शारदा अध्याय 2 सर्वं शब्देन भासते

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
पाठे प्रयुक्तानां शब्दानाम् अर्थान् ज्ञात्वा तालिकायाः अन्तिमे स्तम्भे ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’।
उत्तर

पुस्तके अन्तिमः स्तम्भः रिक्तः अस्ति; तत्र छात्रैः स्वमातृभाषया अर्थः लेखनीयः। अत्र सः स्तम्भः हिन्दीभाषया पूरितः। (हिन्दी — पुस्तक में अन्तिम स्तम्भ खाली छोड़ा गया है; वहाँ विद्यार्थी को अपनी मातृभाषा में अर्थ लिखना है। यहाँ वह स्तम्भ हिन्दी में भरकर दिया गया है। जिनकी मातृभाषा बांग्ला, तमिल, मराठी, गुजराती आदि है, वे इसी क्रम से अपनी भाषा में लिखें।)

शब्दःअर्थःहिन्दीEnglishमातृभाषया अर्थं लिखत (हिन्दी)
अपव्ययः (पुं.प्र.ए.व.)व्यर्थव्ययःअनुचित व्ययUnnecessary expenseफ़िज़ूलख़र्ची, बेकार में किया गया ख़र्च
अवाप्तुम् (अव + √आप् + तुमुन्, अव्ययम्)प्राप्तुम्प्राप्त करने के लिएTo getपाने के लिए, हासिल करने के लिए
अविच्छिन्नः (नञ् तत्पुरुषः, पुं.प्र.ए.व.)न विच्छिन्नःअटूटInseparableजो टूटे नहीं, लगातार जुड़ा हुआ
अर्जितस्य (√अर्ज् + क्त, पुं.ष.ए.व.)उपार्जितस्यकमाए हुए काOf the earnedकमाई हुई वस्तु या धन का
अर्थोपार्जनम् (ष.तत्पुरुषः, नपुं.प्र.ए.व.)अर्थस्य उपार्जनम्धन कमानाEarningधन कमाने की क्रिया
आजीविका (स्त्री.प्र.ए.व.)वृत्तिःव्यवसायLivelihoodरोज़ी-रोटी, जीविका चलाने का साधन
आडम्बरपूर्णः (पुं.प्र.ए.व.)पाखण्डयुक्तःदिखावे से भराOstentatiousकेवल दिखावे के लिए किया गया, तड़क-भड़क वाला
आर्थिकव्यवहारः (पुं.प्र.ए.व.)धनविषयकः व्यवहारःआर्थिक लेन-देनFinancial behaviorपैसे का लेन-देन तथा उससे जुड़ा आचरण
आर्थिकसाक्षरता (कर्मधारयः, स्त्री.प्र.ए.व.)आर्थिकी साक्षरतावित्तीय साक्षरताFinancial literacyधन के लेन-देन, बचत तथा निवेश की समझ
आवृत्तिनिक्षेपः (पुं.प्र.ए.व.)आवृत्तिनिक्षेपःआवर्ती जमाRecurring Deposit (RD)हर महीने एक निश्चित रकम जमा करने की योजना
उचितनिवेशम् (पुं.द्वि.ए.व.)साधुनिवेशम्योग्य निवेशProper investmentसोच-समझकर सही जगह लगाया गया धन
उद्धृत्य (उद् + √धृ + ल्यप्)उद्धारं कृत्वाऊपर उठाकरBy lifting upबाहर निकालकर, ऊपर उठाकर
औचित्यपूर्णः (पुं.प्र.ए.व.)समुचितःउपयुक्तJustifiedजो उचित हो, मौक़े के अनुरूप
