शारदा अध्याय 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-06
इस अध्याय के बारे में
पाठ-परिचय — पुस्तक स्वयं आरम्भ में बताती है — ‘रामायणं महाभारतं चेति द्वौ प्रसिद्धौ इतिहास-ग्रन्थौ।’ महाभारत को आधार बनाकर अनेक ग्रन्थ रचे गए; उन्हीं में महामहोपाध्याय श्री रङ्गनाथशर्मा का लघुरूपक एकचक्रम् भी एक है। महाभारत में वर्णित बकासुरवध ही इसका कथावस्तु है, और यह पाठ्यभाग उसी रूपक के तृतीय-चतुर्थ अङ्कों से लिया गया है। पूर्वकथा — वारणावत के लाक्षागृह से बचकर पाण्डव एकचक्रा नगरी में एक ब्राह्मण के घर छिपकर रह रहे हैं। नगर के पास पर्वत पर रहने वाले बक नामक असुर के साथ नगरवासियों की सन्धि है — प्रतिदिन एक नगरवासी स्वयं जाकर उसका भक्ष्य बनेगा। उस दिन बारी उसी ब्राह्मण-परिवार की थी। रोने की आवाज़ सुनकर कुन्ती ने कारण पूछा और वचन दिया कि ‘अपने पुत्रों में से एक को मैं बकासुर के पास भेजूँगी’। कथावस्तु — कुन्ती भीम को अपनी प्रतिज्ञा बताती है। भीम तनिक भी नहीं हिचकता — वह कहता है कि ब्राह्मण
अभ्यास
- पाठ-परिचयः तथा पूर्वकथा
- नाट्यांशः १
- पाठस्य त्रयः श्लोकाः
- नाट्यांशः २
- नाट्यांशः ३
- सर्वं शब्देन भासते
- अत्र इदम् अवधेयम्
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- स्वाध्यायान्मा प्रमदः
- यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्