शारदा अध्याय 5 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
आर्यः संगणकस्य उपयोगं कुर्वन् आसीत्। — कर्तृपदम् ? क्रियापदम् ?
उत्तर

उत्तरम् — कर्तृपदम् : आर्यः · क्रियापदम् : आसीत् (‘कुर्वन् आसीत्’ इति सम्पूर्णं क्रियापदम्)।

(हिन्दी — कर्तृपद ‘आर्यः’ है और क्रियापद ‘आसीत्’ — पूरा क्रिया-रूप ‘कुर्वन् आसीत्’ = ‘कर रहा था’।)

कर्तृपदम् — जो क्रिया करता है, वह प्रथमा विभक्ति में होता है (‘कर्तरि प्रथमा’)
आर्यः = पुंलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन
क्रियापदम् — आसीत् (√अस्, लङ् लकार, प्र.पु.ए.व. — ‘था’)
कुर्वन् = √कृ + शतृ प्रत्ययः — ‘करता हुआ’ (विशेषणवत्, क्रिया नहीं)
‘कुर्वन्’ क्रिया क्यों नहीं है: क्रियापद वही होता है जिसमें लकार, पुरुष तथा वचन हों। ‘कुर्वन्’ में ये नहीं हैं — वह शतृ-प्रत्ययान्त कृदन्त है और कर्ता ‘आर्यः’ का विशेषण बनकर आया है (आर्यः + कुर्वन् — दोनों पुंलिङ्ग प्रथमा एकवचन)। जिसमें लकार है, वह ‘आसीत्’ है — इसलिए क्रियापद वही है। ‘कुर्वन् आसीत्’ मिलकर अपूर्ण भूतकाल का अर्थ देता है — ‘कर रहा था’। उत्तर लिखते समय ‘आसीत्’ लिखिए और कोष्ठक में ‘कुर्वन् आसीत्’ जोड़ दीजिए — दोनों दृष्टियाँ सध जाएँगी।
प्र2.
यशिका कृतकबुद्धेः उपयुक्तानाम् उपयोगान् वर्णयति। — कर्तृपदम् ? क्रियापदम् ?
उत्तर

उत्तरम् — कर्तृपदम् : यशिका · क्रियापदम् : वर्णयति

(हिन्दी — कर्तृपद ‘यशिका’ और क्रियापद ‘वर्णयति’ (वर्णन करती है)।)

यशिका = स्त्रीलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन (आकारान्त, ‘लता’-वत्)
वर्णयति = √वर्ण् + णिच् + लट्, प्रथमपुरुष · एकवचन
उपयोगान् = द्वितीया बहुवचन — कर्म (‘कर्मणि द्वितीया’)
कर्ता ढूँढ़ने की सरल विधि: क्रिया से पूछिए ‘कः / का वर्णयति ?’ — जो उत्तर आए, वही कर्ता। यहाँ ‘का वर्णयति ?’ → ‘यशिका’। दूसरी जाँच — कर्ता सदा प्रथमा में होता है और उसका वचन क्रिया के वचन से मिलता है। ‘यशिका’ एकवचन, ‘वर्णयति’ भी एकवचन — मेल ठीक है। ध्यान दीजिए, ‘कृतकबुद्धेः’ (षष्ठी) तथा ‘उपयोगान्’ (द्वितीया) कर्ता नहीं हो सकते, क्योंकि वे प्रथमा में नहीं हैं।
प्र3.
शिक्षकः बालेभ्यः सतर्कतायाः आवश्यकतां सूचयति। — कर्तृपदम् ? क्रियापदम् ?
उत्तर

उत्तरम् — कर्तृपदम् : शिक्षकः · क्रियापदम् : सूचयति

(हिन्दी — कर्तृपद ‘शिक्षकः’ और क्रियापद ‘सूचयति’ (सूचित करता है, बताता है)।)

शिक्षकः — प्रथमा ए.व. (कर्ता)
बालेभ्यः — चतुर्थी बहुवचन (‘सम्प्रदाने चतुर्थी’ — जिनके लिए/जिन्हें बताया जाए)
आवश्यकताम् — द्वितीया ए.व. (कर्म)
सतर्कतायाः — षष्ठी ए.व. (सम्बन्ध — ‘सतर्कता की आवश्यकता’)
सूचयति — √सूच् + णिच् + लट्, प्र.पु.ए.व.
एक ही वाक्य में चार विभक्तियाँ: यह वाक्य अभ्यास का सबसे अच्छा उदाहरण है — इसमें प्रथमा (कर्ता), द्वितीया (कर्म), चतुर्थी (सम्प्रदान) तथा षष्ठी (सम्बन्ध) — चारों एक साथ हैं। ऐसे वाक्य में कर्ता पहचानने के लिए विभक्ति देखिए, स्थान नहीं : जो प्रथमा में है वही कर्ता है, चाहे वह वाक्य में कहीं भी खड़ा हो। ‘बालेभ्यः’ चतुर्थी है, इसलिए वह कर्ता नहीं हो सकता।
प्र4.
अथर्वः अपि कस्यचित् रोबोटिक्-यन्त्रस्य ज्ञानं दत्तवान्। — कर्तृपदम् ? क्रियापदम् ?
उत्तर

