कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
परमाणु अविभाज्य नहीं है। टॉमसन के कैथोड किरण प्रयोग (1897) ने दर्शाया कि प्रत्येक परमाणु में इलेक्ट्रॉन होते हैं — इन पर –1.602 × 10 –19 C आवेश होता है जिसे परिपाटी एवं सुविधा हेतु –1 लिया जाता है, और इनका द्रव्यमान परमाणु की तुलना में नगण्य होता है। स्वर्ण पर्णिका प्रयोग (गाइगर एवं मार्सडेन, 1911) ने परमाणु की संरचना निर्धारित की। अधिकांश α-कण सीधे निकल गए, अतः परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है; कुछ कण पुनः लौट आए, अतः संपूर्ण धनावेश एवं लगभग संपूर्ण द्रव्यमान एक अति सूक्ष्म, सघन नाभिक में केंद्रित है। परमाणु का व्यास ≈ 10 –10 m, नाभिक का व्यास ≈ 10 –15 m — अर्थात 10 5 गुना का अंतर। रदरफोर्ड का ग्रहीय मॉडल स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका — वृत्ताकार कक्षा में गतिशील इलेक्ट्रॉन त्वरित होता है, अतः उसे ऊर्जा का क्षय कर नाभिक में गिर जाना चाहिए। बोर (1913) ने स्थायी अवस्थाओं की अभिधारणा से इस
त्वरित पुनरावृत्ति
| पद | अर्थ | मुख्य मान अथवा नियम | अध्याय में कहाँ |
|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन (e–) | नाभिक के बाहर स्थित ऋणावेशित अवपरमाणुक कण | आवेश –1.602 × 10–19 C, जिसे –1 लिया जाता है; द्रव्यमान नगण्य | 8.2 टॉमसन का कैथोड किरण प्रयोग |
| प्रोटॉन (p+) | नाभिक में स्थित धनावेशित कण | आपेक्षिक आवेश +1; द्रव्यमान ≈ 1 u | 8.2.2 ग, रदरफोर्ड द्वारा खोजा गया |
| न्यूट्रॉन (n0) | नाभिक में स्थित अनावेशित कण | आपेक्षिक आवेश 0; द्रव्यमान ≈ 1 u | 8.3.1, चैडविक, वर्ष 1932 |
| नाभिक | अति सूक्ष्म सघन केंद्र जिसमें संपूर्ण धनावेश एवं लगभग संपूर्ण द्रव्यमान होता है | व्यास ≈ 10–15 m, अर्थात परमाणु से 105 गुना छोटा | 8.2.2 क, स्वर्ण पर्णिका प्रयोग |
| कोश / ऊर्जा स्तर | निश्चित वृत्ताकार पथ जिसमें इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निश्चित होती है | n = 1, 2, 3, 4 के लिए K, L, M, N | 8.2.3 बोर का मॉडल |
| परमाणु क्रमांक (Z) | नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या | उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर | 8.5 परमाणु क्रमांक |
| द्रव्यमान संख्या (A) | न्यूक्लिऑनों (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) की कुल संख्या | A = p+ + n0; संकेतन AZX | 8.6 द्रव्यमान संख्या |
| बोर–बरी नियम | कोशों में इलेक्ट्रॉन भरने के नियम | प्रति कोश अधिकतम 2n²; बाह्यतम कोश ≤ 8; क्रम K → L → M | 8.7 |
| संयोजकता इलेक्ट्रॉन | बाह्यतम (संयोजकता) कोश के इलेक्ट्रॉन | रासायनिक व्यवहार निर्धारित करते हैं; 8 = अष्टक = स्थायी | 8.8 संयोजकता |
| संयोजकता | संयोजन क्षमता — अष्टक पूर्ण करने हेतु त्यागे, ग्रहण अथवा साझा किए गए इलेक्ट्रॉन | Na (2,8,1) → 1; O (2,6) → 2; C (2,4) → 4 | 8.8 संयोजकता |
| समस्थानिक | एक ही तत्व के परमाणु जिनका Z समान परंतु A भिन्न हो | 11H, 21H, 31H; 126C, 136C, 146C | 8.9.1 समस्थानिक |
| समभारिक | भिन्न तत्वों के परमाणु जिनका A समान परंतु Z भिन्न हो | 4018Ar, 4019K, 4020Ca | 8.9.2 समभारिक |
| औसत परमाणु द्रव्यमान | समस्थानिकों की प्रचुरता के आधार पर निकाला गया भारित औसत | Cl: 35 × 75/100 + 37 × 25/100 = 35.5 u | 8.9.1 क |
| उपयोगी समस्थानिक | उद्योग एवं चिकित्सा में प्रयुक्त समस्थानिक | 23592U ईंधन, 6027Co कैंसर उपचार, 13153I थायरॉइड, 146C आयु निर्धारण | विज्ञान एवं समाज, पृष्ठ 155 |
अभ्यास
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- वैज्ञानिक की भाँति सोचिए
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- सोचिए और बताइए
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- जिज्ञासा-सूत्र
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