अस्य गद्यांशस्य आशयः — रामायणं महाभारतं च — एतौ द्वौ भारतस्य प्रसिद्धौ इतिहासग्रन्थौ स्तः। महाभारतम् आधारीकृत्य बहवः ग्रन्थाः रचिताः। तेषु महामहोपाध्यायेन श्रीरङ्गनाथशर्मणा विरचितम् ‘एकचक्रम्’ इति लघुरूपकम् अन्यतमम् अस्ति। महाभारते वर्णितः बकासुरवधः एव अस्य रूपकस्य कथावस्तु। अयं पाठ्यभागः तस्य एव रूपकस्य तृतीयचतुर्थाङ्काभ्यां गृहीतः।
(हिन्दी — रामायण और महाभारत — ये दो भारत के प्रसिद्ध इतिहास-ग्रन्थ हैं। महाभारत को आधार बनाकर बहुत-से ग्रन्थ रचे गए। उनमें महामहोपाध्याय श्री रङ्गनाथशर्मा द्वारा रचित ‘एकचक्रम्’ नामक लघुरूपक भी एक है। महाभारत में वर्णित बकासुर-वध ही इस रूपक की कथावस्तु है। यह पाठ्यभाग उसी रूपक के तीसरे और चौथे अङ्क से लिया गया है।)
| पदम् / वाक्यांशः | क्या बताता है |
|---|---|
| इतिहास-ग्रन्थौ | रामायण तथा महाभारत को भारतीय परम्परा ‘इतिहास’ कहती है — अर्थात् ‘इति ह आस’ = ‘ऐसा ही हुआ था’। ये काव्य भी हैं और वृत्तान्त भी। |
| महाभारतम् अवलम्ब्य | ‘अवलम्ब्य’ = सहारा लेकर। कालिदास से लेकर आज तक असंख्य कवियों ने महाभारत की कथाओं पर नाटक और काव्य लिखे हैं। |
| लघुरूपकम् | रूपक = नाटक। ‘लघुरूपक’ अर्थात् छोटा नाटक, जिसमें अङ्क कम होते हैं। इसी से यह सिद्ध होता है कि यह पाठ गद्य नहीं, नाट्य-संवाद है। |
| कथावस्तु | नाटक की मूल कथा। यहाँ वह है — बकासुर का वध। |
| तृतीय-चतुर्थाङ्काभ्याम् उद्धृतः | ‘अङ्काभ्याम्’ पञ्चमी द्विवचन (अपादाने पञ्चमी) — दो अङ्कों से उद्धृत। अतः पाठ में दो दृश्य हैं : घर का दृश्य तथा वन का दृश्य। |