उत्तरम् (उपयोगः) — अथर्वस्य प्रश्नस्य उत्तरे अध्यापकः वदति — ‘दीक्षा, स्वयम्, सर्वेषां कृते कृतकबुद्धिः, पी.एम्.-ईविद्या, संशयनिराकरणार्थं चैट्बोट्, भाषानुवादोपकरणानि च यत्र तत्र प्रयुज्यन्ते। एतानि कृतकबुद्ध्याधारितानि उपकरणानि सन्ति। एतेषां साहाय्येन छात्राः शिक्षकाणाम् अनुपस्थितौ अपि स्वयम् अध्येतुं शक्नुवन्ति।’
उत्तरम् (शिक्षकस्य स्थानम्) — आकाशः शङ्कते — ‘हा धिक् ! एतेषां कारणेन मानवशिक्षकः किं प्रयोजनरहितः भविष्यति ?’ अध्यापकः स्पष्टं वदति — ‘न न ! कृतकबुद्धिः गुरुमित्रम् अस्ति, गुरुविकल्पः नास्ति। शिक्षकाणां सान्निध्ये छात्रेषु व्यक्तित्वविकासः भवति। शिक्षकाः पुस्तकीयज्ञानेन सह छात्रेषु मानवीयमूल्यबोधम् अपि जनयन्ति। ते अनुशासनं, परोपकारं, करुणां, तथैव व्यवहारज्ञानं च शिक्षयन्ति। सदा स्मरणीयं यत् कृतकबुद्धिः उपकरणम् अस्ति, प्रेरणा तु मानवेभ्यः एव आगच्छति।’
(हिन्दी — शिक्षा में दीक्षा, स्वयम्, ‘सर्वों के लिए ए.आई.’, पी.एम्. ई-विद्या, शङ्का दूर करने के लिए चैटबोट तथा भाषानुवाद के उपकरण जगह-जगह प्रयुक्त हो रहे हैं। ये सब ए.आई.-आधारित उपकरण हैं। इनकी सहायता से छात्र शिक्षकों की अनुपस्थिति में भी स्वयं पढ़ सकते हैं। किन्तु कृतकबुद्धि गुरु की मित्र है, गुरु का विकल्प नहीं। शिक्षकों के सान्निध्य में ही छात्रों का व्यक्तित्व-विकास होता है; शिक्षक पुस्तकीय ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों का बोध भी जगाते हैं, अनुशासन, परोपकार, करुणा तथा व्यवहार-ज्ञान सिखाते हैं। सदा याद रखना चाहिए कि कृतकबुद्धि उपकरण है — प्रेरणा तो मनुष्यों से ही आती है।)
‘गुरुमित्रम्, न गुरुविकल्पः’ — यही उत्तर की जान है: ध्यान दीजिए कि अध्यापक ने तर्क कैसे रखा। उन्होंने यह नहीं कहा कि ए.आई. कमज़ोर है; उन्होंने यह कहा कि शिक्षक जो देता है, वह सूचना नहीं, संस्कार है — और संस्कार सान्निध्य से मिलता है, स्क्रीन से नहीं। ‘प्रेरणा तु मानवेभ्यः एव आगच्छति’ — इस एक वाक्य में ‘एव’ (ही) शब्द निर्णायक है। यन्त्र उत्तर दे सकता है, पर पढ़ने की इच्छा नहीं जगा सकता।
व्याकरण: ‘कृतकबुद्ध्याधारितानि’ = कृतकबुद्धि + आधारितानि (यण् सन्धि के बाद दीर्घ) — ‘ए.आई. पर आधारित’। ‘अनुपस्थितौ’ सप्तमी एकवचन है और यहाँ भावे सप्तमी जैसी है — ‘न होने पर’। ‘अध्येतुम्’ = अधि + √इ + तुमुन् — ‘पढ़ने के लिए’ (यही पद शब्दार्थ-तालिका की पहली पंक्ति में दिया है)। ‘हा धिक्’ खेद-सूचक अव्यय-युग्म है — ‘हाय!’