गणित प्रकाश अध्याय 1 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सारणी 2 में दिए संख्या अनुक्रमों को चित्रात्मक रूप से दर्शाने के लिए अपनी नोटबुक में प्रतिलिपि बनाकर प्रत्येक अनुक्रम के लिए अगला चित्र बनाइए।
उत्तर

प्रत्येक अनुक्रम का छठा चित्र नीचे बताया गया है — इसे सारणी 2 के पाँचवें चित्र के ठीक बाद बनाइए।

अनुक्रमपहले से बने चित्रअगला चित्र
सभी ‘1’1, 1, 1, 1, 1एक और अकेला बिंदु → 1
गणन संख्याएँ1, 2, 3, 4, 56 बिंदुओं की पंक्ति → 6
विषम संख्याएँ1, 3, 5, 7, 911 बिंदुओं की “L / T” आकृति → 11
सम संख्याएँ2, 4, 6, 8, 106-6 बिंदुओं की दो पंक्तियाँ → 12
त्रिभुजाकार संख्याएँ1, 3, 6, 10, 156 पंक्तियों का त्रिभुज → 21
वर्ग संख्याएँ1, 4, 9, 16, 256 × 6 बिंदुओं का वर्ग → 36
घन संख्याएँ1, 8, 27, 64, 1256 × 6 × 6 का घन → 216
1361015
त्रिभुजाकार संख्याएँ 1, 3, 6, 10, 15 — प्रत्येक नए चित्र में नीचे एक पंक्ति और जुड़ती है। अगले चित्र में 6 बिंदुओं की पंक्ति होगी, अर्थात् 21।
1491625
वर्ग संख्याएँ 1, 4, 9, 16, 25 — प्रत्येक नए चित्र में एक पंक्ति और एक स्तंभ जुड़ता है। अगला चित्र 6 × 6 = 36 है।
प्र2.
1, 3, 6, 10, 15, ... त्रिभुजाकार संख्याएँ क्यों कहलाती हैं? 1, 4, 9, 16, 25, ... वर्ग संख्याएँ या वर्ग क्यों कहलाती हैं? 1, 8, 27, 64, 125, ... घन संख्याएँ या घन क्यों कहलाती हैं?
उत्तर

क्योंकि बिंदुओं को व्यवस्थित करने पर वे जो आकार बनाते हैं, नाम उसी पर आधारित है—

  • त्रिभुजाकार संख्याएँ — उतने बिंदुओं को एक पूर्ण त्रिभुज में सजाया जा सकता है: 1, 2, 3, 4, … बिंदुओं की पंक्तियाँ एक के नीचे एक। जैसे 1 + 2 + 3 = 6 बिंदु 3 पंक्तियों का त्रिभुज बनाते हैं, अत: 6 एक त्रिभुजाकार संख्या है।
  • वर्ग संख्याएँ — उतने बिंदुओं को एक पूर्ण वर्गाकार ग्रिड में सजाया जा सकता है जिसमें पंक्तियों और स्तंभों की संख्या समान हो। 4 = 2 × 2, 9 = 3 × 3, 25 = 5 × 5।
  • घन संख्याएँ — उतने बिंदुओं (या छोटे घनों) को एक ठोस घन में सजाया जा सकता है जिसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई बराबर हो। 8 = 2 × 2 × 2, 27 = 3 × 3 × 3, 125 = 5 × 5 × 5।
मुख्य विचार: संख्या को उसका नाम उस आकार से मिलता है जिसमें उसे व्यवस्थित किया जा सकता है। इसीलिए एक ही संख्या के एक से अधिक नाम भी हो सकते हैं — अगला प्रश्न देखिए।
प्र3.
आपने ध्यान दिया होगा कि 36 एक त्रिभुजाकार संख्या और वर्गाकार संख्या दोनों है। अर्थात् 36 बिंदुओं को त्रिभुज और वर्ग दोनों में पूरी तरह व्यवस्थित किया जा सकता है। इसे स्पष्ट करते हुए अपनी नोटबुक में चित्र बनाइए।
उत्तर

