शारदा अध्याय 9 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
पर्यायवाचि-पदानां मेलनं कुरुत — (क) आयोधनम् (ख) विप्रः (ग) असुरः (घ) अम्ब (ङ) हुताशनः ॥ १. ब्राह्मणः २. जननी ३. अग्निः ४. दैत्यः ५. युद्धम्
उत्तर

शुद्धं मेलनम् — (क)–५, (ख)–१, (ग)–४, (घ)–२, (ङ)–३।

क्रमः‘क’ स्तम्भः‘ख’ स्तम्भःपाठ का प्रयोगमेल का कारण / प्रमाण
(क)आयोधनम्५. युद्धम्न केवलं भोजनमुपस्थितम्। आयोधनमपि। (११५)अमरकोष स्वयं प्रमाण देता है — ‘युद्धमायोधनं जन्यं प्रधनं प्रविदारणम्’ (पृष्ठ १२६)
(ख)विप्रः१. ब्राह्मणःश्वः प्रभाते भवत्यस्य विप्रस्य पर्यायः। (११३)शब्दार्थ-तालिका ही कहती है — ‘विप्रस्य = ब्राह्मणस्य’ (पृष्ठ १२०)
(ग)असुरः४. दैत्यःबकनामा दैत्यः … बकासुरस्य समीपम् (११२)अमरकोष — ‘असुरा दैत्य-दैतेयदनुजेन्द्रारिदानवाः’ (पृष्ठ १२६)
(घ)अम्ब२. जननीअम्ब ! किमिदानीमुपक्षिप्तम् ? (११५)‘अम्ब’ माता का सम्बोधन है; ‘जननी’ = जन्म देने वाली = माता
(ङ)हुताशनः३. अग्निःमदीय-जठरस्थाय भगवते हुताशनाय (११६)शब्दार्थ-तालिका — ‘हुताशनाय = हुतम् अशनं यस्य, तस्मै; अर्थ — अग्नि को’
मेलन जाँचने की दो कसौटियाँ: पहली — शब्द-रचना: ‘हुताशनः’ = हुतम् (यज्ञ में डाली आहुति) अशनम् (भोजन) यस्य सः — जिसका भोजन ही आहुति है, वह अग्नि ही हो सकता है। ‘जननी’ = जनयति इति — जो जन्म दे। ऐसे ही ‘आयोधनम्’ = आ + √युध् + ल्युट् — जिसमें युद्ध किया जाए। दूसरी — पुस्तक का अपना प्रमाण: इस पाठ में पुस्तक ने पृष्ठ १२६ पर अमरकोष के तीन श्लोकांश जान-बूझकर दिए हैं, जिनमें ‘असुर’ तथा ‘आयोधन’ के पर्याय गिनाए गए हैं — यह प्रश्न सीधे उसी सामग्री से जुड़ा है।
अतिरिक्त पर्याय (परीक्षा के लिए): युद्धम् = आयोधनम्, जन्यम्, प्रधनम्, प्रविदारणम्, समरः, रणः, सङ्ग्रामः। ब्राह्मणः = विप्रः, द्विजः, श्रोत्रियः, भूदेवः। असुरः = दैत्यः, दानवः, राक्षसः, निशाचरः। अग्निः = हुताशनः, पावकः, वह्निः, अनलः, कृशानुः। माता = जननी, अम्बा, प्रसूः, जनयित्री।
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