प्र1.
एनम् अपि वञ्चयित्वा सुखी भवामि।
उत्तर
प्रश्ननिर्माणम् — कम् अपि वञ्चयित्वा सुखी भवामि ?
(हिन्दी — किसको भी ठगकर सुखी होता हूँ ? — अर्थात् ‘एनम्’ के स्थान पर उसी विभक्ति-वचन का प्रश्नवाचक ‘कम्’ रखा गया।)
स्थूलपदम् — एनम् (एतद्/इदम् इत्यस्य द्वितीया · एकवचन · पुंलिङ्ग)
तत्स्थाने प्रश्नवाचकम् — किम् इत्यस्य द्वितीया एकवचन पुंलिङ्ग = कम्
शेषं वाक्यं यथावत् एव तिष्ठति।
तत्स्थाने प्रश्नवाचकम् — किम् इत्यस्य द्वितीया एकवचन पुंलिङ्ग = कम्
शेषं वाक्यं यथावत् एव तिष्ठति।
प्रश्ननिर्माण का एक ही नियम है: जिस पद पर प्रश्न बनाना है, उसे हटाइए और उसी लिङ्ग · विभक्ति · वचन का प्रश्नवाचक सर्वनाम वहीं रख दीजिए; वाक्य का शेष भाग बिलकुल न छेड़िए। ‘एनम्’ पुंलिङ्ग द्वितीया एकवचन है (यह ‘एतद्’ का ही अन्वादेश-रूप है), अतः ‘कम्’ आएगा — ‘कः’ या ‘केन’ नहीं।
ध्यान दें: ‘एनम्’ का प्रयोग तभी होता है जब उस व्यक्ति की चर्चा पहले हो चुकी हो — यहाँ धर्मबुद्धि की। इसीलिए अनुवाद में ‘इसको भी’ आता है, ‘किसी को’ नहीं।