पूर्णं वाक्यम् — सूर्यः चन्द्रः पवनः अग्निः आकाशः भूमिः जलं हृदयं यमः दिवसः रात्रिः प्रभातं सायं च मनुष्याणां सर्वविधं व्यवहारं जानन्ति। अतः वयं सर्वदा उत्तमं व्यवहारं कुर्मः।
(हिन्दी — सूर्य, चन्द्रमा, पवन, अग्नि, आकाश, पृथ्वी, जल, हृदय, यम, दिन, रात, प्रातःकाल और सायंकाल — ये सब मनुष्यों के सब प्रकार के व्यवहार को जानते हैं। इसलिए हम सदा उत्तम व्यवहार करें।)
| रिक्तस्थानम् | उत्तरम् | श्लोक का कौन-सा पद | क्यों यही |
|---|---|---|---|
| पहला — ‘चन्द्रः ___ अग्निः’ | पवनः | अनिलः | श्लोक का क्रम ही है — आदित्य, चन्द्र, अनिल, अनल; ‘अनिल’ का हिन्दी-सुलभ पर्याय ‘पवन’ है |
| दूसरा — ‘जलं ___ यमः’ | हृदयं | हृदयम् | श्लोक में ठीक यही क्रम है — ‘आपो हृदयं यमश्च’ |
| तीसरा — ‘सर्वविधं ___ जानन्ति’ | व्यवहारं | वृत्तम् | ‘वृत्तम्’ का अर्थ है आचरण; उसी का सरल पर्याय ‘व्यवहार’ बचा हुआ तीसरा पद है |