प्र1.
…………………… मृष्टान्नम्।
उत्तर
उत्तरम् — शकटपूरं मृष्टान्नम्। (हिन्दी — गाड़ी भर स्वादिष्ट भोजन।)
पाठ की पंक्ति — ‘भक्ष्यभोज्यादिकं मृष्टान्नं शकटपूरं पूरयित्वा प्रेषणीयं भवति राक्षसाय।’ (कुन्ती, पृष्ठ ११४)
विशेष्य ‘मृष्टान्नम्’ — नपुंसकलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन
अतः विशेषण भी वही रूप — शकटपूरम्
विशेष्य ‘मृष्टान्नम्’ — नपुंसकलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन
अतः विशेषण भी वही रूप — शकटपूरम्
विशेषण का नियम: ‘विशेषणं विशेष्यनिघ्नम्’ — विशेषण सदा अपने विशेष्य के लिङ्ग, वचन तथा विभक्ति का अनुसरण करता है। मञ्जूषा के सात पदों में से केवल ‘शकटपूरम्’ ही नपुंसकलिङ्ग एकवचन में है और अर्थ की दृष्टि से भी भोजन के साथ ही जुड़ता है। शेष पद या तो पुंलिङ्ग हैं (प्रतिवेशी, खरदंष्ट्रः, जठरस्थः, कौन्तेयः), या स्त्रीलिङ्ग (क्षत्रियाणी), या द्विवचन (पीवरौ)।
शब्द-रचना: ‘शकटपूरम्’ = शकटं पूरयति इति — गाड़ी को भर देने वाला (उपपद-तत्पुरुष)। ‘मृष्टान्नम्’ = मृष्टम् अन्नम् (कर्मधारय) — यही अभ्यास के प्रश्न ८ का ‘यथा’ भी है।