प्र1.
देशस्य भक्ताः
उत्तर
समस्तपदम् — देशभक्ताः। (हिन्दी — देश के भक्त = देशभक्त।)
विग्रहः — देशस्य भक्ताः → समासः — देशभक्ताः
समासस्य नाम — षष्ठी तत्पुरुषः
समासस्य नाम — षष्ठी तत्पुरुषः
यही समास क्यों: विग्रह में पूर्वपद ‘देश’ षष्ठी विभक्ति में है (देशस्य) और समास में वह विभक्ति लुप्त हो जाती है — यही तत्पुरुष का लक्षण है। तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान होता है; यहाँ मुख्य बात ‘भक्त’ हैं, ‘देश’ केवल उनका सम्बन्ध बताता है। जिस विभक्ति का लोप हो, समास उसी नाम से पुकारा जाता है — यहाँ षष्ठी, अतः ‘षष्ठी तत्पुरुष’।
पाठ में: “यतोहि देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति।” तथा “कलकत्ता-जनपदस्य … अधिकारी ‘किङ्ग्ज़फोर्ड्’ भारतीय-देशभक्तान् अतीवकठोररीत्या दण्डयति स्म।”