हाँ — 36 एक साथ दो भूमिकाएँ निभाती है—

त्रिभुज के रूप में: 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8 = 36 (8 पंक्तियाँ)
वर्ग के रूप में: 6 × 6 = 36 (6 पंक्तियाँ, प्रत्येक में 6)
36 = 1+2+⋯+8 (triangle)36 = 6 × 6 (square)
वही 36 बिंदु — 8 पंक्तियों के त्रिभुज के रूप में, तथा 6 × 6 के वर्ग के रूप में।

इससे पता चलता है कि संदर्भ के अनुसार एक ही संख्या अलग-अलग भूमिकाएँ निभा सकती है। कुछ अन्य संख्याएँ भी एक से अधिक तरीकों से दर्शाई जा सकती हैं—

  • 1 त्रिभुजाकार, वर्ग और घन — तीनों है।
  • 16 वर्ग (4 × 4) भी है और आयत (2 × 8) भी।
  • 64 वर्ग (8 × 8) भी है और घन (4 × 4 × 4) भी।
क्या आप जानते हैं? 1 और 36 के बाद अगली संख्या जो त्रिभुजाकार और वर्ग दोनों है, 1225 है (= 35 × 35, तथा 1 + 2 + 3 + … + 49 भी)। ऐसी संख्याएँ बहुत कम होती हैं।
प्र4.
आप संख्याओं के निम्नलिखित अनुक्रम को क्या कहेंगे? 1, 7, 19, 37 … इन्हें षड्भुजाकार (hexagonal) संख्याएँ कहते हैं। इन्हें अपनी नोटबुक में बनाइए। अनुक्रम में अगली संख्या क्या होगी?
उत्तर

ये षड्भुजाकार संख्याएँ हैं — बिंदु मिलकर एक षड्भुज (छह भुजाओं वाली आकृति) बनाते हैं, जिसके केंद्र में एक बिंदु होता है और उसके चारों ओर बिंदुओं के छल्ले होते हैं।

171937
षड्भुजाकार संख्याएँ 1, 7, 19, 37। प्रत्येक नए चित्र में बाहर की ओर एक छल्ला और जुड़ता है; इन छल्लों में 6, 12 तथा 18 बिंदु हैं।

देखिए हर बार कितना जुड़ रहा है—

1  +6→  7  +12→  19  +18→  37  +24→  61

जोड़ी जाने वाली संख्याएँ 6, 12, 18, 24, … (6 के गुणज) हैं। अत: अगले छल्ले में 24 बिंदु होंगे और

37 + 24 = 61

उत्तर: अगली षड्भुजाकार संख्या 61 है। अनुक्रम आगे इस प्रकार चलता है — 1, 7, 19, 37, 61, 91, 127, …

प्र5.
क्या आप ‘2 की घात’ के अनुक्रम का चित्रीय निरूपण कर सकते हैं? ‘3 की घात’ का?
उत्तर

हाँ। युक्ति यह है कि दिखाया जाए कि हर चित्र अपने से पिछले चित्र की प्रतिलिपियों से बना है।

2 की घातें — हर चित्र पिछले चित्र की दो प्रतिलिपियाँ है, अत: बिंदुओं की संख्या दोगुनी होती जाती है: 1, 2, 4, 8, 16, …

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2 की घातें: 1, 2, 4, 8, 16। हर चरण में पिछला चित्र बस दो बार ले लिया जाता है।

3 की घातें — हर चित्र पिछले चित्र की तीन प्रतिलिपियाँ है, अत: बिंदुओं की संख्या तिगुनी होती जाती है: 1, 3, 9, 27, …

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3 की घातें: 1, 3, 9, 27। एक बिंदु; त्रिभुज में तीन बिंदु; ऐसे तीन त्रिभुज; फिर ऐसे तीन समूह।
यह चित्र क्यों उपयोगी है: इससे एक ही नज़र में स्पष्ट हो जाता है कि संख्याएँ इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ती हैं — हर चरण पर पूरा चित्र 2 (या 3) बार प्रतिलिपित हो जाता है। इसे ही दोगुना करना और तिगुना करना कहते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