उत्तरम् — सम् + कल्पितम् ( व्यञ्जन-सन्धिः — परसवर्ण/अनुस्वार-सन्धिः )। (हिन्दी — ‘संकल्प किया गया’।)
सम् + कल्पितम् → सङ्कल्पितम्
नियम — मोऽनुस्वारः तथा अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः : पदान्त ‘म्’ के बाद व्यञ्जन आने पर वह पहले अनुस्वार बनता है, फिर उस व्यञ्जन के वर्ग का पञ्चम वर्ण हो जाता है।
यहाँ अगला वर्ण ‘क्’ (कवर्ग) है → ‘म्’ → ङ्
इसी नियम से पाठ के तीन और शब्द बने हैं: सम् + ग्रहः = सङ्ग्रहः (धर्मसङ्ग्रहः), सम् + कल्पितम् = सङ्कल्पितम्, तथा सम् + चितम् = सञ्चितम् प्रकार के शब्द। सूत्र सरल है — म् के बाद जिस वर्ग का व्यञ्जन हो, म् उसी वर्ग का पञ्चम वर्ण बन जाता है : क-वर्ग → ङ्, च-वर्ग → ञ्, ट-वर्ग → ण्, त-वर्ग → न्, प-वर्ग → म्।
लिखने की छूट: ‘सङ्कल्पितम्’ को ‘संकल्पितम्’ भी लिखा जाता है — अनुस्वार और परसवर्ण दोनों रूप शुद्ध हैं। पुस्तक ने परसवर्ण रूप छापा है, इसलिए उत्तर में भी वही रखना अच्छा है।