प्रेक्षोपलब्धिश्चित्संवित्प्रतिपज्ज्ञप्तिचेतना॥
धीर्धारणावती मेधा सङ्कल्पः कर्म मानसम्।
अवधानं समाधानं प्रणिधानं तथैव च॥
पदच्छेदः — बुद्धिः + मनीषा + धिषणा + धीः + प्रज्ञा + शेमुषी + मतिः। प्रेक्षा + उपलब्धिः + चित् + संवित् + प्रतिपत् + ज्ञप्तिः + चेतना॥ धीः + धारणावती + मेधा + सङ्कल्पः + कर्म + मानसम्। अवधानम् + समाधानम् + प्रणिधानम् + तथा + एव + च॥
अन्वयः — मनीषा, धिषणा, धीः, प्रज्ञा, शेमुषी, मतिः, प्रेक्षा, उपलब्धिः, चित्, संवित्, प्रतिपत्, ज्ञप्तिः, चेतना (इति एते शब्दाः) ‘बुद्धिः’ (इत्यर्थे प्रयुज्यन्ते)। धारणावती धीः ‘मेधा’ (कथ्यते)। मानसं कर्म ‘सङ्कल्पः’ (कथ्यते)। तथा एव च अवधानम्, समाधानम्, प्रणिधानम् (इति त्रयः शब्दाः एकार्थकाः सन्ति)।
अर्थः — ‘बुद्धि’ के लिए ये शब्द प्रयुक्त होते हैं — मनीषा, धिषणा, धी, प्रज्ञा, शेमुषी, मति, प्रेक्षा, उपलब्धि, चित्, संवित्, प्रतिपत्, ज्ञप्ति तथा चेतना। जो धी धारणावती हो, अर्थात् जो सीखे हुए को धारण कर रखे, वह ‘मेधा’ कहलाती है। मन का जो कर्म है, वह ‘सङ्कल्प’ कहलाता है। और ‘अवधान’, ‘समाधान’ तथा ‘प्रणिधान’ — ये तीनों (एकाग्रता के) पर्याय हैं।
पुस्तक का अपना स्पष्टीकरण — ‘बुद्धिः इत्यर्थे अमरकोषे बहवः पर्यायवाचकाः शब्दाः उल्लिखिताः सन्ति। ते यथा — मनीषा, धिषणा, धी, प्रज्ञा, शेमुषी, मति, प्रेक्षा, उपलब्धिः, चित्, संविद्, प्रतिपत्, ज्ञप्तिः, चेतना, धारणावती मेधा च — एते सर्वेऽपि शब्दाः स्त्रीलिङ्गे विद्यन्ते।’
| क्रमः | पर्यायः | शब्द का विशेष भाव |
|---|---|---|
| १ | बुद्धिः | मूल शब्द — समझने की शक्ति (√बुध् = जानना) |
| २ | मनीषा | मन को वश में रखने वाली बुद्धि; इसीलिए विद्वान् ‘मनीषी’ कहलाता है |
| ३ | धिषणा | तेज, प्रखर बुद्धि |
| ४ | धीः | सबसे प्राचीन तथा छोटा शब्द; गायत्री-मन्त्र का ‘धियो यो नः प्रचोदयात्’ इसी से |
| ५ | प्रज्ञा | गहरी, तत्त्व तक पहुँचने वाली बुद्धि; ‘प्रज्ञावान्’ = विवेकी |
| ६ | शेमुषी | काव्यों में प्रयुक्त सुन्दर पर्याय |
| ७ | मतिः | राय, निश्चय करने वाली बुद्धि (‘इति मम मतम्’ — श्रेया का वाक्य) |
| ८ | प्रेक्षा | देखने-परखने की शक्ति (प्र + √ईक्ष्) |
| ९ | उपलब्धिः | जो प्राप्त करे, पकड़ ले — बोध |
| १० | चित् | चेतनाशक्ति; वेदान्त का ‘सत्-चित्-आनन्द’ इसी का |
| ११ | संवित् | पूर्ण ज्ञान, सम्यक् बोध |
| १२ | प्रतिपत् | तुरन्त समझ लेने की शक्ति |
| १३ | ज्ञप्तिः | जानने की क्रिया, बोध (√ज्ञा से) |
| १४ | चेतना | सजगता — पाठ के श्लोक का ‘चेतनाः’ इसी से |
| १५ | धारणावती मेधा | धारण करने वाली बुद्धि — स्मरणशक्ति से युक्त प्रतिभा |