प्र1.
क्षत्रियाण्या अनुष्ठितम्।
उत्तर
उत्तरम् — क्षत्रियाणी अनुष्ठितवती। (हिन्दी — क्षत्राणी ने किया।)
दत्तं वाक्यम् (कर्मवाच्यम्/भाववाच्यम्) — क्षत्रियाण्या अनुष्ठितम्।
परिवर्तितं वाक्यम् (कर्तृवाच्यम्) — क्षत्रियाणी अनुष्ठितवती।
नियम — कर्ता तृतीया से प्रथमा में आएगा (क्षत्रियाण्या → क्षत्रियाणी), और क्त प्रत्यय के स्थान पर क्तवतु प्रत्यय लगेगा (अनुष्ठितम् → अनुष्ठितवती), जो कर्ता के लिङ्ग-वचन का अनुसरण करेगा।
परिवर्तितं वाक्यम् (कर्तृवाच्यम्) — क्षत्रियाणी अनुष्ठितवती।
नियम — कर्ता तृतीया से प्रथमा में आएगा (क्षत्रियाण्या → क्षत्रियाणी), और क्त प्रत्यय के स्थान पर क्तवतु प्रत्यय लगेगा (अनुष्ठितम् → अनुष्ठितवती), जो कर्ता के लिङ्ग-वचन का अनुसरण करेगा।
नियम को सूत्र-रूप में याद रखिए: ‘भवत्या प्रतिश्रुतम् → भवती प्रतिश्रुतवती’ — यही ‘यथा’ पूरे प्रश्न की कुंजी है। तीन काम करने हैं : (१) कर्ता की तृतीया हटाकर प्रथमा, (२) क्त के स्थान पर क्तवतु, (३) कर्ता के लिङ्ग-वचन के अनुसार रूप — स्त्रीलिङ्ग में ‘-वती’, पुंलिङ्ग में ‘-वान्’। यहाँ कर्ता ‘क्षत्रियाणी’ स्त्रीलिङ्ग एकवचन है, अतः ‘अनुष्ठितवती’।
पाठ का प्रसङ्ग: ‘क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम्’ — भीम माता से कहता है। कर्तृवाच्य में यह होगा — ‘क्षत्रियाणी यदुचितं तत् अनुष्ठितवती।’ अर्थ वही रहता है, केवल बल बदल जाता है : कर्मवाच्य में कर्म पर बल, कर्तृवाच्य में कर्ता पर।