शारदा अध्याय 2 यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
अस्मिन् पाठे पठितानां सूक्तीनां श्लोकानां च आशयं स्वभाषया विलिख्य शिक्षकाय दर्शयत।
उत्तर

पाठे पञ्च सूक्तयः/श्लोकाः सन्ति। अधः प्रत्येकस्य आशयः स्वभाषया (हिन्दीभाषया) संक्षेपेण दत्तः — एतत् एव उत्तरपुस्तिकायां लिखित्वा शिक्षकाय दर्शयत। (हिन्दी — पाठ में पाँच सूक्तियाँ/श्लोक हैं। नीचे प्रत्येक का आशय अपनी भाषा में संक्षेप में दिया गया है — यही लिखकर शिक्षक को दिखाइए।)

सूक्तिः / श्लोकःग्रन्थःआशयः (स्वभाषया)
सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलम् अर्थः।अर्थशास्त्रम् (कौटिल्यः)सच्चे सुख की जड़ धर्म है और धर्म की जड़ धन। न्याय से कमाया धन ही मनुष्य को धर्म-पालन के योग्य बनाता है, और धर्म-पालन ही स्थायी सुख देता है।
ब्राह्मे मुहूर्ते चोत्थाय धर्ममर्थं च चिन्तयेत्।गरुडपुराणम्दिन का आरम्भ ही योजना का समय है। ब्राह्म मुहूर्त में उठकर सोचना चाहिए — आज कौन-सा धर्म्य कार्य करना है और अर्थ का प्रबन्ध कैसा रहेगा।
सर्वेषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम्। योऽर्थे शुचिर्हि सः शुचिर्न मृद्वारिशुचिः शुचिः॥मनुस्मृतिःसब शुद्धियों में धन की शुद्धि सर्वश्रेष्ठ है। जिसका धन ईमानदारी का है वही सचमुच पवित्र है; केवल मिट्टी-पानी से शरीर धोकर कोई पवित्र नहीं हो जाता।
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः। स क्रमः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥चाणक्यनीतिःबूँद-बूँद से घड़ा भरता है। विद्या, धर्म और धन — तीनों इसी क्रम से बढ़ते हैं, अर्थात् थोड़ा-थोड़ा किन्तु नियमित प्रयत्न ही बड़ा फल देता है।
क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत्। क्षणे नष्टे कुतो विद्या कणे नष्टे कुतो धनम्॥(पाठान्ते उद्धृतम्)क्षण-क्षण से विद्या और कण-कण से धन जुटता है। जो क्षण गँवाता है वह विद्या खोता है, जो कण गँवाता है वह धन खोता है।
प्रस्तुति-सङ्केत: इसे एक चार्ट के रूप में बनाइए — बाईं ओर देवनागरी में श्लोक (लाल स्याही से), दाईं ओर अपनी भाषा में आशय, और नीचे एक पंक्ति में पूरे पाठ का सार — “धर्मः, अर्थः, सुखम् — एतेषां सन्तोलनम् एव यथार्थजीवनस्य लक्षणम्।”
प्र2.
भवन्तः स्वजीवने अपव्ययात् कथं दूरे स्थातुं शक्नुवन्ति ? अस्मिन् विषये उपायान् लिखत।
उत्तर

अपव्ययात् दूरे स्थातुं पाठे एव त्रयः मूलमन्त्राः दत्ताः — औचित्यपूर्णः व्ययः, व्ययस्य लेखः, भविष्यदृष्ट्या सञ्चयः। तेषाम् आधारेण अधः दश उपायाः। (हिन्दी — फ़िज़ूलख़र्ची से बचने के तीन मूलमन्त्र पाठ में ही हैं — उचित व्यय, व्यय का लेखा और भविष्य को देखकर बचत। उन्हीं के आधार पर नीचे दस उपाय दिए हैं।)

