प्र1.
यदि इस अचार में तेल नहीं डाला जाता तो क्या होता?
उत्तर
तेल के बिना अचार तक वायु पहुँच जाती, उस पर सूक्ष्मजीव पनप जाते, और वह महीनों के बजाय कुछ दिनों या हफ्तों में दूषित हो जाता।
क्या-क्या होता, क्रम से:
- वायु और उसमें तैरते सूक्ष्मजीव ऊपर के टुकड़ों पर बैठ जाते।
- आम के टुकड़ों में थोड़ी नमी बची होती है, इसलिए वे सूक्ष्मजीव पनपने लगते।
- ऊपर सफेद, हरे या काले फफूँद के धब्बे दिखाई देने लगते।
- अचार से मसालेदार ताजी गंध के बजाय खट्टी और बुरी गंध आने लगती।
- टुकड़े नरम और चिपचिपे हो जाते, और पूरा मर्तबान फेंकना पड़ता।
| तेल वाला अचार | बिना तेल का अचार | |
|---|---|---|
| टुकड़ों तक वायु | तेल की परत रोक देती है | आसानी से पहुँच जाती है |
| ऊपर फफूँद | नहीं लगती | कुछ ही दिनों में लग जाती है |
| गंध | मसालेदार और अच्छी | खट्टी और दुर्गंधयुक्त |
| कितने समय चलता है | महीनों, कभी-कभी पूरा वर्ष | कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक |
चर्चा के लिए नमूना उत्तर: “तेल अचार का ढक्कन है। उसके बिना वायु आम के टुकड़ों को छू सकती है, और जहाँ वायु, नमी और गर्मी हो वहाँ सूक्ष्मजीव पनपते हैं। अचार पर ऊपर फफूँद लग जाती, उसमें से दुर्गंध आती और उसे फेंकना पड़ता। इसीलिए पाटी मर्तबान में तब तक तेल भरती हैं जब तक हर टुकड़ा डूब न जाए।”
कुछ अचारों में तेल होता ही नहीं — दक्षिण भारत में नींबू का अचार प्राय: केवल नमक और नींबू के रस से बनता है, और नमक सारी नमी खींचकर वही काम कर देता है। इसलिए नियम “हमेशा तेल” नहीं है; नियम है — “वायु या जल, किसी न किसी तरह हटा दीजिए”।