कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आप जानते हैं कि इडली कैसे बनती है?
उत्तर

इडली चावल और उड़द दाल के घोल से बनती है, जिसे रातभर फूलने के लिए रखा जाता है और फिर भाप में पकाया जाता है।

क्रम से चरण देखिए।

  1. भिगोना। चावल और उड़द दाल को धोकर अलग-अलग चार से छह घंटे पानी में भिगोया जाता है।
  2. पीसना। दोनों को अलग-अलग महीन पीसकर गाढ़ा घोल बनाया जाता है, फिर दोनों को थोड़े नमक के साथ मिला दिया जाता है। यही घोल है।
  3. रखना। घोल को ढककर किसी गरम स्थान पर रातभर, लगभग आठ से दस घंटे रखा जाता है।
  4. फूलना। सुबह तक घोल फूलकर बड़ा हो जाता है, हल्का दिखता है, उसमें नन्हे बुलबुले भरे होते हैं और हल्की खट्टी गंध आती है।
  5. भाप में पकाना। घोल इडली स्टैंड के गोल साँचों में डालकर लगभग दस से बारह मिनट भाप में पकाया जाता है।
  6. तैयार। नरम, सफेद और फूली हुई इडलियाँ निकालकर सांभर और चटनी के साथ गरम परोसी जाती हैं।
घोल को रातभर रखना क्यों आवश्यक है: यही सबसे महत्वपूर्ण चरण है, और इसमें मेहनत नहीं, समय लगता है। इन्हीं घंटों में अच्छे सूक्ष्मजीव घोल में काम करते हैं। बिना रखे तुरंत भाप में पका दिया जाए तो इडलियाँ चपटी और कड़ी बनती हैं।
गर्मी सहायक है: सर्दियों में घर के लोग घोल को गरम जगह पर रखते हैं या बर्तन को कपड़े में लपेट देते हैं। सूक्ष्मजीव गर्मी में तेजी से काम करते हैं — यही वह नियम है जिससे गर्मियों में भोजन शीघ्र दूषित होता है।
प्र2.
क्या कोई ऐसी वस्तु है जिससे इडली का घोल फूला हुआ बनता है? क्या आप जानते हैं वह क्या है?
उत्तर

हाँ — सूक्ष्मजीव। वायु में उपस्थित सूक्ष्मजीव घोल में पहुँचकर रातभर उसमें पनपते हैं। पनपते समय वे एक गैस छोड़ते हैं। यह गैस पूरे घोल में नन्हे-नन्हे बुलबुले बना देती है, और इन्हीं बुलबुलों से इडली नरम और फूली हुई बनती है।

खोज #7: वायुमंडल में उपस्थित सूक्ष्मजीव इडली के घोल को फूलाने में सहायक होते हैं।

घोल + अच्छे सूक्ष्मजीव + गर्मी + समय
→ नन्हे गैस के बुलबुले → घोल फूलता है → नरम, फूली इडली

आप इसे स्वयं देख सकते हैं:

  1. ताजे घोल का स्तर बर्तन के बाहर टेप के टुकड़े से चिह्नित कर लीजिए।
  2. ढककर रातभर गरम स्थान पर रख दीजिए।
  3. सुबह निशान देखिए। घोल उससे काफी ऊपर उठ चुका होगा।
  4. धीरे से चलाइए। आपको छोटे-छोटे बुलबुले दिखेंगे और हल्की सी सरसराहट सुनाई देगी।
यह सूक्ष्मजीवों का अच्छा पक्ष है: जिन छोटे सजीवों ने दिशा का उत्तपम दूषित किया था, उन्हीं के कुल के सूक्ष्मजीव हमें इडली, डोसा, ढोकला, भटूरा, ब्रेड, दही और पनीर देते हैं। अच्छे सूक्ष्मजीवों द्वारा भोजन का यह धीरे-धीरे बदलना किण्वन कहलाता है। यहाँ हम चाहते हैं कि सूक्ष्मजीव पनपें — इसलिए हम उन्हें जान-बूझकर गर्मी और समय देते हैं।
क्या आप जानते हैं? किण्वित चावल — ओडिशा में पखाल और कहीं-कहीं कांजी — भारत के अनेक भागों में खाया जाता है। पके चावल को रातभर पानी में भिगोकर अगले दिन खाया जाता है। यह गर्मियों में शरीर को ठंडक देता है और लाभकारी जीवाणुओं से भरा होता है।
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