उपायः (संस्कृतम्)हिन्दी
१. प्रतिदिनं व्ययस्य लेखः स्थापनीयः, मासान्ते च तस्य परिशीलनं करणीयम्।रोज़ का ख़र्च एक कॉपी में लिखिए और महीने के अन्त में उसकी समीक्षा कीजिए — पाठ का अपना निर्देश यही है।
२. क्रयणात् पूर्वं प्रष्टव्यम् — ‘इदं मम आवश्यकता अस्ति उत केवलम् इच्छा ?’कुछ ख़रीदने से पहले स्वयं से पूछिए — यह ज़रूरत है या केवल इच्छा?
३. त्वरिताहारस्य शीतपेयस्य पुटीकृतभोजनस्य च परिहारः।फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक और डिब्बाबन्द खाने से बचिए — इससे धन और स्वास्थ्य दोनों बचते हैं।
४. गृहनिर्मितम् आहारं नयत, जलपात्रं च सह नयत।घर का बना खाना और पानी की बोतल साथ ले जाइए।
५. प्रदर्शनकारिपरिधानस्य आडम्बरस्य च त्यागः; अनुकरणेन क्रयणं न करणीयम्।दिखावटी कपड़े-सामान न लीजिए; मित्रों की देखा-देखी ख़रीदारी मत कीजिए।
६. मासिकं व्ययपरिमाणं (बजट) पूर्वमेव निर्धारणीयम्।महीने का बजट पहले ही तय कर लीजिए और उसी में रहिए।
७. पितृभ्यां दत्तस्य धनस्य दशांशः प्रतिमासं सञ्चयनीयः।जेब-ख़र्च का कम-से-कम दसवाँ भाग हर महीने बचाइए (गुल्लक या RD खाते में)।
८. पत्रालये वित्तकोषे वा आवृत्तिनिक्षेपः (RD) आरब्धव्यः।डाकघर या बैंक में आवर्ती जमा खाता खुलवाइए — छोटी बचत भी चक्रवृद्धि से बढ़ती है।
९. व्यसनपदार्थेभ्यः सर्वथा दूरं स्थातव्यम्।व्यसन की वस्तुओं से पूरी तरह दूर रहिए — यह सबसे बड़ा अपव्यय है।
१०. यः व्ययः स्वास्थ्यलाभाय विद्यार्जनाय आत्मसुरक्षायै वा भवति, सः अवश्यं करणीयः।जिस ख़र्च से स्वास्थ्य, पढ़ाई या अपनी सुरक्षा बढ़े, वह अवश्य कीजिए — कंजूसी उपाय नहीं है।
ध्यान रखिए: पाठ का लक्ष्य कंजूसी नहीं, विवेक है। ‘अपव्ययः’ का अर्थ ‘कम ख़र्च’ नहीं, ‘व्यर्थ ख़र्च’ है (तालिका — व्यर्थव्ययः)। इसीलिए दसवाँ उपाय भी उतना ही ज़रूरी है जितने पहले नौ।
प्र3.
स्वस्य एकस्य मासस्य आय-व्ययविवरणं विलिख्य शिक्षकाय दर्शयत।
उत्तर

एतत् व्यक्तिगतं कार्यम् — भवद्भिः स्वस्य वास्तविकाः अङ्काः लेखनीयाः। अधः आदर्शः प्रपत्रः (format) नमूना-अङ्कैः सह दत्तः; भवन्तः स्वस्य अङ्कान् एव स्थापयन्तु। (हिन्दी — यह व्यक्तिगत कार्य है; इसमें आपको अपने वास्तविक आँकड़े लिखने हैं। नीचे नमूना अंकों के साथ आदर्श प्रारूप दिया है — आप अपने आँकड़े भरिए।)

