शारदा अध्याय 2 अत्र इदम् अवधेयम्

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
चक्रवृद्ध्यंशः कः ? उदाहरणेन सारिण्या च स्पष्टयत।
उत्तर

चक्रवृद्ध्यंशः तादृशः वृद्ध्यंशः वर्तते यस्मिन् मूलधनेन सह वृद्ध्यंशस्य उपरि अपि वृद्ध्यंशः अर्ज्यते, येन कालान्तरेण धनस्य वृद्धिः अतिशीघ्रं भवति। (हिन्दी — चक्रवृद्धि ब्याज वह ब्याज है जिसमें मूलधन के साथ-साथ ब्याज पर भी ब्याज कमाया जाता है, जिससे समय बीतने पर धन की वृद्धि बहुत तेज़ी से होती है।)

पाठस्य उदाहरणम् —
यदि भवान् ₹1000 निवेशं करोति, तत्र 10% वार्षिकं वृद्ध्यंशम् अर्जयति —
प्रथमवर्षस्य अन्ते → आहत्य ₹1100
द्वितीयवर्षे ₹1000 इत्यस्य स्थाने ₹1100 राशेः उपरि वृद्ध्यंशं प्राप्स्यति → आहत्य ₹1210
वर्षाणिआरम्भिकधनम्वार्षिकः वृद्ध्यंशः (10%)चक्रवृद्ध्यंश-सहितं धनम्साधारणवृद्ध्यंशेन सह धनम्
1.1,000.00100.001,100.001100
2.1,100.00110.001,210.001200
3.1,210.00121.001,331.001300
4.1,331.00133.101,464.101400
5.1,464.10146.411,610.511500
6.1,610.51161.051,771.561600
7.1,771.56177.161,948.721700
8.1,948.72194.872,143.591800
9.2,143.59214.362,357.951900
10.2,357.95235.802,593.742000

सारः — निवेशितं मूलधनम् — 1,000 · वार्षिकः चक्रवृद्ध्यंशः — 10% · दशवर्षानन्तरं धनस्य मूल्यम् — 2,593.74

अन्तर कहाँ से आया: साधारण वृद्ध्यंश में हर वर्ष ब्याज केवल मूलधन ₹1000 पर लगता है, इसलिए हर वर्ष ठीक ₹100 जुड़ते हैं — दस वर्ष में ₹2000। चक्रवृद्धि में ब्याज पिछले वर्ष की कुल राशि पर लगता है, इसलिए ब्याज स्वयं भी बढ़ता जाता है — पहले वर्ष ₹100, दसवें वर्ष ₹235.80। दस वर्ष का अन्तर = 2,593.74 − 2,000 = ₹593.74
सूत्र-रूप में: चक्रवृद्धि से प्राप्त राशि A = P (1 + r/100)n. यहाँ P = 1000, r = 10, n = 10 ⇒ A = 1000 × (1.1)10 = 1000 × 2.59374 ≈ ₹2,593.74 — ठीक वही जो पुस्तक की सारिणी देती है।
प्र2.
अस्याः सारिण्याः किं निगमनम् ? चक्रवृद्ध्यंशः कस्मै प्रयोजनाय सुशक्तं साधनम् अस्ति ?
उत्तर

अनेन इदं सिद्धं यत् चक्रवृद्ध्या निवेशितं धनं शीघ्रं वर्धते, यतोहि निवेशकर्ता न केवलं स्वस्य मूलधनस्य अपितु अर्जितवृद्ध्यंशस्य अपि उपरि वृद्ध्यंशम् अर्जयति। दीर्घकालीनसञ्चयस्य निवेशस्य च कृते एतत् किञ्चन सुशक्तं साधनम् अस्ति। (हिन्दी — इससे यह सिद्ध होता है कि चक्रवृद्धि से लगाया गया धन शीघ्र बढ़ता है, क्योंकि निवेश करनेवाला केवल अपने मूलधन पर ही नहीं, कमाए हुए ब्याज पर भी ब्याज कमाता है। दीर्घकालीन बचत तथा निवेश के लिए यह एक बहुत सशक्त साधन है।)

