प्र1.
उपपदविभक्तिः का ? ‘प्रति’, ‘विना’, ‘धिक्’ तथा ‘निकषा’ इत्येतेषां योगे का विभक्तिः भवति ?
उत्तर
‘उप’ इत्यस्य अर्थः सामीप्यम् इति। समीपस्थं पदम् आश्रित्य जायमाना विभक्तिः उपपदविभक्तिः इति कथ्यते। (हिन्दी — ‘उप’ का अर्थ है समीपता। पास में रखे किसी पद के कारण जो विभक्ति लगती है, उसे उपपदविभक्ति कहते हैं। अर्थात् विभक्ति कारक से नहीं, पास के शब्द से तय होती है।)
| उपपदम् | अर्थः | विभक्तिः | पुस्तकस्य उदाहरणम् |
|---|---|---|---|
| प्रति | आभिमुख्यम् (की ओर) | द्वितीया | नामदेवः प्रतिदिनं मन्दिरं प्रति गच्छति स्म। / बालः सदा मातरं प्रति धावति। |
| विना | बिना | द्वितीया, तृतीया, पञ्चमी — तीनों | अहं कारणं विना शुनकं ताडितवान्। / कारणेन विना … / कारणात् विना … |
| धिक् | निन्दावाचकः (धिक्कार) | द्वितीया | धिक् शुनकम्। / धिक् दुर्जनम्। |
| निकषा | समीपम् (पास) | द्वितीया | कपिलः मातामहीं निकषा आगतवान्। / केशवस्य गृहं पाठशालां निकषा अस्ति। |
नियम कैसे लगाएँ: पहले वाक्य में उपपद खोजिए (प्रति / विना / धिक् / निकषा …), फिर उससे जुड़े संज्ञाशब्द को उस विभक्ति में रखिए। जैसे — ‘आपण … गत्वा’ में साधारणतः द्वितीया ‘आपणम्’ आती; पर ‘आपण प्रति गत्वा’ में भी द्वितीया ही — आपणं प्रति। और ‘आपण निकषा वाहनानि’ में भी द्वितीया — आपणं निकषा।
‘विना’ की विशेषता: यह अकेला ऐसा उपपद है जिसके साथ तीन विभक्तियाँ चलती हैं। परीक्षा में कोई भी एक लिखिए, तीनों शुद्ध हैं — शर्कराम् विना / शर्करया विना / शर्करातः विना।