उत्तरम् — भृगोः जिज्ञासा ब्रह्मविषये आसीत्।
(हिन्दी — भृगु की जिज्ञासा ब्रह्म के विषय में थी।)
अद्यतन2026-09-06
उत्तरम् — भृगोः जिज्ञासा ब्रह्मविषये आसीत्।
(हिन्दी — भृगु की जिज्ञासा ब्रह्म के विषय में थी।)
उत्तरम् — भृगुणा ब्रह्मज्ञानाय तपः आचरितम्। (विस्तरेण — भृगुणा ब्रह्मज्ञानाय पञ्चवारं वनं पर्वतं च गत्वा अनेकवर्षाणि कठोरं तपः आचरितम्।)
(हिन्दी — भृगु ने ब्रह्मज्ञान के लिए तप किया। — विस्तार से : भृगु ने ब्रह्मज्ञान के लिए पाँच बार वन तथा पर्वत जाकर अनेक वर्षों तक कठोर तप किया।)
उत्तरम् — भृगुः प्रथमं तपसा अन्नं ब्रह्मरूपेण ज्ञातवान् — ‘अन्नं वै ब्रह्म’ इति।
(हिन्दी — भृगु ने पहले तप से अन्न को ब्रह्म के रूप में जाना — ‘अन्न ही ब्रह्म है’।)
उत्तरम् — मनसः सङ्कल्पाः, भावाः, विचाराश्च जायन्ते।
(हिन्दी — मन से संकल्प, भाव और विचार उत्पन्न होते हैं।)
उत्तरम् — प्राणिनः अन्नात् जायन्ते। (पाठस्य वाक्यम् — ‘अन्नाद् एव प्राणिनः जायन्ते।’)
(हिन्दी — प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं।)
उत्तरम् — इन्द्रियाणि मनसा सञ्चाल्यन्ते।
(हिन्दी — इन्द्रियाँ मन के द्वारा चलाई जाती हैं।)
उत्तरम् — शरीरं प्राणे प्रतिष्ठितम् अस्ति।
(हिन्दी — शरीर प्राण में टिका हुआ है।)
उत्तरम् — बुद्धितत्त्वेन विना स्मृतिशक्तेः विकासो न भवति।
(हिन्दी — बुद्धितत्त्व के बिना स्मृति-शक्ति का विकास नहीं होता।)
उत्तरम् — भृगुः तपसा अन्नस्य, प्राणस्य, मनसः, विज्ञानस्य, आनन्दस्य च महत्त्वं ज्ञातवान् — अर्थात् सः पञ्चानां कोषाणां महत्त्वं ज्ञातवान्।
(हिन्दी — भृगु ने तप से अन्न, प्राण, मन, विज्ञान और आनन्द का — अर्थात् पाँचों कोषों का — महत्त्व जाना।)