प्र1.
रहस्य #2— कुछ खाद्य पदार्थ शीघ्र दूषित क्यों हो जाते हैं? — “अजीब है!”, दिशा फुसफुसाई, “कुछ खाद्य पदार्थ शीघ्र ही दूषित क्यों हो जाते हैं और कुछ लंबे समय तक दूषित नहीं होते?”
उत्तर
जिस भोजन पर सूक्ष्मजीव आसानी से पनप सकते हैं, वह शीघ्र दूषित होता है; और जहाँ कोई चीज़ उन्हें रोक रही हो, वह लंबे समय तक चलता है। बालकनी में पड़े रोटी के टुकड़े को वह सब मिल गया जो सूक्ष्मजीवों को चाहिए — नमी, वायु और गर्मी। अचार को नहीं मिला, क्योंकि उस पर तेल की परत थी।
| बालकनी में पड़ी रोटी | पाटी का आम का अचार | |
|---|---|---|
| कितने समय चला | दो दिन में दूषित हो गया | दो महीने बाद भी अच्छा |
| उसमें नमी | नरम और नम | नमक ने आम के टुकड़ों का जल खींच लिया है |
| वायु का पहुँचना | खुली हवा में पड़ा था | ऊपर तेल की परत वायु को रोकती है |
| सूक्ष्मजीवों को रोकने वाला कुछ? | कुछ भी नहीं | नमक, मसाले और तेल — तीनों उनका पनपना कठिन बनाते हैं |
| परिणाम | फफूँद के रंगीन धब्बे | अब भी स्वादिष्ट |
एक पंक्ति का नियम: जो भोजन नम, नरम और खुला रखा हो वह शीघ्र दूषित होता है; जो सूखा, नमकीन, मीठा, तैलीय, ठंडा या बंद हो वह लंबे समय तक चलता है।
नमी + वायु + गर्मी = सूक्ष्मजीव पनपते हैं → भोजन शीघ्र दूषित
इनमें से एक भी हटा दें = भोजन अधिक समय तक सुरक्षित
इनमें से एक भी हटा दें = भोजन अधिक समय तक सुरक्षित
तेल क्यों काम करता है: तेल और जल आपस में नहीं मिलते, और तेल इतना होता है कि अचार के ऊपर एक परत बनकर टिका रहे। नीचे के सूक्ष्मजीवों को आवश्यक वायु नहीं मिलती, इसलिए वे पनप ही नहीं पाते।
इस क्रम को देखिए: दूध और पका चावल एक दिन में; रोटी और फल दो-तीन दिन में; सूखा लड्डू एक सप्ताह में; पापड़, मिर्च पाउडर और अचार महीनों चलते हैं। ध्यान दीजिए, इस क्रम में आगे बढ़ते-बढ़ते हर वस्तु में जल की मात्रा घटती जाती है।