शारदा अध्याय 5 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
अद्यतनं संगणकयन्त्रम् अतिसक्रियम् अस्ति। — विशेषणम् ? विशेष्यम् ?
उत्तर

उत्तरम् — विशेषणम् : अद्यतनम् (तथा विधेय-विशेषणम् ‘अतिसक्रियम्’) · विशेष्यम् : संगणकयन्त्रम्

(हिन्दी — विशेषण ‘अद्यतनम्’ (आजकल का, आधुनिक) और विशेष्य ‘संगणकयन्त्रम्’ (कम्प्यूटर)। ‘अतिसक्रियम्’ भी उसी का विशेषण है, पर वह क्रिया के बाद आया विधेय-विशेषण है।)

नियमः — विशेषणं विशेष्यस्य लिङ्गं वचनं विभक्तिं च अनुसरति।
संगणकयन्त्रम् = नपुंसकलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन
अतः अद्यतनम्, अतिसक्रियम् — दोनों नपुंसकलिङ्ग प्रथमा एकवचन
दो विशेषण, दो भूमिकाएँ: ‘अद्यतनम्’ संज्ञा से सटकर आया है और उसे सीधे विशेषित करता है — इसे विशेष्य-विशेषण कहते हैं। ‘अतिसक्रियम्’ क्रिया ‘अस्ति’ के साथ आया है और बताता है कि यन्त्र कैसा है — इसे विधेय-विशेषण कहते हैं। दोनों ही विशेषण हैं और दोनों का लिङ्ग-वचन-विभक्ति एक ही विशेष्य से मिला है। परीक्षा में ‘अद्यतनम्’ लिखकर कोष्ठक में ‘अतिसक्रियम् — विधेयविशेषणम्’ जोड़ देना सबसे पूर्ण उत्तर है।
शब्द: ‘अद्यतनम्’ = अद्य + ट्युल् (तन) — ‘आज का, वर्तमान समय का’। ‘संगणकयन्त्रम्’ = सम् + √गण् + ण्वुल् = सङ्गणकः (जो गणना करे) + यन्त्रम् — computer
प्र2.
वेदस्य गवेषणं गम्भीरम् आसीत्। — विशेषणम् ? विशेष्यम् ?
उत्तर

उत्तरम् — विशेषणम् : गम्भीरम् · विशेष्यम् : गवेषणम्

(हिन्दी — विशेषण ‘गम्भीरम्’ (गहरा) और विशेष्य ‘गवेषणम्’ (खोज, अनुसन्धान)। अर्थ — वेद की खोज गहरी थी।)

गवेषणम् = नपुंसकलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन → विशेषणम् अपि ‘गम्भीरम्
वेदस्य = षष्ठी ए.व. — सम्बन्ध बताता है, विशेषण नहीं
‘वेदस्य’ विशेषण क्यों नहीं है: क्योंकि वह षष्ठी में है, प्रथमा में नहीं। विशेषण को विशेष्य की विभक्ति भी अपनानी पड़ती है; ‘वेदस्य’ ने केवल सम्बन्ध बताया — ‘किसकी खोज’ — गुण नहीं बताया। यही षष्ठी और विशेषण का भेद है : षष्ठी ‘किसका’ बताती है, विशेषण ‘कैसा’ बताता है। प्रश्न ‘कीदृशं गवेषणम् ?’ पूछिए — उत्तर ‘गम्भीरम्’ आएगा, ‘वेदस्य’ नहीं।
प्र3.
यशिकायाः प्रस्तुतिः सुबोधा आसीत्। — विशेषणम् ? विशेष्यम् ?
उत्तर

उत्तरम् — विशेषणम् : सुबोधा · विशेष्यम् : प्रस्तुतिः

(हिन्दी — विशेषण ‘सुबोधा’ (सरलता से समझ में आने वाली) और विशेष्य ‘प्रस्तुतिः’ (प्रस्तुति)। अर्थ — यशिका की प्रस्तुति सरलता से समझ में आने वाली थी।)

