उत्तरम् — कण्ठ्यानां वर्णानां स्थानम् — कण्ठः (कण्ठस्य पृष्ठ-भागः) तथा करणम् अपि कण्ठः (कण्ठस्य अग्र-भागः) — अर्थात् अत्र ‘स्वस्थानम् एव करणम्’।
| वर्ण-भेदः | वर्णाः | आभ्यन्तर-प्रयत्नः | उदाहरण-शब्दः |
|---|---|---|---|
| अ-स्वरः | अ | संवृत-प्रयत्नः | अश्वः, अयम् |
| शेष-समानाक्षराणि | आ · अ३ | विवृत-प्रयत्नः | आकाशः · ‘हे राम३’ (प्लुतः) |
| सन्ध्यक्षराणि | ए ए३ · ऐ ऐ३ · ओ ओ३ · औ औ३ | विवृत-प्रयत्नः | एकः · ऐक्यम् · ओष्ठः · औषधम् |
| स्पर्शाः | क ख ग घ · ङ | स्पृष्ट-प्रयत्नः | कमलम्, खगः, गजः, घटः, वाङ्मयम् |
| अन्तःस्थाः | — | — | कण्ठ-स्थाने कोऽपि अन्तःस्थ-वर्णः नास्ति |
| ऊष्माणः | ह | ईषद्-विवृत-प्रयत्नः | हंसः, हरिः |
| अयोगवाहौ | अः (विसर्गः) | ईषद्-विवृत-प्रयत्नः | रामः, बालकः |