यह संग्रह-कार्य है — पाँचों क्रान्तिवीरों की जानकारी इकट्ठी कीजिए और उनमें से किसी एक की एक घटना कक्षा में सुनाइए। नीचे संग्रह के लिए आधार-तालिका और एक पूरा नमूना-कथन दिया गया है।
| क्रान्तिवीरः | जन्म–बलिदानम् | जन्मस्थानम् | प्रसिद्धा घटना | प्रसिद्धं वचनम्/नारा |
|---|---|---|---|---|
| मङ्गलपाण्डे | १८२७ – १८५७ | नगवा-ग्रामः, बलिया-जनपदः | बैरकपुरे सैनिकविद्रोहस्य आरम्भः (१८५७) | ‘मारो फिरङ्गी को’ |
| लक्ष्मीबाई (झाँसीराज्ञी) | १८२८ – १८५८ | वाराणसी | झाँसीरक्षणार्थं युद्धम्; ग्वालियरे वीरगतिः | ‘मम झाँसीं न दास्यामि’ (मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी) |
| बालगङ्गाधरतिलकः | १८५६ – १९२० | रत्नागिरी, महाराष्ट्रम् | गणेशोत्सव-शिवजयन्ती द्वारा जनजागरणम्; ‘केसरी’ पत्रिका | ‘स्वराज्यं मम जन्मसिद्धः अधिकारः अस्ति’ |
| चन्द्रशेखरः आज़ादः | १९०६ – १९३१ | भाबरा-ग्रामः, मध्यप्रदेशः | प्रयागराजस्य अल्फ्रेड-उद्याने आत्मबलिदानम् | ‘अहं स्वतन्त्रः एव अस्मि, स्वतन्त्रः एव मरिष्यामि’ |
| भगतसिंहः | १९०७ – १९३१ | बङ्गा-ग्रामः, पञ्जाबः | केन्द्रीयसभायां बम-पत्रकक्षेपः (१९२९); लाहौरे उद्बन्धनम् | ‘इन्किलाब जिन्दाबाद’ (क्रान्तिः चिरञ्जीवतु) |
नमूना उत्तर (आदर्शम् उत्तरम्) — एका घटना, संस्कृतभाषया —
(हिन्दी — १९२८ में साइमन आयोग के विरोध में शान्तिपूर्ण जुलूस निकाल रहे लाला लाजपतराय पर लाठियाँ बरसीं और उनका देहान्त हो गया। यह देखकर भगतसिंह अत्यन्त व्यथित हुए। १९२९ में उन्होंने बटुकेश्वर दत्त के साथ केन्द्रीय असेम्बली में कम शक्ति वाले दो बम तथा पर्चे फेंके और ‘इन्किलाब ज़िन्दाबाद’ का उद्घोष किया; उद्देश्य किसी को मारना नहीं, ‘बहरों को सुनाना’ था। वे भागे नहीं, स्वयं गिरफ़्तारी दी — ताकि अदालत के माध्यम से क्रान्ति का सन्देश जन-जन तक पहुँचे। २३ मार्च १९३१ को लाहौर में राजगुरु और सुखदेव के साथ हँसते हुए उन्होंने फाँसी स्वीकार की।)