कष्टार्जितधनस्य (कर्मधारयः, नपुं.ष.ए.व.)कष्टेन अर्जितं धनं, तस्यकष्ट से कमाए हुए धन काOf the wealth earned with difficultyमेहनत से कमाए हुए पैसे का
कालान्तरेण (नपुं.तृ.ए.व.)अन्यः कालः, तेनसमय बीतने परBy the course of timeकुछ समय बाद, धीरे-धीरे समय के साथ
किसान-विकास-पत्रम् (नपुं.प्र.ए.व.)कृषकस्य विकासः किसानविकासः, तदर्थं पत्रम्किसान विकास पत्रKisan Vikas Patra (KVP)डाकघर की एक बचत योजना, जिसमें जमा धन निश्चित अवधि में दुगुना होता है
चक्रवृद्ध्यंशेन (तृ.तत्पुरुषः, पुं.तृ.ए.व.)चक्रवृद्ध्या अंशेनचक्रवृद्धि ब्याज सेBy Compound Interestऐसे ब्याज से, जो मूलधन के साथ ब्याज पर भी लगता है
तुच्छकारणैः (कर्मधारयः, नपुं.तृ.ब.व.)तुच्छं कारणम्, तैःनिरर्थक कारणों सेFor trivial reasonsछोटी-छोटी, बेमतलब की वजहों से
त्वरिताहारः (कर्मधारयः, पुं.प्र.ए.व.)त्वरितः चासौ आहारःशीघ्र आहारFast Foodझटपट तैयार मिलनेवाला खाना
नियतनिक्षेपः (मध्यपद-लोपी कर्मधारयः, पुं.प्र.ए.व.)नियतकालिकः निक्षेपःनिश्चित अवधि के लिए जमाFixed Deposit (FD)तय समय के लिए बैंक में जमा की गई रकम
न्यायपूर्णम् (तृतीया-तत्पुरुषः, नपुं.प्र.ए.व.)न्यायेन पूर्णम्न्यायसङ्गतJustifiedजो न्याय के अनुसार हो, ईमानदारी का
पुटीकृतभोजनम् (कर्मधारयः, नपुं.प्र.ए.व.)पुटीकृतं भोजनम्डिब्बाबन्द खानाPackaged foodपैकेट या डिब्बे में बन्द करके बेचा जानेवाला भोजन
पूर्तये (स्त्री.च.ए.व.)सम्पूर्तिनिमित्तम्उपलब्ध कराने के लिएTo fulfillपूरा करने के लिए
प्रदर्शनकारिपरिधानम् (कर्मधारयः, नपुं.प्र.ए.व.)प्रदर्शनकारि परिधानम्प्रदर्शनकारी वेशभूषाFashionable attireकेवल दिखावे के लिए पहना जानेवाला पहनावा
प्रभूतः (पुं.प्र.ए.व.)प्रचुरम्पर्याप्तAbundantबहुत अधिक, भरपूर
प्रधानमन्त्री-जन धन योजना (स्त्री.प्र.ए.व.)प्रधानमन्त्री-जन धन योजनाप्रधानमन्त्री जन धन योजनाPradhan Mantri Jana Dhana Yojnaहर नागरिक का बैंक-खाता खुलवाने की सरकारी योजना
बाधितानि (नपुं.प्र.ब.व.)अवरोधितानिबाधित होते हैंInterruptedरुक जाते हैं, अटक जाते हैं
मा (अ) गृधः (पुं.प्र.ए.व.)लोभं न कुरुलालच न करोDon’t covetलालच मत करो, दूसरे के धन पर नज़र मत रखो
मूलभूतानाम् (नपुं.ष.ब.व.)मूले भूतम्, तेषाम्मौलिकBasicबुनियादी (आवश्यकताओं) का
