शारदा अध्याय 9 सर्वं शब्देन भासते

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
‘सर्वं शब्देन भासते’ इति तालिकायाः अन्तिमः स्तम्भः — ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ — रिक्तः अस्ति। पाठे प्रयुक्तानां शब्दानाम् अर्थान् ज्ञात्वा तं स्तम्भं पूरयत।
उत्तर

पुस्तक में यह अन्तिम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है — विद्यार्थी को हर शब्द का अर्थ अपनी मातृभाषा में लिखना है। नीचे पूरी तालिका दी है और वह स्तम्भ हिन्दी (हमारी माध्यम-भाषा) में भर दिया गया है। जिनकी मातृभाषा मराठी, बाङ्ग्ला, गुजराती, तमिऴ, तेलुगु, कन्नड, ओड़िआ या कोई अन्य भारतीय भाषा है, वे इसी अर्थ के आधार पर अपनी भाषा का शब्द रखें।

शब्दःअर्थःहिन्दीEnglishमातृभाषया अर्थम् (भरा हुआ — हिन्दी)
अभिहितम् (अभि + √धा + क्त, नपुं.प्र.ए.व.)उक्तम्उक्तSaidकहा गया, कहा हुआ
आकर्णय (आ + कर्ण + णिच् लोट्, म.पु.ए.व.)शृणुसुनोListenसुनो, ध्यान से सुनो
आतिथेयः (पुं.प्र.ए.व.)अतिथौ साधुः, अतिथिसेवाकारकःअतिथि की सेवा करने वालाHostमेहमान की सेवा करने वाला, मेज़बान
आयोधनम् (नपुं.द्वि.ए.व.)युद्धम्युद्धBattleलड़ाई, संग्राम
उत्फुल्लाक्षः (बहुब्रीहि, पुं.प्र.ए.व.)उत्फुल्ले अक्षिणी यस्य सः, विकसितनयनःविकसितनयनOne with wide-open eyesखिली हुई/चौड़ी आँखों वाला
औदरिकः (उदर + इक्, पुं.प्र.ए.व.)भोजनप्रियःकेवल पेट भरने वालाOne who just eats continuouslyपेटू, खाने का शौकीन
कामम् (अव्ययम्)निश्चयेननिश्चित हीCertainlyहाँ, अवश्य, बेशक
जठरस्थाय (पुं.च.ए.व.)जठरे तिष्ठति इति, तस्मैपेट में विद्यमान के लिएFor what is inside the stomachपेट के भीतर बैठे हुए के लिए
निषूदकः (पुं.प्र.ए.व.)विनाशकःविनाशकDestroyerनाश करने वाला, संहारक
क्षुद्रमृगम् (पुं.द्वि.ए.व.)क्षुद्रः मृगः तम्छोटे पशु कोSmall animalमामूली/तुच्छ जानवर को
क्षत्रियाण्या (स्त्री.तृ.ए.व.)क्षत्रियस्य पत्नी, तयाक्षत्रिय की पत्नी सेBy the wife of Kshatriyaक्षत्राणी ने / क्षत्रिय की पत्नी के द्वारा
परिदेवयते (परि + √दिव् + णिच्, आ.प.प्र.पु.ए.व.)विलपतिविलाप करता हैLamentsरो-रोकर दुख प्रकट करता है
परिवेषय (परि + √विष् + लोट्, म.पु.ए.व.)स्थापयतुम परोसो(You) Serveपरोसो, थाली में रखो
पीवरौ (पुं.प्र.द्वि.व.)स्थूलौ(दो) स्थूल(Two) Stoutदोनों मोटी/पुष्ट (भुजाएँ)
पौराः (पुं.प्र.ब.व.)नागरिकाःनागरिकCitizensनगर के लोग, नगरवासी
प्रतिवेशी (पुं.प्र.ए.व.)निकट गृहवासीपड़ोसीNeighbourपास के घर में रहने वाला, पड़ोसी
प्रतिश्रुतम् (प्रति + √श्रु + क्त, पुं.द्वि.ए.व.)प्रतिज्ञातम्प्रतिज्ञातPromisedवचन दिया गया, वादा किया गया
प्रभूतम् (पुं.द्वि.ए.व.)अधिकम्अधिकAbundantबहुत सारा, प्रचुर
प्रतिश्रवः (पुं.प्र.ए.व.)प्रतिज्ञावचनPromiseवचन, ज़बान, प्रतिज्ञा