आयः (आय)व्ययः (ख़र्च)
मदःराशिः (₹)मदःराशिः (₹)
मासिकं जेबव्ययधनम् (pocket money)500लेखनसामग्री (कॉपी, कलम)120
पर्वणि प्राप्तम् उपहारधनम्200यात्राव्ययः (बस/साइकिल)150
पुरातनपुस्तकानां विक्रयेण100जलपानम् (नाश्ता)200
पुस्तकालयशुल्कम् / पत्रिका50
दानम् / सहायता50
सञ्चयः (गुल्लकः / RD)150
आहत्य आयः800आहत्य व्ययः720
शेषः (आयः − व्ययः)₹80 — अयं शेषः अपि सञ्चयनीयः
विवरण बनाते समय तीन नियम: (१) व्यय प्रतिदिन लिखिए, महीने के अन्त में स्मृति से नहीं — पाठ कहता है “प्रत्येकं व्ययस्य लेखः स्थापनीयः”; (२) ‘सञ्चयः’ को व्यय की पहली पंक्ति बनाइए, अन्तिम नहीं — जो बच जाए उसे बचाना नहीं, जो बचाना है उसे पहले अलग रखना; (३) महीने के अन्त में ‘परिशीलनम्’ कीजिए — कौन-सा ख़र्च आवश्यक था और कौन-सा अपव्यय।
सङ्केत: यह विवरण संस्कृत में लिखने पर आपका शब्द-भण्डार भी बढ़ेगा — आयः, व्ययः, शेषः, सञ्चयः, आहत्य (= कुल मिलाकर), मदः। ‘आहत्य’ शब्द पाठ की चक्रवृद्धि-व्याख्या में भी आया है।
प्र4.
जलस्य संरक्षणं कैः उपायैः करणीयमिति कक्षायां चर्चयत सचित्रं प्रदर्शयत च।
उत्तर

अयं पाठः धनसञ्चयं शिक्षयति; एषः प्रश्नः तम् एव सिद्धान्तं जलसञ्चये प्रयोजयति — ‘जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः’ इति श्लोकः द्वयोः अपि समानरूपेण घटते। (हिन्दी — यह पाठ धन की बचत सिखाता है; यह प्रश्न उसी सिद्धान्त को जल-संरक्षण पर लागू करता है — ‘बूँद-बूँद से घड़ा भरता है’ वाला श्लोक दोनों पर समान रूप से लागू होता है।)

चर्चायाः बिन्दवः (कक्षा-चर्चा के लिए) —

उपायः (संस्कृतम्)हिन्दी
प्रणालिकायाः (नलस्य) क्षरणं तत्क्षणमेव संस्कर्तव्यम्।टपकते नल तुरन्त ठीक कराइए — एक बूँद प्रति सेकंड से दिन में लगभग 15–20 लीटर पानी बहता है।
दन्तधावनकाले क्षौरकर्मकाले च नलः पिधातव्यः।दाँत साफ़ करते या दाढ़ी बनाते समय नल बन्द रखिए।
वर्षाजलसंग्रहणम् (rain-water harvesting) करणीयम्।छत का वर्षा-जल संचित कीजिए तथा भूजल-पुनर्भरण कूप बनवाइए।
वृक्षाणां सेचनं प्रातःकाले सायंकाले वा, बिन्दुसेचनपद्धत्या (drip irrigation)।पौधों की सिंचाई सुबह-शाम कीजिए, टपक-सिंचाई अपनाइए — दोपहर में पानी भाप बनकर उड़ जाता है।
वस्त्रप्रक्षालनस्य जलम् उद्यानसेचनाय पुनः प्रयोक्तव्यम्।कपड़े धोने का पानी बग़ीचे में डालिए — पानी का पुनः उपयोग।
जलाशयानां नदीनां च प्रदूषणं वर्जनीयम्।तालाब-नदी में कचरा और रसायन मत डालिए — प्रदूषित जल भी खोया हुआ जल है।
जागरूकता-अभियानम् — पत्रकम्, भित्तिपत्रम्, नाटिका च।कक्षा में पोस्टर, नुक्कड़-नाटिका और पर्चे से जागरूकता फैलाइए।

सचित्रप्रदर्शनार्थं नमूना भित्तिपत्रम् (poster) —

केन्द्रे — एकः जलबिन्दुः पतन् घटं पूरयन्।
उपरि शीर्षकम् — “जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः”
अधः वाक्यम् — “जलं जीवनम्। बिन्दुं बिन्दुं रक्षत, भविष्यं रक्षत।”
पार्श्वे चत्वारि लघुचित्राणि — (१) क्षरन् नलः ⊗ (२) वर्षाजलसंग्रहः ✓ (३) बिन्दुसेचनम् ✓ (४) प्रदूषिता नदी ⊗
प्रस्तुति-सङ्केत: चर्चा को दो पक्षों में बाँटिए — ‘गृहे जलसंरक्षणम्’ तथा ‘ग्रामे/नगरे जलसंरक्षणम्’ — और प्रत्येक दल तीन उपाय तथा एक चित्र प्रस्तुत करे। अन्त में पूरी कक्षा एक प्रतिज्ञा-पत्रम् बनाकर हस्ताक्षर करे।
प्र5.
विद्युतः संरक्षणं कथं कर्तुं शक्यते तस्य चित्रं निर्माय शिक्षकाय दर्शयत।
उत्तर

