ कहलाया और जैनपरम्परा में प्रथम (आदि) तीर्थङ्कर माना जाता है। पाठ उसकी दो अवस्थाएँ दिखाता है — पहले एक कुशल, प्रजावत्सल राजा, फिर सब त्यागकर सत्य खोजने निकला महामुनि। कथावस्तु (राजा-भाग) — समाज में दुर्भिक्ष तथा परस्पर विद्वेष उठे। नाभि ने सोचा कि ऋषभ की राजनीति की परीक्षा का यही उपयुक्त काल है और उसे राज्य सौंप दिया। ऋषभ ने पहले कारण खोजा — जनता का आलस्य, कृषि में कमी, उत्पादनक्षमता का अभाव। फिर उपाय किया — कृषिकार्य, विविध पदार्थों से भोजननिर्माण, तन्तुओं से वस्त्रनिर्माण, गाय-घोड़े आदि पशुओं का पालन, काष्ठ-धातु-शिला से गृहोपयोगी वस्तुओं का निर्माण, पात्रनिर्माण, गृहनिर्माण तथा नगरनिर्माण — इन सब जीवनकौशलों का प्रशिक्षण । परिणाम — जनता सक्रिय
अभ्यास
- पाठः
- पाठः
- पाठः
- णमोकारमहामन्त्रः
- सर्वं शब्देन भासते
- अत्र इदम् अवधेयम्
- संस्कृत-वाक्यानां प्राकृतानुवादः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- स्वाध्यायान्मा प्रमदः
- यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्