प्रत्यादेशम् (पुं.द्वि.ए.व.)अनुल्लङ्घनम्अवज्ञाDisobedienceअवज्ञा, कही हुई बात को टालना
बाढम् (अव्ययम् पुं.द्वि.ए.व.)नूनम्निश्चितCertainlyहाँ, ठीक है, निश्चय ही
मल्लयुद्धम् (पुं.द्वि.ए.व.)मल्लानां युद्धम्पहलवानों का युद्धWrestlingकुश्ती, बिना शस्त्र का दंगल
मानुषापसद (सप्तमी-तत्पुरुषः, पुं.सं.ए.व.)मानुषेषु अपसदहे ! निकृष्ट मानवO’ Human of low cadreअरे नीच आदमी! अरे अधम मनुष्य!
मृष्टान्नम् (कर्मधारय)मृष्टम् अन्नम्स्वादिष्ट भोजनTasty Foodस्वादिष्ट खाना, बढ़िया पकवान
वाचाट (पुं.सं.ए.व.)प्रलापकहे ! डींग मारने वालेO’ Boastfulअरे बकवादी! अरे बड़बोले!
विप्रस्य (पुं.ष.ए.व.)ब्राह्मणस्यब्राह्मण काOf Brahmanaब्राह्मण का, विप्र का
विशङ्कया (स्त्री.तृ.ए.व.)विशेषसंशयेनविशिष्ट संशय सेBy the doubtविशेष सन्देह से, आशङ्का से
व्याघ्रगह्वरम् (पुं.द्वि.ए.व.)व्याघ्रस्य गह्वरम्बाघ का निवास स्थानTiger-Caveबाघ की गुफा/माँद
श्रोत्रियः (पुं.प्र.ए.व.)श्रोत्रम् अधीते इतिजिसने वेद पढ़ा होOne who has read the Vedasवेद पढ़ा हुआ विद्वान् ब्राह्मण
हनिष्यामि (√हन् + लृट्, उ.पु.ए.व.)वधं करिष्यामिमार दूँगाWill killमैं मार डालूँगा
हुताशनाय (पुं.च.ए.व.)हुतम् अशनम् यस्य, तस्मैअग्नि कोFor the Fireअग्निदेव के लिए
नमूना उत्तर (अन्य मातृभाषाओं में) — मराठी: पौराः = ‘नागरिक’, प्रतिवेशी = ‘शेजारी’, मृष्टान्नम् = ‘चविष्ट अन्न’, मल्लयुद्धम् = ‘कुस्ती’। बाङ्ग्ला: प्रतिवेशी = ‘प्रतिबेशी’, आयोधनम् = ‘युद्ध’, हुताशनः = ‘आगुन’। गुजराती: पीवरौ = ‘जाडा/पुष्ट’, विशङ्कया = ‘शंकाथी’। तमिऴ: पौराः = ‘नगर मक्कळ्’, हुताशनः = ‘तीयवन्/अग्नि’। अपनी भाषा में लिखते समय ध्यान रखिए कि अर्थ वही रहे जो संस्कृत तथा हिन्दी स्तम्भ में दिया है।
इस तालिका को पढ़ने का ढंग: केवल अर्थ रट लेना पर्याप्त नहीं। कोष्ठक में दिया गया व्याकरण-परिचय ही असली सामग्री है — ‘आकर्णय (आ + कर्ण + णिच् लोट्)’ बताता है कि यह आज्ञा है; ‘क्षत्रियाण्या (स्त्री.तृ.ए.व.)’ बताता है कि आगे क्रिया कर्मवाच्य होगी; ‘उत्फुल्लाक्षः (बहुब्रीहि)’ बताता है कि यह विशेषण है, संज्ञा नहीं। इसी परिचय के सहारे अभ्यास के प्रश्न ४, ७, ८ तथा १० हल हो जाते हैं।
पुस्तक में छपी कुछ बातें, जिन पर ध्यान दें: (१) ‘प्रत्यादेशम्’ का संस्कृत अर्थ ‘अनुल्लङ्घनम्’ छपा है, जबकि हिन्दी ‘अवज्ञा’ तथा अंग्रेज़ी ‘Disobedience’ है — शुद्ध पर्याय ‘उल्लङ्घनम्’ अथवा ‘अवज्ञा’ ही बनता है। (२) ‘बाढम्’ के आगे ‘अव्ययम्’ भी लिखा है और ‘पुं.द्वि.ए.व.’ भी — अव्यय का लिङ्ग-विभक्ति नहीं होता, अतः केवल ‘अव्ययम्’ ठीक है। (३) ‘प्रभूतम्’, ‘मल्लयुद्धम्’, ‘व्याघ्रगह्वरम्’ तथा ‘प्रतिश्रुतम्’ वस्तुतः नपुंसकलिङ्ग हैं (पुं. नहीं), और पाठ में ‘प्रभूतम्’ तथा ‘प्रतिश्रुतम्’ प्रथमा में हैं। परीक्षा में पाठ का प्रयोग ही प्रमाण मानिए।
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