शारदा अध्याय 8 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
एतानि क्रियापदानि लोट्-लकारे त्रिषु पुरुषेषु पठत लिखत च — लभताम्, सेवताम्, जयताम्, भाषताम्, विद्यताम्, सहताम्, यतताम्, याचताम्, स्पर्धताम्, लज्जताम्, कुरुताम्।
उत्तर

नियम — लोट्-लकार आत्मनेपद के नौ प्रत्यय: ताम् · एताम् · अन्ताम् / स्व · एथाम् · ध्वम् / ऐ · आवहै · आमहै। दिए गए पद में से ‘ताम्’ हटाइए, बचा हुआ अङ्ग लीजिए (लभताम् → लभ), और उसी में ये नौ प्रत्यय जोड़ दीजिए।

पदम्धातुःअर्थःप्रथमपुरुषःमध्यमपुरुषःउत्तमपुरुषः
एक.द्वि.बहु.एक.द्वि.बहु.एक.द्वि.बहु.
लभताम्√लभ्पाए / प्राप्त करेलभताम्लभेताम्लभन्ताम्लभस्वलभेथाम्लभध्वम्लभैलभावहैलभामहै
सेवताम्√सेव्सेवा करेसेवताम्सेवेताम्सेवन्ताम्सेवस्वसेवेथाम्सेवध्वम्सेवैसेवावहैसेवामहै
भाषताम्√भाष्बोलेभाषताम्भाषेताम्भाषन्ताम्भाषस्वभाषेथाम्भाषध्वम्भाषैभाषावहैभाषामहै
विद्यताम्√विद्हो / विद्यमान रहेविद्यताम्विद्येताम्विद्यन्ताम्विद्यस्वविद्येथाम्विद्यध्वम्विद्यैविद्यावहैविद्यामहै
सहताम्√सह्सहेसहताम्सहेताम्सहन्ताम्सहस्वसहेथाम्सहध्वम्सहैसहावहैसहामहै
यतताम्√यत्प्रयत्न करेयतताम्यतेताम्यतन्ताम्यतस्वयतेथाम्यतध्वम्यतैयतावहैयतामहै
याचताम्√याच्माँगेयाचताम्याचेताम्याचन्ताम्याचस्वयाचेथाम्याचध्वम्याचैयाचावहैयाचामहै
स्पर्धताम्√स्पर्ध्स्पर्धा करेस्पर्धताम्स्पर्धेताम्स्पर्धन्ताम्स्पर्धस्वस्पर्धेथाम्स्पर्धध्वम्स्पर्धैस्पर्धावहैस्पर्धामहै
लज्जताम्√लज्ज्लजाएलज्जताम्लज्जेताम्लज्जन्ताम्लज्जस्वलज्जेथाम्लज्जध्वम्लज्जैलज्जावहैलज्जामहै
कुरुताम्√कृ (तनादि, आ.)करेकुरुताम्कुर्वाताम्कुर्वताम्कुरुष्वकुर्वाथाम्कुरुध्वम्करवैकरवावहैकरवामहै
जयताम् *√जि (भ्वादि, प.)जीतेजयतुजयताम्जयन्तुजयजयतम्जयतजयानिजयावजयाम
* ‘जयताम्’ के विषय में — यह पद शेष दस से भिन्न है। पुस्तक में यह ‘जयताम्’ छपा है, जो √जि (जीतना), भ्वादिगण, परस्मैपद का लोट्-लकार प्रथमपुरुष-द्विवचन रूप है (जयतु · जयताम् · जयन्तु) — इसीलिए ऊपर की पंक्ति में उसके परस्मैपदी रूप दिए गए हैं। किन्तु सूची के बाकी सब पद प्रश्न ६ की आत्मनेपदी सूची के ही लोट्-रूप हैं (लभते → लभताम्, सेवते → सेवताम्, भाषते → भाषताम्…)। उस क्रम को देखते हुए यहाँ ‘जायते’ का लोट्-रूप ‘जायताम्’ अपेक्षित लगता है — उसके रूप होंगे : जायताम् · जायेताम् · जायन्ताम् / जायस्व · जायेथाम् · जायध्वम् / जायै · जायावहै · जायामहै। परीक्षा में दोनों में से जो पूछा जाए, वही लिखिए; और अपनी पुस्तक में छपा रूप ध्यान से पढ़िए।
लट् और लोट् का अन्तर एक पंक्ति में: लट् बताता है — ‘वह सेवा करता है’ (सेवते); लोट् कहता है — ‘वह सेवा करे / आप सेवा कीजिए’ (सेवताम्)। दोनों तालिकाएँ साथ रखकर देखिए तो अन्तर केवल प्रत्ययों का है : ते→ताम्, से→स्व, ध्वे→ध्वम्, ए→ऐ। इतना पकड़ लीजिए, पूरा लोट्-लकार अपने आप बन जाएगा।
कृ-धातु फिर याद रखिए: ‘कुरुताम्’ के रूप वन्द् के साँचे पर नहीं चलते — कुरुताम् · कुर्वाताम् · कुर्वताम् / कुरुष्व · कुर्वाथाम् · कुरुध्वम् / करवै · करवावहै · करवामहै। ये रूप पुस्तक ने प्रश्न ७ की आदर्श-तालिका में स्वयं दे दिए हैं, इसलिए वहीं से लीजिए।
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