कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 3 विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आपको भी कभी उल्टी, अपच या पेट खराब होने की समस्या हुई है? क्या आपने इसके लिए कोई घरेलू उपाय किया है? आपके द्वारा उपयोग किए गए घरेलू उपाय के विषय में लिखिए।
उत्तर

यह उत्तर अपने घर से लिखिए। अच्छे उत्तर में समस्या, उपाय, वह कैसे बनाया या दिया गया और उससे लाभ हुआ या नहीं — चारों बातें होती हैं।

नमूना उत्तर: “पिछले महीने एक विवाह में मैंने बहुत सारी पूरियाँ खा लीं और पूरी शाम पेट भारी लगता रहा। माँ ने कोई दवा नहीं दी। उन्होंने एक चम्मच अजवाइन को चुटकी भर काले नमक के साथ भूनकर मुझे गुनगुने पानी के साथ चबाने को दिया। बाद में उन्होंने भुने जीरे के पाउडर वाली छाछ पिलाई। रात में मैंने कुछ भारी नहीं खाया। अगली सुबह मेरा पेट ठीक लग रहा था।”

पेट भारी होने पर परिवारों में आमतौर पर अपनाए जाने वाले घरेलू उपाय:

उपायपरिवार इसे क्यों अपनाते हैं
चुटकी भर नमक के साथ अजवाइन और गुनगुना पानीभारी और गैस वाले पेट के लिए बहुत पुराना उपाय
जीरे का पानी, या छाछ में भुना जीराछाछ में अच्छे सूक्ष्मजीव होते हैं; जीरा पेट को शांत करता है
दही या छाछइनके अच्छे सूक्ष्मजीव पाचन में सहायता करते हैं
थोड़े सेंधा नमक के साथ अदरक, या गुनगुने पानी में अदरकजी मिचलाने और भारीपन में उपयोग किया जाता है
भोजन के बाद सौंफभारत के अधिकांश घरों में भोजन के अंत में चबाई जाती है
हल्का भोजन — खिचड़ी, सादा चावल, केला — और आरामपेट को कम काम करना पड़ता है
दिनभर घूँट-घूँट गुनगुना पानीशरीर से बहुत अधिक जल नहीं निकलने देता
खोज #8: खान-पान की खराब आदतों के कारण भी अपच की समस्या हो सकती है। बहुत जल्दी-जल्दी खाना, एक बार में बहुत अधिक खा लेना, ठीक से न चबाना, या पेट भरे होने पर भी बहुत तैलीय भोजन खा लेना — ये सब पेट के लिए कठिनाई बनाते हैं। इसलिए सबसे अच्छा उपचार कोई दवा नहीं, एक अच्छी आदत है।
पुस्तक की बात याद रखिए: घरेलू उपाय छोटी समस्याओं के लिए हैं। यदि समस्या गंभीर हो या एक-दो दिन से अधिक चले, तो चिकित्सक के परामर्श अनुसार दवाइयाँ लेनी पड़ सकती हैं। अपने आप कोई दवा कभी मत लीजिए।
प्र2.
क्या आपके माता-पिता ने आपको पेट की समस्या होने पर दही या उससे बनी कोई अन्य वस्तु जैसे छाछ आदि दी है?
उत्तर

हाँ — पेट खराब होने पर भारत के लगभग हर घर में दही और छाछ दी जाती है, और इसका अच्छा कारण है।

पुस्तक इसे एक वाक्य में समझाती है: दही में छोटे-छोटे सूक्ष्मजीव होते हैं जो आपके पेट में अच्छे सूक्ष्मजीवों के साथ मिलकर पाचन में सहायता करते हैं।

  1. दही गरम दूध में अच्छे सूक्ष्मजीवों के काम करने से बनता है।
  2. जब हम दही खाते हैं तो वे सूक्ष्मजीव हमारे आमाशय और आंत में पहुँच जाते हैं।
  3. हमारे शरीर में पहले से अपने अच्छे सूक्ष्मजीव रहते हैं जो भोजन पचाने में सहायता करते हैं।
  4. दही के सूक्ष्मजीव उनसे जा मिलते हैं और उनकी संख्या बढ़ा देते हैं।
  5. अधिक अच्छे सूक्ष्मजीव काम पर हों तो पाचन आसान हो जाता है और पेट शांत हो जाता है।
दही से बनी वस्तुकैसे ली जाती है
छाछ (मट्ठा, मज्जिगे)दही को पानी मिलाकर पतला किया जाता है, थोड़ा नमक और जीरा डालकर
चावल के साथ सादा दहीदही-चावल, जो दक्षिण भारत में पेट कमजोर होने पर दिया जाता है
लस्सीदही को पानी के साथ फेंटकर; गर्मियों में ठंडी पी जाती है
कढ़ीदही को बेसन के साथ पकाकर, चावल के साथ खाई जाती है
यह अध्याय का सबसे सुंदर विचार है: अध्याय आरंभ हुआ था सूक्ष्मजीवों से, जिन्होंने उत्तपम दूषित कर दिया था। अंत होता है सूक्ष्मजीवों से ही, जो हमारा दही बनाते हैं, इडली का घोल फुलाते हैं और हमारे भीतर रहकर भोजन पचाने में सहायता करते हैं। छोटे सजीवों का वही कुल; प्रकार अलग, काम अलग।
यदि समस्या गंभीर हो — बार-बार उल्टी, अधिक दस्त, तेज बुखार या लगातार पेट दर्द — तो दही पर्याप्त नहीं है। पुस्तक स्पष्ट कहती है: चिकित्सक के परामर्श अनुसार दवाइयाँ लेनी पड़ सकती हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?