उत्तरम् — पौराः पर्यायक्रमेण बकासुराय बलिम् आहरन्ति। (हिन्दी — नगरवासी बारी-बारी से बकासुर के लिए बलि ले जाते हैं।)
पाठ की पंक्ति — ‘पर्यायक्रमेण तस्मै बलिमाहरन्ति पौराः।’ (भीमः, पृष्ठ ११२)
प्रश्न ‘कथम्’ = किस प्रकार ? → उत्तर रीति/प्रकार बताने वाले पद से
‘पर्यायक्रमेण’ — तृतीया विभक्ति (प्रकारे तृतीया)
‘पर्यायक्रमेण’ ही क्यों: ‘कथम्’ का उत्तर सदा क्रिया-विशेषण या तृतीया-विभक्त्यन्त पद में आता है, संज्ञा में नहीं। सन्धि की शर्त यही थी — ‘प्रतिदिनं कश्चित् नगरवासी स्वेच्छया असुरस्य भक्ष्यं भवेत्’, अर्थात् हर दिन एक व्यक्ति, बारी-बारी से। इसीलिए ब्राह्मण-परिवार की बारी को पाठ ‘पर्यायपतितम्’ भी कहता है।
एक शब्द, तीन रूप: यह पाठ ‘पर्याय’ शब्द को तीन रूपों में दिखाता है — पर्यायक्रमेण (बारी-बारी से), पर्यायः (‘श्वः प्रभाते भवत्यस्य विप्रस्य पर्यायः’ = बारी), तथा पर्यायपतितम् (बारी से आ पड़ा)। तीनों का मूल अर्थ एक ही है — क्रम, बारी।