प्र1.
पर्यायवाचि-पदानां मेलनं कुरुत — (क) आयोधनम् (ख) विप्रः (ग) असुरः (घ) अम्ब (ङ) हुताशनः ॥ १. ब्राह्मणः २. जननी ३. अग्निः ४. दैत्यः ५. युद्धम्
उत्तर
शुद्धं मेलनम् — (क)–५, (ख)–१, (ग)–४, (घ)–२, (ङ)–३।
| क्रमः | ‘क’ स्तम्भः | ‘ख’ स्तम्भः | पाठ का प्रयोग | मेल का कारण / प्रमाण |
|---|---|---|---|---|
| (क) | आयोधनम् | ५. युद्धम् | न केवलं भोजनमुपस्थितम्। आयोधनमपि। (११५) | अमरकोष स्वयं प्रमाण देता है — ‘युद्धमायोधनं जन्यं प्रधनं प्रविदारणम्’ (पृष्ठ १२६) |
| (ख) | विप्रः | १. ब्राह्मणः | श्वः प्रभाते भवत्यस्य विप्रस्य पर्यायः। (११३) | शब्दार्थ-तालिका ही कहती है — ‘विप्रस्य = ब्राह्मणस्य’ (पृष्ठ १२०) |
| (ग) | असुरः | ४. दैत्यः | बकनामा दैत्यः … बकासुरस्य समीपम् (११२) | अमरकोष — ‘असुरा दैत्य-दैतेयदनुजेन्द्रारिदानवाः’ (पृष्ठ १२६) |
| (घ) | अम्ब | २. जननी | अम्ब ! किमिदानीमुपक्षिप्तम् ? (११५) | ‘अम्ब’ माता का सम्बोधन है; ‘जननी’ = जन्म देने वाली = माता |
| (ङ) | हुताशनः | ३. अग्निः | मदीय-जठरस्थाय भगवते हुताशनाय (११६) | शब्दार्थ-तालिका — ‘हुताशनाय = हुतम् अशनं यस्य, तस्मै; अर्थ — अग्नि को’ |
मेलन जाँचने की दो कसौटियाँ: पहली — शब्द-रचना: ‘हुताशनः’ = हुतम् (यज्ञ में डाली आहुति) अशनम् (भोजन) यस्य सः — जिसका भोजन ही आहुति है, वह अग्नि ही हो सकता है। ‘जननी’ = जनयति इति — जो जन्म दे। ऐसे ही ‘आयोधनम्’ = आ + √युध् + ल्युट् — जिसमें युद्ध किया जाए। दूसरी — पुस्तक का अपना प्रमाण: इस पाठ में पुस्तक ने पृष्ठ १२६ पर अमरकोष के तीन श्लोकांश जान-बूझकर दिए हैं, जिनमें ‘असुर’ तथा ‘आयोधन’ के पर्याय गिनाए गए हैं — यह प्रश्न सीधे उसी सामग्री से जुड़ा है।
अतिरिक्त पर्याय (परीक्षा के लिए): युद्धम् = आयोधनम्, जन्यम्, प्रधनम्, प्रविदारणम्, समरः, रणः, सङ्ग्रामः। ब्राह्मणः = विप्रः, द्विजः, श्रोत्रियः, भूदेवः। असुरः = दैत्यः, दानवः, राक्षसः, निशाचरः। अग्निः = हुताशनः, पावकः, वह्निः, अनलः, कृशानुः। माता = जननी, अम्बा, प्रसूः, जनयित्री।