प्रस्तुतिः = स्त्रीलिङ्ग · इकारान्त · प्रथमा एकवचन
अतः विशेषणम् अपि स्त्रीलिङ्ग — ‘सुबोध’ (न तु ‘सुबोधः’ अथवा ‘सुबोधम्’)
यशिकायाः = षष्ठी ए.व. (सम्बन्ध)
यहाँ ‘आ’ अन्त क्यों: ‘सुबोध’ शब्द का मूल रूप पुंलिङ्ग में ‘सुबोधः’, नपुंसक में ‘सुबोधम्’ तथा स्त्रीलिङ्ग में ‘सुबोधा’ बनता है। चूँकि विशेष्य ‘प्रस्तुतिः’ स्त्रीलिङ्ग है, विशेषण को भी स्त्रीलिङ्ग होना ही पड़ा। यही नियम पाठ में भी दिखता है — ‘कृतकबुद्धिः सहायिका अस्ति’, ‘एषा काल्पनिकी अस्ति’, ‘मानवसमाना बुद्धिमत्ता’ — सर्वत्र स्त्रीलिङ्ग विशेषण, क्योंकि विशेष्य स्त्रीलिङ्ग है।
शब्द: ‘सुबोधा’ = सु (सरलता से) + बोध (समझ) — ‘जो सरलता से समझी जा सके’। इसका विलोम ‘दुर्बोधा’ है।
प्र4.
शिक्षकस्य सन्देशः सुस्पष्टः आसीत्। — विशेषणम् ? विशेष्यम् ?
उत्तर

उत्तरम् — विशेषणम् : सुस्पष्टः · विशेष्यम् : सन्देशः

(हिन्दी — विशेषण ‘सुस्पष्टः’ (बिलकुल साफ़) और विशेष्य ‘सन्देशः’। अर्थ — शिक्षक का सन्देश बिलकुल स्पष्ट था।)

सन्देशः = पुंलिङ्ग · अकारान्त · प्रथमा एकवचन
अतः विशेषणम् ‘सुस्पष्ट’ — पुंलिङ्ग प्रथमा एकवचन
शिक्षकस्य = षष्ठी (सम्बन्ध)
पाठ से जोड़िए: शिक्षक का सन्देश सचमुच सुस्पष्ट था और वह अन्तिम पंक्ति में स्वयं कहा गया — ‘कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी — इति वाक्यम् अस्माकं मनसि स्पष्टं स्यात्।’ ध्यान दीजिए, वहाँ भी ‘स्पष्टम्’ विशेषण है और उसका विशेष्य ‘वाक्यम्’ (नपुंसकलिङ्ग) है, इसलिए रूप ‘स्पष्टम्’ बना — यहाँ विशेष्य ‘सन्देशः’ पुंलिङ्ग है, इसलिए ‘सुस्पष्टः’।
प्र5.
आर्यस्य दृष्टिकोणः आधुनिकः आसीत्। — विशेषणम् ? विशेष्यम् ?
उत्तर

उत्तरम् — विशेषणम् : आधुनिकः · विशेष्यम् : दृष्टिकोणः

(हिन्दी — विशेषण ‘आधुनिकः’ (आज के समय का, नया) और विशेष्य ‘दृष्टिकोणः’ (देखने का ढंग)। अर्थ — आर्य का दृष्टिकोण आधुनिक था।)

दृष्टिकोणः = पुंलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन → विशेषणम् ‘आधुनिक
आधुनिकः = अधुना (अब) + ठक् (इक) — ‘अब के समय का’
आर्यस्य = षष्ठी (सम्बन्ध)

सम्पूर्ण उत्तर एक दृष्टि में —

वाक्यम्विशेषणम्विशेष्यम्लिङ्गम्
(क) अद्यतनं संगणकयन्त्रम् अतिसक्रियम् अस्ति।अद्यतनम् (अतिसक्रियम्)संगणकयन्त्रम्नपुंसकलिङ्गम्
(ख) वेदस्य गवेषणं गम्भीरम् आसीत्।गम्भीरम्गवेषणम्नपुंसकलिङ्गम्
(ग) यशिकायाः प्रस्तुतिः सुबोधा आसीत्।सुबोधाप्रस्तुतिःस्त्रीलिङ्गम्
(घ) शिक्षकस्य सन्देशः सुस्पष्टः आसीत्।सुस्पष्टःसन्देशःपुंलिङ्गम्
(ङ) आर्यस्य दृष्टिकोणः आधुनिकः आसीत्।आधुनिकःदृष्टिकोणःपुंलिङ्गम्
एक सूत्र से पाँचों प्रश्न: हर वाक्य में तीन पद हैं — एक षष्ठी वाला (वेदस्य, यशिकायाः, शिक्षकस्य, आर्यस्य), एक प्रथमा संज्ञा और एक प्रथमा विशेषण। षष्ठी वाला पद कभी विशेषण नहीं होता। शेष दो में से जो गुण बताए वह विशेषण, जो वस्तु बताए वह विशेष्य। और जाँच यह है कि दोनों का लिङ्ग-वचन-विभक्ति एक ही हो — ‘प्रस्तुतिः सुबोधा’ (दोनों स्त्री.प्र.ए.व.), ‘सन्देशः सुस्पष्टः’ (दोनों पुं.प्र.ए.व.)।
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