‘दीर्घकालीन’ शब्द यहाँ कुंजी है: पहले वर्ष में दोनों प्रकार का ब्याज बराबर (₹100) है — अन्तर शून्य। अन्तर समय के साथ चक्रवृद्धि से बढ़ता है। इसीलिए पाठ छात्रों का ध्येय ‘दीर्घकालीननिवेशः’ बताता है — जितनी जल्दी आरम्भ, उतना बड़ा लाभ।
श्लोक से जोड़िए: “जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः” — बूँद-बूँद से घड़ा भरना ही चक्रवृद्धि का काव्यात्मक रूप है; और “लघु-लघुः सञ्चयोऽपि कालान्तरे महत्सम्पत्तिरूपेण वर्धते” इस सारिणी का गद्य-रूप।
प्र3.
गणनाकार्यम् (छात्राः कुर्वन्तु) — उपर्युक्तगणनायाः आधारेण ₹1000 निवेशितस्य मूलधनस्य पञ्चदशवर्षेषु विंशतिवर्षेषु वा चक्रवृद्ध्या सकलधनराशेः परिमाणं लिखत।
उत्तर

पञ्चदशवर्षानन्तरं सकलधनराशिः ≈ ₹4,177.25; विंशतिवर्षानन्तरं ≈ ₹6,727.50 (10% वार्षिकचक्रवृद्ध्यंशेन)। (हिन्दी — 10% वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज से पन्द्रह वर्ष बाद कुल राशि लगभग ₹4,177.25 तथा बीस वर्ष बाद लगभग ₹6,727.50 हो जाती है।)

सूत्रेण गणना — A = P (1 + r/100)n
15 वर्षाणि: A = 1000 × (1.1)15 = 1000 × 4.17725 = ₹4,177.25
20 वर्षाणि: A = 1000 × (1.1)20 = 1000 × 6.72750 = ₹6,727.50
वर्षाणिआरम्भिकधनम् (₹)वार्षिकः वृद्ध्यंशः 10% (₹)वर्षान्ते चक्रवृद्ध्यंश-सहितं धनम् (₹)साधारणवृद्ध्यंशेन (₹)
11.2,593.74259.372,853.112100
12.2,853.11285.313,138.422200
13.3,138.42313.843,452.262300
14.3,452.26345.233,797.492400
15.3,797.49379.754,177.242500
16.4,177.24417.724,594.962600
17.4,594.96459.505,054.462700
18.5,054.46505.455,559.912800
19.5,559.91555.996,115.902900
20.6,115.90611.596,727.493000
निष्कर्षः: दश वर्षेषु धनं द्विगुणात् किञ्चित् अधिकं (2.59 गुणम्), पञ्चदशवर्षेषु प्रायः चतुर्गुणम् (4.18), विंशतिवर्षेषु प्रायः षड्गुणाधिकम् (6.73) भवति — यद्यपि साधारणवृद्ध्यंशेन तत् क्रमशः ₹2500 तथा ₹3000 एव भवेत्। (निष्कर्ष — दस वर्ष में धन 2.59 गुना, पन्द्रह वर्ष में लगभग चार गुना और बीस वर्ष में लगभग पौने सात गुना हो जाता है, जबकि साधारण ब्याज से वह क्रमशः केवल ₹2500 और ₹3000 ही होता।)
गणना-सङ्केत: वर्ष-दर-वर्ष प्रत्येक पंक्ति को दो दशमलव तक पूर्णांकित (round) करने पर 15वें वर्ष ₹4,177.24 तथा 20वें वर्ष ₹6,727.49 आता है; सूत्र से सीधे गणना करने पर ₹4,177.25 तथा ₹6,727.50। यह एक पैसे का अन्तर केवल पूर्णांकन का है — दोनों उत्तर शुद्ध माने जाएँगे। पुस्तक की अपनी सारिणी भी इसी प्रकार पूर्णांकित है (10वें वर्ष का ब्याज 235.80, यथार्थतः 235.795)।
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