यथार्थतत्त्वम् (नपुं.प्र.ए.व.)यथार्थं तत्त्वम्वास्तविक तत्त्वTrue essenceअसली सच्चाई, वास्तविक सार
राष्ट्रिय-पेंशन-योजना (स्त्री.प्र.ए.व.)राष्ट्रिय-पेंशन-योजनाराष्ट्रीय पेंशन प्रणालीNational Pension System (NPS)सेवानिवृत्ति के बाद नियमित पेंशन देनेवाली योजना
राष्ट्रिय-संचय-प्रमाणपत्रम् (नपुं.प्र.ए.व.)राष्ट्रिय-संचय-प्रमाणपत्रम्राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्रNational Savings Certificate (NSC)डाकघर का बचत प्रमाणपत्र, जिस पर निश्चित ब्याज मिलता है
वरिष्ठ-नागरिक-संचय-योजना (स्त्री.प्र.ए.व.)वरिष्ठ-नागरिक-संचय-योजनावरिष्ठ नागरिक बचत योजनाSenior Citizens’ Savings Scheme (SCSS)बुज़ुर्ग नागरिकों के लिए बनी बचत योजना
विलासव्यसनाय (नपुं.च.ए.व.)विलासश्च व्यसनञ्च, तस्मैसुख भोग के लिएFor luxury and enjoymentऐशो-आराम और बुरी लत के लिए
विपन्ना (स्त्री.प्र.ए.व.)सम्पन्नतारहितासंकटग्रस्तDestituteबिगड़ी हुई, तंगी में पड़ी हुई
शीतपेयम् (कर्मधारयः, नपुं.प्र.ए.व.)शीतं पेयम्मृदु पेयSoft Drinksठंडा पेय, कोल्ड ड्रिंक
शुचिः (पुं.प्र.ए.व.)पवित्रःशुद्धCleanपवित्र, साफ़ (मन तथा आचरण से भी)
सचेतनता (स्त्री.प्र.ए.व.)विवेकःजागरूकताConsciousnessसजगता, होश रखकर काम करने का भाव
सञ्चयः (पुं.प्र.ए.व.)सङ्ग्रहःसंचयAccumulationबचत, जोड़कर रखना
सन्तोलनम् (नपुं.प्र.ए.व.)समन्वयःसन्तुलित करनाBalanceसन्तुलन बनाए रखना
सुकन्या-समृद्धि-योजना (स्त्री.प्र.ए.व.)सुकन्या-समृद्धि-योजनासुकन्या समृद्धि योजनाSukanya Samriddhi Yojnaबालिका के भविष्य के लिए बनाई गई बचत योजना
सूत्ररूपम् (नपुं.प्र.ए.व.)संक्षेपरूपम्संक्षिप्त रूपAphoristic formथोड़े शब्दों में पूरा सिद्धान्त कहनेवाला रूप
स्वावलम्बी (पुं.प्र.ए.व.)आत्मनिर्भरःस्वावलम्बीSelf-reliantअपने पैरों पर खड़ा, आत्मनिर्भर
कैसे भरें: ‘मातृभाषया’ का अर्थ है अपनी मातृभाषा में। तालिका का ‘हिन्दी’ स्तम्भ केवल एक-दो शब्द देता है; अन्तिम स्तम्भ में उससे थोड़ा खुला, अपनी भाषा का सहज अर्थ लिखिए — जैसे ऊपर किया गया है। यदि आपकी मातृभाषा हिन्दी नहीं है, तो इसी क्रम से अपनी भाषा में लिखिए।
प्र2.
तालिकायां दत्तानां समासनिर्देशानाम् (नञ् तत्पुरुषः, षष्ठी-तत्पुरुषः, तृतीया-तत्पुरुषः, कर्मधारयः, मध्यपद-लोपी कर्मधारयः) उदाहरणानि विग्रहेण सह लिखत, समासस्य नाम च समर्थयत।
उत्तर

