कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 3 रहस्य #3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
रहस्य #3— हम अपने भोजन को दूषित होने से कैसे बचाएँ?
उत्तर

हम भोजन को सूक्ष्मजीवों से दूर रखकर बचाते हैं। इसके पाँच मुख्य तरीके हैं, और जासूस दिशा ने ये सब अपने ही घर में खोज लिए।

  1. सुखाना और निर्जलीकरण। भोजन को धूप में तब तक रखिए जब तक उसका जल न निकल जाए। चटाई पर सुखाई गई मिर्च पीसकर मिर्च पाउडर बनती है जो पूरे वर्ष चलता है। पापड़, बड़ियाँ, आम पापड़ और सूखी मछली इसी विधि से बनते हैं।
  2. अचार डालना और तेल का उपयोग। भोजन को नमक और मसालों में रखकर ऊपर से तेल डाल दीजिए। तेल वायु को भीतर नहीं जाने देता — इसी से पाटी का आम का अचार दो महीने बाद भी अच्छा था।
  3. प्रशीतन और हिमीकरण। भोजन को ठंडा रखिए। फ्रिज इतना ठंडा होता है कि सूक्ष्मजीव ठीक से पनप नहीं पाते, इसलिए दूध, सब्जियाँ, मक्खन और मिठाई ताजे बने रहते हैं। फ्रीज़र और भी ठंडा होता है।
  4. नमक, चीनी और मसाले। दिशा के दादाजी ने बताया कि लोग भोजन को दूषित होने से बचाने के लिए नमक, चीनी और काली मिर्च जैसे मसालों का उपयोग करते थे। नमक भोजन से जल खींच लेता है। हम आज भी ये विधियाँ अपनाते हैं — मुरब्बे में, जैम में, नमकीन मछली में।
  5. वायुरोधी डिब्बे और पैकेजिंग। खाद्य कारखानों में भोजन डिब्बों और पैकेटों में इस तरह बंद किया जाता है कि भीतर वायु, और इसलिए कोई सूक्ष्मजीव, पहुँच ही न सके।
नमी हटाइए → सुखाना
वायु हटाइए → तेल, डिब्बे, बंद पैकेट
गर्मी हटाइए → फ्रिज, फ्रीज़र
नमक, चीनी या मसाले मिलाइए → सूक्ष्मजीव पनप नहीं पाते
संरक्षण की आवश्यकता क्यों है: फल, सब्जियाँ, अनाज और मछली वर्ष के कुछ ही समय में और कुछ ही स्थानों पर मिलते हैं। संरक्षण के कारण ही परिवार दिसंबर में आम का स्वाद ले पाता है, जून में मिर्च पाउडर काम आता है और यात्रा में भोजन साथ ले जाया जा सकता है — वरना जो तुरंत न खाया जाए, वह फेंकना पड़ता।
क्या आप जानते हैं? मटका एक कूलर: हम पानी को ठंडा रखने के लिए मिट्टी के मटके का उपयोग करते हैं। जल मिट्टी की दीवार से बहुत धीरे-धीरे रिसकर बाहर वाष्पित होता है, और वाष्पन ऊष्मा ले जाता है — इसलिए बिना बिजली के भीतर का जल ठंडा बना रहता है।
प्र2.
“अम्मा, आप इन्हें क्यों सुखा रही हो?” उसने पूछा।
उत्तर

अम्मा ने उत्तर दिया, “मिर्च को पीसने के लिए, क्योंकि इसका उपयोग हमें पूरे वर्ष करना है।” मिर्च इसलिए सुखाई जाती है कि वह दूषित न हो और पीसकर मिर्च पाउडर के रूप में रखी जा सके।

सुखाने से क्या होता है, चरण दर चरण:

  1. ताजी हरी या लाल मिर्च में बहुत जल होता है। जल ही वह चीज़ है जो सूक्ष्मजीवों को चाहिए।
  2. मिर्च को चटाई पर एक ही परत में तेज धूप में फैला दिया जाता है।
  3. सूर्य की ऊष्मा से भीतर का जल वाष्पित हो जाता है — वह जलवाष्प बनकर वायु में चला जाता है।
  4. कुछ दिनों बाद मिर्च सूखी, हल्की और कड़क हो जाती है। मोड़ने पर वह चटक जाती है।
  5. अब उसमें नमी नहीं बची, इसलिए सूक्ष्मजीव नहीं पनप सकते। सूखी मिर्च पीसकर मिर्च पाउडर बनाया जाता है और सूखे डिब्बे में पूरे वर्ष रखा जाता है।

खोज #3: धूप में मिर्च सुखाने से उसकी नमी खत्म हो जाती है। नमी के बिना सूक्ष्मजीव विकसित नहीं हो सकते हैं!

धूप ही पर्याप्त क्यों है: जल को भोजन से निकलने के लिए उबलना आवश्यक नहीं है। हल्की ऊष्मा और बहती हवा ही पर्याप्त हैं — इसी कारण गीले कपड़े तार पर सूख जाते हैं। धूप में सुखाने में कोई खर्च नहीं होता, कोई मशीन नहीं चाहिए, और भारत के अधिकांश भागों में यह वर्ष के अधिकांश समय काम करता है।
सुखाते समय एक नियम: शाम होने से पहले, जब हवा में नमी बढ़ने लगे, वस्तु को भीतर ले आइए। रातभर बाहर पड़ी रहने पर वह फिर से नमी सोख लेती है, और तब उस पर फफूँद लग सकती है।
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