चित्रे किं किम् अस्ति (पुस्तकस्थस्य चित्रस्य वर्णनम्) — पुस्तक के चित्र में एक हरा-भरा खुला उद्यान है। पीछे ऊँचा पर्वत और उससे गिरता जलप्रपात है; दाहिनी ओर छोटे-छोटे गृह (गाँव के घर) दिखते हैं। आकाश में सूर्य, श्वेत मेघ और उड़ते पक्षी हैं। सामने बालक-बालिकाएँ खेल रहे हैं — कोई कन्दुक (फुटबॉल) से, कोई चटकक्रीडा (बैडमिंटन) से; एक बालक द्विचक्रिका चला रहा है और एक बालिका चक्रयुक्त आसन्दी (व्हील-चेयर) पर बैठी खेल देख रही है। नीचे लाल पुष्प, तितलियाँ और स्वच्छ हरी घास है।
पञ्च वाक्यानि (आदर्श उत्तरम्) —
(ख) उद्याने बहूनि रक्तवर्णानि पुष्पाणि विकसितानि सन्ति, हरिताः वृक्षाः च शोभन्ते।
(ग) पृष्ठभागे उन्नतः पर्वतः दृश्यते, तस्य समीपे च ग्रामस्य लघूनि गृहाणि सन्ति।
(घ) आकाशे सूर्यः प्रकाशते, श्वेताः मेघाः सञ्चरन्ति, पक्षिणः च उड्डयन्ते।
(ङ) एकः बालकः द्विचक्रिकाम् आरुह्य चलति, एका बालिका च चक्रासन्द्याम् उपविश्य क्रीडां पश्यति; सर्वत्र स्वच्छता विद्यते इति चित्रस्य विशेषता।
(हिन्दी अर्थ — (क) चित्र में एक बहुत सुन्दर उद्यान है, जहाँ लड़के और लड़कियाँ आनन्द से खेल रहे हैं। (ख) उद्यान में बहुत-से लाल फूल खिले हैं और हरे वृक्ष शोभा दे रहे हैं। (ग) पीछे ऊँचा पर्वत दिखाई देता है और उसके पास गाँव के छोटे-छोटे घर हैं। (घ) आकाश में सूर्य चमक रहा है, सफ़ेद बादल घूम रहे हैं और पक्षी उड़ रहे हैं। (ङ) एक बालक साइकिल चला रहा है और एक बालिका पहियेदार कुर्सी पर बैठकर खेल देख रही है; सब ओर स्वच्छता है — यही चित्र की विशेषता है।)