प्र1.
‘सर्वं शब्देन भासते’ इति तालिकायाः अन्तिमः स्तम्भः — ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ — रिक्तः अस्ति। पाठे प्रयुक्तानां शब्दानाम् अर्थान् ज्ञात्वा तं स्तम्भं पूरयत।
उत्तर
पुस्तक में यह अन्तिम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है — विद्यार्थी को हर शब्द का अर्थ अपनी मातृभाषा में लिखना है। नीचे की तालिका में वह स्तम्भ हिन्दी (हमारी माध्यम-भाषा) में भर दिया गया है; जिनकी मातृभाषा मराठी, बाङ्ग्ला, गुजराती, तमिऴ, तेलुगु, ओड़िआ या कोई अन्य भारतीय भाषा है, वे इसी अर्थ के आधार पर अपनी भाषा का शब्द रखें।
| शब्दः | अर्थः | हिन्दी | English | मातृभाषया अर्थम् (भरा हुआ — हिन्दी) |
|---|---|---|---|---|
| अन्वेष्टव्यम् (अनु + √इष् + तव्यत्, नपुं.प्र.ए.व.) | अनुसन्धेयम् | खोज करनी चाहिए | Explore | ढूँढ़ना चाहिए, अनुसन्धान करना चाहिए |
| अवबुद्धम् (अव + √बुध् + क्त, नपुं.प्र.ए.व.) | ज्ञातम् | समझा गया | Understood | जान लिया गया, भली-भाँति समझ लिया |
| उदीरितम् (उद् + √ईर् + क्त, नपुं.प्र.ए.व.) | उक्तम् / प्रकटितम् | कहा गया | Spoken | कहा गया, बोला गया |
| कामः (पुं.प्र.ए.व.) | इच्छा | इच्छा | Desire | चाह, कामना |
| कुर्वीत (√कृ, विधिलिङ्, आ.प्र.पु.ए.व.) | कुर्यात् | करना चाहिए | Should do | करना चाहिए, किया जाना उचित है |
| धृतिः (स्त्री.प्र.ए.व.) | धैर्यम् | धैर्य | Courage | धीरज, हिम्मत |
| धीः (स्त्री.प्र.ए.व.) | बुद्धिः | बुद्धि | Intelligence | अक्ल, समझ |
| निष्क्रान्तिः (निस् + √क्रम् + क्तिन्, स्त्री.प्र.ए.व.) | बहिर्निर्गमनम् | बाहर जाना | Going out | निकल जाना, बाहर चला जाना |
| परिहर्तव्यम् (परि + √हृ + तव्यत्, नपुं.ए.व.) | त्यक्तव्यम् | त्याग करना चाहिए | To be discarded | छोड़ देना चाहिए, तिरस्कार करना चाहिए |
| प्रकटितम् (प्र + √कट् + क्त, नपुं.प्र.ए.व.) | प्रकाशितम् | प्रकट हुआ | Revealed | ज़ाहिर किया गया, खोलकर कहा गया |
| प्राणः (पुं.प्र.ए.व.) | प्राणवायुः | प्राण वायु | Life-breathe | साँस, जीवन-वायु |
| ब्रह्म (नपुं.प्र.ए.व.) | परमात्मा / ईश्वरः | परमात्मा | Supreme being | परब्रह्म, सर्वव्यापी परम सत्ता |
| भूतानि (नपुं.प्र.ब.व.) | प्राणिनः | प्राणी जन | Living beings | जीव-जन्तु, सब प्राणी |
| विचिकित्सा (स्त्री.प्र.ए.व.) | सन्देहः | सन्देह | Doubt | शक, दुविधा |
| विज्ञानम् (नपुं.प्र.ए.व.) | बुद्धिः | बुद्धि | Intellect | बुद्धि-तत्त्व, विवेक-शक्ति |
| विप्रमोक्षः (वि + प्र + मोक्षः) | अत्यन्तं मोक्षः | अत्यन्त मोक्ष | Final liberation | पूरी तरह छूट जाना, अन्तिम मुक्ति |
