शारदा अध्याय 4 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति। (सत्यम् / असत्यम्)
उत्तर

सत्यम्। (हिन्दी — यह वाक्य सत्य है।)

पाठ-प्रमाणम् — “अतः सः नवमीं कक्षाम् अपि पूर्णां कर्तुं न शक्तवान्। यतोहि देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति।
क्यों सत्य: यह वाक्य पाठ में शब्दशः विद्यमान है और खुदीराम के जीवन से सिद्ध भी होता है — उन्होंने पढ़ाई, सुख, यहाँ तक कि जीवन भी राष्ट्र के लिए त्याग दिया। ‘राष्ट्राय’ में चतुर्थी है — «तादर्थ्ये चतुर्थी» अर्थात् ‘राष्ट्र के लिए’।
प्र2.
निर्दयः किङ्ग्ज़फोर्ड् बालान् अपि दण्डयति स्म। (सत्यम् / असत्यम्)
उत्तर

सत्यम्। (हिन्दी — यह वाक्य सत्य है।)

पाठ-प्रमाणम् — “कलकत्ता-जनपदस्य मुख्यः न्यायिकः आङ्ग्लः अधिकारी ‘किङ्ग्ज़फोर्ड्’ भारतीय-देशभक्तान् अतीवकठोररीत्या दण्डयति स्म। निर्दयः सः बालान् अपि न त्यजति स्म।
ध्यान दीजिए: पाठ में ‘बालान् अपि न त्यजति स्म’ (बालकों को भी नहीं छोड़ता था) लिखा है — प्रश्न-वाक्य में उसी बात को सकारात्मक रूप में ‘बालान् अपि दण्डयति स्म’ कहा गया है। अर्थ एक ही है, अतः वाक्य सत्य है। यही निर्दयता उसके वध की योजना का कारण बनी।
प्र3.
खुदीरामस्य आक्रमणेन किङ्ग्ज़फोर्ड् मृतः। (सत्यम् / असत्यम्)
उत्तर

असत्यम्। (हिन्दी — यह वाक्य असत्य है।) शुद्धं वाक्यम् — खुदीरामस्य आक्रमणेन किङ्ग्ज़फोर्ड् न मृतः; केनेडीनामकस्य अधिकारिणः पत्नी पुत्री च मृते।

पाठ-प्रमाणम् — “यद्यपि सः किङ्ग्ज़फोर्ड् महोदयस्य रथः आसीत् तथापि तस्मिन् सः नासीदेव। केनेडीनामकस्य अधिकारिणः पत्नी पुत्री च तत्र आस्ताम्। ते मृते किन्तु किङ्ग्ज़फोर्ड् रक्षितः।
यही पाठ का सबसे करुण मोड़ है: रथ तो किङ्ग्ज़फोर्ड का ही था, पर उस समय उसमें वह बैठा नहीं था। इसीलिए पाठ में ‘किन्तु हा धिक् !’ (हाय, धिक्कार है!) जैसा खेद-सूचक वाक्य आया है। ‘आस्ताम्’ द्विवचन है — क्योंकि पत्नी और पुत्री दो थीं; इसी से ‘ते मृते’ भी द्विवचन में है।
प्र4.
खुदीरामः किङ्ग्ज़फोर्ड्महोदयस्य रथस्य उपरि विस्फोटकं क्षिप्तवान्। (सत्यम् / असत्यम्)
उत्तर

सत्यम्। (हिन्दी — यह वाक्य सत्य है।)

पाठ-प्रमाणम् — “अष्टाधिक-नवदशशततमवर्षस्य एप्रिलमासस्य अष्टाविंशे दिनाङ्के (२८-०४-१९०८) किङ्ग्ज़फोर्ड् इत्यस्य रथविशेषे प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां विस्फोटकं प्रक्षिप्तम्।”
सूक्ष्म अन्तर, ध्यान रखिए: पाठ में यह कार्य दोनों ने मिलकर किया — ‘प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां’ (तृतीया द्विवचनम्, कर्मवाच्ये कर्ता)। अतः घटना सत्य है, पर पूर्ण उत्तर यों लिखिए — ‘सत्यम्, किन्तु विस्फोटकं प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां सह प्रक्षिप्तम्।’ यह वही परिशुद्धि है जिसकी अपेक्षा कक्षा ९ के विद्यार्थी से की जाती है।
व्याकरण: पाठ का वाक्य कर्मवाच्य में है (विस्फोटकं प्रक्षिप्तम् — कर्म प्रथमा में, कर्ता तृतीया में), जबकि प्रश्न-वाक्य कर्तृवाच्य में है (खुदीरामः … क्षिप्तवान्)। यही वाच्य-परिवर्तन है।
प्र5.
खुदीरामः बालानां सङ्घटनं कृत्वा पदयात्राम् आयोजयति स्म। (सत्यम् / असत्यम्)
उत्तर

सत्यम्। (हिन्दी — यह वाक्य सत्य है।)

पाठ-प्रमाणम् — “बालानां संघटनं कृत्वा सः पदयात्राम् आयोजयति स्म। तस्यां यात्रायां देशभक्तियुतानि गीतानि, ‘वन्दे मातरम्’ चेत्यादयः घोषणाः भवन्ति स्म।”
महत्त्व: खुदीराम ने अकेले काम नहीं किया — उन्होंने अपनी ही आयु के बालकों को संगठित किया, पदयात्रा निकाली और लोकजागरण के पत्रक बाँटे। यही ‘संगठन’ किशोर आयु में उनके नेतृत्व-गुण का प्रमाण है।
व्याकरण: ‘कृत्वा’ क्त्वा-प्रत्ययान्त अव्यय है — जब एक ही कर्ता के दो कार्य क्रम से हों तो पहले कार्य में क्त्वा लगता है (पहले संगठन किया, फिर पदयात्रा की)।
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