तालिकायाः पदेषु पञ्चविधाः समासाः दृश्यन्ते। प्रत्येकस्य विग्रहः तथा नामकरणस्य कारणम् अधः दत्तम्। (हिन्दी — तालिका के पदों में पाँच प्रकार के समास मिलते हैं। नीचे प्रत्येक का विग्रह तथा उस नाम का कारण दिया गया है।)

समस्तपदम्विग्रहःसमासस्य नामएतत् नाम एव कुतः ?
अविच्छिन्नःन विच्छिन्नःनञ् तत्पुरुषःपूर्वपदे निषेधार्थकः नञ् (न → अ) अस्ति, उत्तरपदस्य अर्थः प्रधानः — अतः नञ् तत्पुरुषः।
अर्थोपार्जनम्अर्थस्य उपार्जनम्षष्ठी-तत्पुरुषःविग्रहे पूर्वपदं षष्ठी विभक्तौ (अर्थस्य) अस्ति; उत्तरपदम् (उपार्जनम्) प्रधानम्।
न्यायपूर्णम्न्यायेन पूर्णम्तृतीया-तत्पुरुषःविग्रहे पूर्वपदं तृतीया विभक्तौ (न्यायेन) अस्ति — करणार्थे।
चक्रवृद्ध्यंशेनचक्रवृद्ध्या अंशेनतृतीया-तत्पुरुषःपूर्वपदं तृतीयायाम् (चक्रवृद्ध्या); तालिकायाम् अपि एतत् एव निर्दिष्टम्।
त्वरिताहारःत्वरितः चासौ आहारःकर्मधारयःउभे पदे समानाधिकरणे (एकविभक्तिके) स्तः, पूर्वपदं विशेषणम्, उत्तरपदं विशेष्यम्।
शीतपेयम्शीतं पेयम्कर्मधारयःशीतम् (विशेषणम्) + पेयम् (विशेष्यम्) — विशेषण-पूर्वपद कर्मधारयः।
कष्टार्जितधनस्यकष्टेन अर्जितं कष्टार्जितम्, कष्टार्जितं धनं, तस्यकर्मधारयः (द्विपद-समासः)प्रथमं तृतीया-तत्पुरुषेण ‘कष्टार्जितम्’, ततः तेन सह ‘धनम्’ इति कर्मधारयः।
नियतनिक्षेपःनियतकालिकः निक्षेपःमध्यपद-लोपी कर्मधारयःविग्रहस्य मध्यपदम् (कालिकः) समासे लुप्तम् — अतः ‘मध्यपद-लोपी’।
विलासव्यसनायविलासश्च व्यसनञ्च, तस्मैद्वन्द्वः (समाहारः)उभयोः पदयोः अर्थः प्रधानः, ‘च’ इति योजनम् — अतः द्वन्द्वः।
मृद्वारिशुचिःमृत् च वारि च मृद्वारिणी, ताभ्यां शुचिःद्वन्द्वगर्भितः तृतीया-तत्पुरुषःअन्तः द्वन्द्वः (मृद्वारिणी), ततः तृतीया-तत्पुरुषः (ताभ्यां शुचिः)।
पहचान का नियम एक पंक्ति में: यदि विग्रह में पूर्वपद किसी विभक्ति में आए (अर्थस्य, न्यायेन) तो तत्पुरुष, और उसी विभक्ति का नाम समास के आगे लग जाता है। यदि दोनों पद एक ही विभक्ति में आएँ और पहला दूसरे का विशेषण हो, तो कर्मधारय। यदि दोनों ‘च’ से जुड़ें, तो द्वन्द्व
ध्यान दें: तालिका में आर्थिकसाक्षरता को कर्मधारय कहा गया है — क्योंकि विग्रह ‘आर्थिकी साक्षरता’ में ‘आर्थिकी’ विशेषण है और ‘साक्षरता’ विशेष्य, दोनों स्त्रीलिङ्ग प्रथमा में।
प्र3.
तालिकायां दत्तानां कृदन्तपदानाम् — अवाप्तुम्, उद्धृत्य, अर्जितस्य, स्मृतम्, बाधितानि — प्रकृतिं प्रत्ययं च पृथक् कृत्वा लिखत।
उत्तर

पञ्चापि पदानि कृदन्तानि सन्ति — त्रयः प्रत्ययाः अत्र प्रयुक्ताः — तुमुन्, ल्यप्, क्तः। (हिन्दी — ये पाँचों पद कृदन्त हैं; इनमें तीन प्रत्यय प्रयुक्त हुए हैं — तुमुन्, ल्यप् तथा क्त।)

पदम्प्रकृति + प्रत्ययःप्रत्ययस्य अर्थःहिन्दी अर्थ
अवाप्तुम्अव + √आप् + तुमुन्‘…ने के लिए’ — तुमुन्-प्रत्ययान्तम् अव्ययम्; प्रयोजनार्थेप्राप्त करने के लिए
उद्धृत्यउद् + √धृ + ल्यप्पूर्वकालिकः अव्ययः; उपसर्गयुक्ते धातौ ‘क्त्वा’ स्थाने ‘ल्यप्’ भवतिऊपर उठाकर
अर्जितस्य√अर्ज् + क्त (+ षष्ठी ए.व.)भूतकालिकं कर्मणि विशेषणम्कमाए हुए का
स्मृतम्√स्मृ + क्तभूतकालिकं कर्मणि विशेषणम् — ‘माना गया’माना गया है
बाधितानि√बाध् + क्त (नपुं.प्र.ब.व.)कर्मणि क्तान्तम्, बहुवचनेबाधित होते हैं / रुके हुए
ल्यप् और क्त्वा का भेद क्यों: जब धातु के आगे उपसर्ग हो, तब ‘क्त्वा’ का स्थान ‘ल्यप्’ ले लेता है — इसीलिए ‘धृत्वा’ नहीं, ‘उद्धृत्य’ बनता है; इसी नियम से ‘स्था’ से ‘स्थित्वा’ किन्तु उद् + स्था से ‘उत्थाय’ (यह रूप श्लोक २ में आया है)। दोनों ही पूर्वकालिक क्रिया बताते हैं और अव्यय हैं।
अभ्यास हेतु: पाठ के अन्य कृदन्त — उपार्जितधनस्य (उप + √अर्ज् + क्त), सञ्चयनीयः / वर्जनीयः / करणीयः (√ + अनीयर् — विध्यर्थक), प्रष्टव्याः / गन्तव्याः (√ + तव्यत्)। इन दोनों प्रत्ययों का अर्थ है ‘करने योग्य / करना चाहिए’।
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