प्र1.
उपकृतः
उत्तर
उत्तरम् — अपकृतः। (हिन्दी — ‘उपकृत’ = जिस पर उपकार किया गया; इसका विलोम ‘अपकृत’ = जिसका अपकार/अहित किया गया।)
उप + √कृ + क्त = उपकृतः — भला किया हुआ
अप + √कृ + क्त = अपकृतः — बुरा किया हुआ
भेद केवल उपसर्ग का है — ‘उप’ (पास, अनुकूल) बनाम ‘अप’ (दूर, प्रतिकूल)
अप + √कृ + क्त = अपकृतः — बुरा किया हुआ
भेद केवल उपसर्ग का है — ‘उप’ (पास, अनुकूल) बनाम ‘अप’ (दूर, प्रतिकूल)
उपसर्ग से विलोम बनाने का नियम: संस्कृत में बहुत-से विलोम केवल उपसर्ग बदलकर बनते हैं — उपकारः/अपकारः, उत्थानम्/अवसानम्, प्रवेशः/निर्गमः, आगमनम्/गमनम्। इसीलिए विलोम पूछे जाने पर पहले देखिए कि शब्द में कोई उपसर्ग तो नहीं है; यदि है, तो प्रायः उसी का उलटा उपसर्ग उत्तर दे देता है।
पाठ से जोड़िए: श्लोक में ‘परैरुपकृता वयम्’ आया है — दूसरों ने हम पर उपकार किया। यदि वहाँ ‘अपकृताः’ होता, तो अर्थ उलट जाता — दूसरों ने हमारा अहित किया। इसी एक उपसर्ग पर पूरे नाटक का धर्म टिका है।