प्र1.
अधस्तात् दत्तानि वाक्यानि केन कं प्रति उक्तानि इति निर्दिशत — यथा : ‘तस्माद् बालकस्य पिता तपस्वी शोचति’ — कुन्त्या, भीमम्। (१) न हि मातुराज्ञा प्रत्यादेशमर्हति (२) न हि खरदंष्ट्रो मृगाधिपः सहायमपेक्षते (३) क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम् (४) अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे (५) तस्य भीमस्य प्रेषणं कथं नु त्वया सङ्कल्पितम् ? (६) नरभक्षणं नाम मांसाशिनां राक्षसानां धर्मः
उत्तर
पूर्णा तालिका —
| क्र.सं. | वाक्यानि | केन / कया | कं / कां प्रति | प्रसङ्गः (पृष्ठम्) |
|---|---|---|---|---|
| यथा | तस्माद् बालकस्य पिता तपस्वी शोचति | कुन्त्या | भीमम् | बक की शर्त बताते हुए (११३) |
| १. | न हि मातुराज्ञा प्रत्यादेशमर्हति | भीमेन | युधिष्ठिरम् | युधिष्ठिर की असहमति का उत्तर (११५) |
| २. | न हि खरदंष्ट्रो मृगाधिपः सहायमपेक्षते | भीमेन | अर्जुनम् | अर्जुन के साथ चलने के प्रस्ताव पर (११५) |
| ३. | क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम् | भीमेन | कुन्तीम् (मातरम्) | माता को सान्त्वना देते हुए (११४) |
| ४. | अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे | सहदेवेन | भीमम् | भीम की भूख पर परिहास (११५) |
| ५. | तस्य भीमस्य प्रेषणं कथं नु त्वया सङ्कल्पितम् ? | युधिष्ठिरेण | कुन्तीम् (मातरम्) | माता के निश्चय पर आपत्ति (११५) |
| ६. | नरभक्षणं नाम मांसाशिनां राक्षसानां धर्मः | बकेन | भीमम् | धर्म-विवाद में अपना पक्ष (११६) |
उत्तर कैसे खोजें — दो कसौटियाँ: पहली — क्रियारूप: जिस वाक्य में ‘भोक्ष्यसे’, ‘त्वया’, ‘ते’ जैसे मध्यमपुरुष के पद हों, वह किसी उपस्थित व्यक्ति से कहा गया है, और वही ‘कं प्रति’ का उत्तर है। जैसे ‘त्वया सङ्कल्पितम्’ — ‘त्वया’ कुन्ती के लिए है, अतः उत्तर ‘कुन्तीम् प्रति’। दूसरी — विषय: जिस बात का विरोध या समर्थन किया जा रहा है, वह किसने कही थी — वही श्रोता है। ‘मातुराज्ञा प्रत्यादेशमर्हति’ का विरोध युधिष्ठिर की आपत्ति से है, अतः श्रोता युधिष्ठिर।
विभक्ति की सावधानी: ‘केन’ का उत्तर तृतीया में देना है (भीमेन, सहदेवेन, युधिष्ठिरेण, बकेन) क्योंकि क्रिया ‘उक्तम्’ कर्मवाच्य है और कर्तरि तृतीया लगती है। स्त्री-पात्र के लिए स्तम्भ ‘कया’ है — ‘कुन्त्या’। ‘कं प्रति’ का उत्तर द्वितीया में देना है, क्योंकि ‘प्रति’ के योग में द्वितीया आती है — भीमम्, युधिष्ठिरम्, अर्जुनम्; स्त्री-पात्र के लिए ‘कां प्रति’ → ‘कुन्तीम्’।
ध्यान दें (३) की बारीकी: ‘क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम्’ — यहाँ ‘क्षत्रियाण्या’ स्वयं कुन्ती है (क्षत्रिय पाण्डु की पत्नी)। भीम माता से ही उसकी प्रशंसा कर रहा है, इसलिए वक्ता भीम और श्रोता कुन्ती। इसे उलटकर ‘कुन्त्या, भीमम्’ लिखना अशुद्ध होगा।