शारदा अध्याय 8 सर्वं शब्देन भासते

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
‘सर्वं शब्देन भासते’ इति तालिकायाः अन्तिमः स्तम्भः — ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ — रिक्तः अस्ति। पाठे प्रयुक्तानां शब्दानाम् अर्थान् ज्ञात्वा तं स्तम्भं पूरयत।
उत्तर

पुस्तक में यह अन्तिम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है — विद्यार्थी को हर शब्द का अर्थ अपनी मातृभाषा में लिखना है। नीचे की तालिका में वह स्तम्भ हिन्दी (हमारी माध्यम-भाषा) में भर दिया गया है; जिनकी मातृभाषा मराठी, बाङ्ग्ला, गुजराती, तमिऴ, तेलुगु, ओड़िआ या कोई अन्य भारतीय भाषा है, वे इसी अर्थ के आधार पर अपनी भाषा का शब्द रखें।

शब्दःअर्थःहिन्दीEnglishमातृभाषया अर्थम् (भरा हुआ — हिन्दी)
अन्वेष्टव्यम् (अनु + √इष् + तव्यत्, नपुं.प्र.ए.व.)अनुसन्धेयम्खोज करनी चाहिएExploreढूँढ़ना चाहिए, अनुसन्धान करना चाहिए
अवबुद्धम् (अव + √बुध् + क्त, नपुं.प्र.ए.व.)ज्ञातम्समझा गयाUnderstoodजान लिया गया, भली-भाँति समझ लिया
उदीरितम् (उद् + √ईर् + क्त, नपुं.प्र.ए.व.)उक्तम् / प्रकटितम्कहा गयाSpokenकहा गया, बोला गया
कामः (पुं.प्र.ए.व.)इच्छाइच्छाDesireचाह, कामना
कुर्वीत (√कृ, विधिलिङ्, आ.प्र.पु.ए.व.)कुर्यात्करना चाहिएShould doकरना चाहिए, किया जाना उचित है
धृतिः (स्त्री.प्र.ए.व.)धैर्यम्धैर्यCourageधीरज, हिम्मत
धीः (स्त्री.प्र.ए.व.)बुद्धिःबुद्धिIntelligenceअक्ल, समझ
निष्क्रान्तिः (निस् + √क्रम् + क्तिन्, स्त्री.प्र.ए.व.)बहिर्निर्गमनम्बाहर जानाGoing outनिकल जाना, बाहर चला जाना
परिहर्तव्यम् (परि + √हृ + तव्यत्, नपुं.ए.व.)त्यक्तव्यम्त्याग करना चाहिएTo be discardedछोड़ देना चाहिए, तिरस्कार करना चाहिए
प्रकटितम् (प्र + √कट् + क्त, नपुं.प्र.ए.व.)प्रकाशितम्प्रकट हुआRevealedज़ाहिर किया गया, खोलकर कहा गया
प्राणः (पुं.प्र.ए.व.)प्राणवायुःप्राण वायुLife-breatheसाँस, जीवन-वायु
ब्रह्म (नपुं.प्र.ए.व.)परमात्मा / ईश्वरःपरमात्माSupreme beingपरब्रह्म, सर्वव्यापी परम सत्ता
भूतानि (नपुं.प्र.ब.व.)प्राणिनःप्राणी जनLiving beingsजीव-जन्तु, सब प्राणी
विचिकित्सा (स्त्री.प्र.ए.व.)सन्देहःसन्देहDoubtशक, दुविधा
विज्ञानम् (नपुं.प्र.ए.व.)बुद्धिःबुद्धिIntellectबुद्धि-तत्त्व, विवेक-शक्ति
विप्रमोक्षः (वि + प्र + मोक्षः)अत्यन्तं मोक्षःअत्यन्त मोक्षFinal liberationपूरी तरह छूट जाना, अन्तिम मुक्ति
विवर्धन्ते (वि + √वृध् + लट्, आ.प्र.पु.ब.व.)विशेषेण वृद्धिं प्राप्नुवन्तिविशेष रूप से वृद्धि को प्राप्त होते हैंGrowख़ूब बढ़ते हैं, फलते-फूलते हैं
