प्र1.
राजपुरुषाः पापबुद्धिं दण्डितवन्तः।
उत्तर
वर्तमानकालिकवाक्यम् — राजपुरुषाः पापबुद्धिं दण्डयन्ति।
(हिन्दी — राजपुरुष पापबुद्धि को दण्ड देते हैं।)
भूतकालिकम् — दण्डितवन्तः (√दण्ड् + णिच् + क्तवतु, पुं.प्र.ब.व.)
वर्तमानकालिकम् — दण्डयन्ति (लट् लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
कर्ता ‘राजपुरुषाः’ बहुवचने अस्ति, अतः क्रिया अपि बहुवचने।
वर्तमानकालिकम् — दण्डयन्ति (लट् लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
कर्ता ‘राजपुरुषाः’ बहुवचने अस्ति, अतः क्रिया अपि बहुवचने।
नियम पहले, प्रयोग बाद में: क्तवतु-प्रत्ययान्त पद विशेषण की तरह चलता है, इसलिए वह कर्ता के लिङ्ग-वचन से मेल खाता है (राजपुरुषाः → दण्डितवन्तः)। जब उसे वर्तमानकाल में बदलते हैं, तब वह क्रियापद बन जाता है और अब उसे कर्ता के पुरुष तथा वचन से मिलना पड़ता है — ‘राजपुरुषाः’ प्रथमपुरुष बहुवचन है, अतः ‘दण्डयन्ति’। यही एक अन्तर पूरे प्रश्न ४ में लागू होता है।
ध्यान दें: ‘दण्ड्’ धातु का प्रयोग णिजन्त रूप में होता है — दण्डयति / दण्डयन्ति (दण्ड देता है / देते हैं)। ‘दण्डति’ लिखना अशुद्ध है।