उत्तरम् — कर्तृपदम् : अथर्वः · क्रियापदम् : दत्तवान्

(हिन्दी — कर्तृपद ‘अथर्वः’ और क्रियापद ‘दत्तवान्’ (उसने दिया)।)

अथर्वः — प्रथमा ए.व., पुंलिङ्ग
दत्तवान् = √दा + क्तवतु, पुंलिङ्ग प्रथमा एकवचन — भूतकाल का अर्थ
कस्यचित् रोबोटिक्-यन्त्रस्य — षष्ठी (सम्बन्ध), ‘किसी रोबोटिक यन्त्र का’
ज्ञानम् — द्वितीया ए.व. (कर्म)
क्तवतु-रूप भी क्रियापद ही है: ‘दत्तवान्’ में लकार नहीं है, फिर भी वह क्रियापद माना जाता है, क्योंकि वह स्वयं वाक्य की मुख्य क्रिया है और उसे किसी सहायक क्रिया की आवश्यकता नहीं — ‘अथर्वः … दत्तवान्’ पूरा वाक्य है। यही उसका ‘कुर्वन्’ से अन्तर है : ‘कुर्वन्’ अकेला वाक्य नहीं बना सकता, उसे ‘आसीत्’ चाहिए। पाठ में भी ऐसे अनेक क्तवतु-रूप हैं — ‘दृष्टवती’, ‘प्राप्तवती’, ‘प्राप्तवान्’, ‘उक्तवान्’।
ध्यान दें: ‘दत्तवान्’ का स्त्रीलिङ्ग रूप ‘दत्तवती’ होगा। इसीलिए यशिका के लिए पाठ में ‘दृष्टवती’, ‘प्राप्तवती’ (स्त्रीलिङ्ग) आया और वेद के लिए ‘प्राप्तवान्’ (पुंलिङ्ग)।
प्र5.
वेदः अपि कृतकबुद्धेः दोषान् विवेचयति। — कर्तृपदम् ? क्रियापदम् ?
उत्तर

उत्तरम् — कर्तृपदम् : वेदः · क्रियापदम् : विवेचयति

(हिन्दी — कर्तृपद ‘वेदः’ और क्रियापद ‘विवेचयति’ (विवेचन करता है, दोषों को गिनाकर समझाता है)।)

वेदः — प्रथमा ए.व. (कर्ता; ‘वेदः’ यहाँ छात्र का नाम है)
दोषान् — द्वितीया बहुवचन (कर्म)
कृतकबुद्धेः — षष्ठी ए.व. (सम्बन्ध — ‘कृतकबुद्धि के दोष’)
विवेचयति — वि + √विच् + णिच् + लट्, प्र.पु.ए.व.
अपि — अव्यय (‘भी’), कर्ता नहीं
पाठ से मेल: यह वाक्य पाठ के अनुरूप है — वेदः ही वह छात्र है जो बार-बार शङ्काएँ तथा दोष उठाता है : ‘कथम् एषा बुद्धिः यन्त्रे स्थाप्यते ?’, ‘यन्त्राणि मानवेभ्यः संसारम् अधिगृह्णन्ति’, ‘यदि कृतकबुद्धिः मनुष्यान् स्वस्ववृत्तेः निष्कासयति तर्हि कः रक्षणोपायः ?’ — इसलिए ‘वेदः दोषान् विवेचयति’ कहना पूरी तरह उचित है।
सम्पूर्ण उत्तर एक दृष्टि में: (क) आर्यः — आसीत् (कुर्वन् आसीत्) · (ख) यशिका — वर्णयति · (ग) शिक्षकः — सूचयति · (घ) अथर्वः — दत्तवान् · (ङ) वेदः — विवेचयति। ध्यान दीजिए, पाँचों कर्ता प्रथमा एकवचन में हैं और पाँचों क्रियाएँ प्रथमपुरुष एकवचन में — कर्ता तथा क्रिया का यह मेल ही वाक्य को शुद्ध बनाता है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