श्रद्धा (स्त्री.प्र.ए.व.)आदरःनिष्ठाFaithविश्वास, आस्था
सङ्कल्पः (पुं.प्र.ए.व.)प्रतिज्ञासङ्कल्पCome into beingपक्का इरादा, ठान लेना
सम्भवन्ति (सम् + √भू + लट्, प्र.पु.ब.व.)जायन्तेउत्पन्न होते हैंAriseपैदा होते हैं, जन्म लेते हैं
सर्वग्रन्थीनाम् (पुं.ष.ब.व.)सर्वेषां ग्रन्थीनाम् (सन्देहानाम्)सभी गाँठ (सन्देहों के)Of all the doubtsसब गाँठों का, सब सन्देहों का
साधनीयम् (√साध् + अनीयर्, नपुं.प्र.ए.व.)संस्करणीयम्संस्कार करना चाहिएShould be achievedसाधना चाहिए, माँजकर तैयार करना चाहिए
स्मृतिलम्भे (षष्ठी-तत्पुरुषः, पुं.स.ए.व.)स्मृतेः लम्भे (ध्रुवस्मृतेः प्राप्तौ)ध्रुवस्मृति (आत्मज्ञान) की प्राप्ति होने परObtaining the everlasting memory or self actualizationअटल स्मृति — आत्मज्ञान — मिल जाने पर
हातव्याः (√हा + तव्यत्, पुं.प्र.ब.व.)त्यक्तव्याःत्याग करना चाहिएShould be sacrificedछोड़ देने चाहिए, त्यागने योग्य हैं
ह्रीः (स्त्री.प्र.ए.व.)लज्जालज्जाModestyशर्म, संकोच
नमूना उत्तर (अन्य मातृभाषाओं में) — मराठी: प्राणः = ‘श्वास’, धृतिः = ‘धीर’, ह्रीः = ‘लाज’, भूतानि = ‘प्राणिमात्र’। बाङ्ग्ला: कामः = ‘इच्छा’, विचिकित्सा = ‘सन्देह’, श्रद्धा = ‘बिश्वास’। गुजराती: धीः = ‘बुद्धि’, प्राणः = ‘श्वास’, हातव्याः = ‘छोड़वा जेवा’। तमिऴ: धीः = ‘अऱिवु’, प्राणः = ‘उयिर्’, ह्रीः = ‘वेट्कम्’। अपनी भाषा में लिखते समय ध्यान रखिए कि अर्थ वही रहे जो संस्कृत स्तम्भ में दिया है।
इस तालिका में एक बड़ी सीख छिपी है: गिनकर देखिए — पच्चीस में से तेरह शब्द कृदन्त हैं, अर्थात् धातु + प्रत्यय से बने। तीन प्रकार बार-बार लौटते हैं : क्त (अवबुद्धम्, उदीरितम्, प्रकटितम् — ‘हो चुका’ भूतकाल), तव्यत् (अन्वेष्टव्यम्, परिहर्तव्यम्, हातव्याः — ‘करना चाहिए’) तथा अनीयर् (साधनीयम् — ‘करने योग्य’)। यही तीन प्रत्यय आगे पृष्ठ १०६–१०७ के व्याकरण-खण्ड का विषय हैं। इसलिए तालिका केवल शब्द-सूची नहीं, आगे के व्याकरण की भूमिका है।
पुस्तक में छपी दो छोटी असंगतियाँ: (१) ‘सङ्कल्पः’ के सामने अंग्रेज़ी में Come into being छपा है, जो वहाँ नहीं बैठता — ‘सङ्कल्पः’ का अर्थ Resolve / Determination है, और Come into being वस्तुतः नीचे के ‘सम्भवन्ति’ का अर्थ है (जिसके सामने Arise छपा है)। लगता है दोनों पंक्तियों में अंग्रेज़ी अर्थ ऊपर-नीचे खिसक गया है। (२) ‘प्राणः’ के सामने Life-breathe छपा है; शुद्ध रूप Life-breath है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