| विवर्धन्ते (वि + √वृध् + लट्, आ.प्र.पु.ब.व.) | विशेषेण वृद्धिं प्राप्नुवन्ति | विशेष रूप से वृद्धि को प्राप्त होते हैं | Grow | ख़ूब बढ़ते हैं, फलते-फूलते हैं |
| श्रद्धा (स्त्री.प्र.ए.व.) | आदरः | निष्ठा | Faith | विश्वास, आस्था |
| सङ्कल्पः (पुं.प्र.ए.व.) | प्रतिज्ञा | सङ्कल्प | Come into being | पक्का इरादा, ठान लेना |
| सम्भवन्ति (सम् + √भू + लट्, प्र.पु.ब.व.) | जायन्ते | उत्पन्न होते हैं | Arise | पैदा होते हैं, जन्म लेते हैं |
| सर्वग्रन्थीनाम् (पुं.ष.ब.व.) | सर्वेषां ग्रन्थीनाम् (सन्देहानाम्) | सभी गाँठ (सन्देहों के) | Of all the doubts | सब गाँठों का, सब सन्देहों का |
| साधनीयम् (√साध् + अनीयर्, नपुं.प्र.ए.व.) | संस्करणीयम् | संस्कार करना चाहिए | Should be achieved | साधना चाहिए, माँजकर तैयार करना चाहिए |
| स्मृतिलम्भे (षष्ठी-तत्पुरुषः, पुं.स.ए.व.) | स्मृतेः लम्भे (ध्रुवस्मृतेः प्राप्तौ) | ध्रुवस्मृति (आत्मज्ञान) की प्राप्ति होने पर | Obtaining the everlasting memory or self actualization | अटल स्मृति — आत्मज्ञान — मिल जाने पर |
| हातव्याः (√हा + तव्यत्, पुं.प्र.ब.व.) | त्यक्तव्याः | त्याग करना चाहिए | Should be sacrificed | छोड़ देने चाहिए, त्यागने योग्य हैं |
| ह्रीः (स्त्री.प्र.ए.व.) | लज्जा | लज्जा | Modesty | शर्म, संकोच |
नमूना उत्तर (अन्य मातृभाषाओं में) — मराठी: प्राणः = ‘श्वास’, धृतिः = ‘धीर’, ह्रीः = ‘लाज’, भूतानि = ‘प्राणिमात्र’। बाङ्ग्ला: कामः = ‘इच्छा’, विचिकित्सा = ‘सन्देह’, श्रद्धा = ‘बिश्वास’। गुजराती: धीः = ‘बुद्धि’, प्राणः = ‘श्वास’, हातव्याः = ‘छोड़वा जेवा’। तमिऴ: धीः = ‘अऱिवु’, प्राणः = ‘उयिर्’, ह्रीः = ‘वेट्कम्’। अपनी भाषा में लिखते समय ध्यान रखिए कि अर्थ वही रहे जो संस्कृत स्तम्भ में दिया है।
इस तालिका में एक बड़ी सीख छिपी है: गिनकर देखिए — पच्चीस में से तेरह शब्द कृदन्त हैं, अर्थात् धातु + प्रत्यय से बने। तीन प्रकार बार-बार लौटते हैं : क्त (अवबुद्धम्, उदीरितम्, प्रकटितम् — ‘हो चुका’ भूतकाल), तव्यत् (अन्वेष्टव्यम्, परिहर्तव्यम्, हातव्याः — ‘करना चाहिए’) तथा अनीयर् (साधनीयम् — ‘करने योग्य’)। यही तीन प्रत्यय आगे पृष्ठ १०६–१०७ के व्याकरण-खण्ड का विषय हैं। इसलिए तालिका केवल शब्द-सूची नहीं, आगे के व्याकरण की भूमिका है।
पुस्तक में छपी दो छोटी असंगतियाँ: (१) ‘सङ्कल्पः’ के सामने अंग्रेज़ी में Come into being छपा है, जो वहाँ नहीं बैठता — ‘सङ्कल्पः’ का अर्थ Resolve / Determination है, और Come into being वस्तुतः नीचे के ‘सम्भवन्ति’ का अर्थ है (जिसके सामने Arise छपा है)। लगता है दोनों पंक्तियों में अंग्रेज़ी अर्थ ऊपर-नीचे खिसक गया है। (२) ‘प्राणः’ के सामने Life-breathe छपा है; शुद्ध रूप Life-breath है।