तेषां चरित्रेषु प्रतिपदं भूतदया, समता, क्षमा, अहिंसा, करुणा, ऋजुता, बन्धुता चेत्यादीनि जीवनमूल्यानि प्राप्यन्ते।
महाराष्ट्रस्य प्रसिद्धः महात्मा नामदेवमहाराजः स्वीयव्यवहारेण करुणायाः महान्तम् आदर्शम् उपस्थापितवान्।
सः सर्वात्मकस्य ईश्वरस्य न केवलं सङ्कीर्तनं कृतवान् अपि तु सर्वेषु जीवेषु सः भगवन्तं दृष्टवान्।
हिन्दी अर्थ — भारतदेश बहुत-से ब्रह्मर्षियों और महात्माओं की भूमि है। उनके चरित्र सारे विश्व के लिए प्रेरणा के स्थान हैं। उनके चरित्रों में पद-पद पर भूतदया, समता, क्षमा, अहिंसा, करुणा, ऋजुता, बन्धुता आदि जीवनमूल्य मिलते हैं। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध महात्मा नामदेवमहाराज ने अपने व्यवहार से करुणा का महान् आदर्श उपस्थित किया। उन्होंने सर्वात्मक (सबमें व्याप्त) ईश्वर का केवल सङ्कीर्तन ही नहीं किया, अपितु सब जीवों में उन्होंने भगवान् को देखा। नामदेवमहाराज के जीवन की एक शिक्षाप्रद घटना यहाँ दिखाई गई है, जिसे पढ़कर हमारा जीवन बदल जाना चाहिए।
| पदम् | व्याकरण-सङ्केतः | अर्थः |
|---|---|---|
| ब्रह्मर्षीणाम् | ब्रह्मन् + ऋषि → ब्रह्मर्षि (गुण-सन्धिः); पुं., षष्ठी, बहुवचनम् | ब्रह्मज्ञानी ऋषियों का |
| प्रेरणास्पदम् | प्रेरणायाः आस्पदम् — षष्ठीतत्पुरुषः; नपुं., प्रथमा, ए.व. | प्रेरणा का स्थान |
| प्रतिपदम् | पदे पदे — अव्ययीभावः | पद-पद पर, हर जगह |
| स्वीयव्यवहारेण | स्वीयः व्यवहारः — कर्मधारयः; पुं., तृतीया, ए.व. (करणे तृतीया) | अपने व्यवहार से |
| उपस्थापितवान् | उप + √स्था (णिच्) + क्तवतु, पुं., प्र., ए.व. | उपस्थित किया |
| दृष्टवान् | √दृश् + क्तवतु, पुं., प्र., ए.व. | देखा |