विद्युतः संरक्षणम् अपि अपव्ययवर्जनस्य एव रूपम् — यतः विद्युत् अपि क्रीयते, अतः विद्युतः अपव्ययः धनस्य अपव्ययः एव। (हिन्दी — बिजली की बचत भी अपव्यय-त्याग का ही रूप है — क्योंकि बिजली भी ख़रीदी जाती है, इसलिए बिजली की बरबादी धन की ही बरबादी है।)

उपायः (संस्कृतम्)हिन्दीलाभः
कक्षात् निर्गच्छन्तः दीपान् पङ्खान् च पिदधीत।कमरे से निकलते समय पंखा-बत्ती बन्द कीजिए।सबसे सरल और सबसे बड़ी बचत
तापदीपानां स्थाने LED-दीपाः योजनीयाः।पुराने बल्बों के स्थान पर LED लगाइए।लगभग 80% कम विद्युत्-व्यय
दिवसे सूर्यप्रकाशस्य उपयोगः; गवाक्षाः उद्घाटनीयाः।दिन में खिड़कियाँ खोलकर सूर्य-प्रकाश का उपयोग कीजिए।दिन में बत्ती की आवश्यकता ही नहीं
यन्त्राणि (दूरदर्शनम्, सङ्गणकम्) मुख्यस्विचेन एव पिधातव्यानि।टीवी-कम्प्यूटर को रिमोट से नहीं, मुख्य स्विच से बन्द कीजिए।‘स्टैंडबाई’ में होनेवाला छिपा व्यय रुकता है
पञ्चतारकाङ्कितानि (5-star) उपकरणानि क्रेतव्यानि।फ़्रिज, पंखा आदि 5-star रेटिंग वाले ख़रीदिए।दीर्घकाले विद्युद्व्ययः न्यूनः
सौरोर्जायाः (solar) उपयोगः — सौरपटलम्, सौरजलतापकः।छत पर सोलर पैनल तथा सोलर वॉटर-हीटर लगवाइए।नवीकरणीय ऊर्जा, स्थायी बचत

चित्रस्य रूपरेखा (poster का ख़ाका) —

वामे भागे — ‘अपव्ययः’ ⊗ : सर्वे दीपाः प्रज्वलिताः, कक्षा रिक्ता, विद्युद्देयकम् (बिल) ऊर्ध्वं गच्छत्।
दक्षिणे भागे — ‘सुव्ययः’ ✓ : एकः LED-दीपः, उद्घाटितः गवाक्षः, छादने सौरपटलम्, देयकम् अधः गच्छत्।
मध्ये शीर्षकम् — “विद्युतः रक्षणम् एव विद्युतः उत्पादनम्।”
अधः — “क्षणे नष्टे कुतो विद्या, कणे नष्टे कुतो धनम्॥” — इति श्लोकं लिखित्वा तस्य अधः लिखत — ‘एवमेव — विद्युत्कणे नष्टे कुतः ऊर्जा ?’
अङ्कयोजना-सङ्केत (मूल्यांकन में क्या देखा जाएगा): (क) कम-से-कम पाँच उपाय, संस्कृत में लिखे हों — 2 अङ्काः; (ख) चित्र में ‘पहले/बाद’ अथवा ‘ग़लत/सही’ का स्पष्ट विरोधाभास — 2 अङ्काः; (ग) पाठ की किसी सूक्ति का प्रयोग — 1 अङ्कः; (घ) स्वच्छता तथा प्रस्तुति — 1 अङ्कः। कुल 6 अङ्काः।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