यदि वे इन आँकड़ों को चित्रालेख के माध्यम से दर्शाना चाहते हैं, तो क्या वे प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अब भी एक प्रतीक का प्रयोग करेंगे, जैसा कि लखनपाल ने किया था। यदि हाँ, तो उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?
उत्तर
लखनपाल के आँकड़े छोटे थे — केवल 3, 5, 4, 2, 0, 1, 5, 7 विद्यार्थी, अर्थात् कुल 27 प्रतीक।
लखनपाल का चित्रालेख: प्रत्येक कक्षा में अनुपस्थित विद्यार्थी, एक विद्यार्थी के लिए एक प्रतीक। कक्षा V के सामने कोई प्रतीक नहीं है — कोई अनुपस्थित नहीं था।
अत: प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक प्रतीक बनाने पर ये चुनौतियाँ आएँगी—
बहुत अधिक प्रतीक — 215 प्रतीक एक-एक करके बनाने पड़ेंगे।
बहुत समय लगेगा और हाथ थक जाएगा; अंतिम प्रतीक पहले प्रतीकों जैसे नहीं रहेंगे।
स्थान नहीं मिलेगा — 35 प्रतीकों की पंक्ति कॉपी के पृष्ठ से बाहर चली जाएगी।
गिनना कठिन हो जाएगा — “35” पढ़ने के लिए पाठक को 35 छोटे चित्र गिनने पड़ेंगे और गलती की संभावना बढ़ेगी। तब यह चित्र सारणी से अधिक तेज़ उत्तर नहीं देगा।
उपाय है बड़ा पैमाना। जरीना ने 5 विद्यार्थियों के लिए एक प्रतीक लिया, अत: केवल 43 प्रतीक बनाने पड़े—
जरीना का चित्रालेख, कुंजी “1 प्रतीक = 5 विद्यार्थी”। कक्षा II के 35 विद्यार्थियों के लिए 7 प्रतीक चाहिए।
संगीता ने और आगे बढ़कर 10 विद्यार्थियों के लिए एक प्रतीक लिया तथा 5 के लिए आधा प्रतीक—
संगीता का चित्रालेख, कुंजी “1 प्रतीक = 10 विद्यार्थी”। 25 विद्यार्थी 2 प्रतीक और एक आधे प्रतीक से दर्शाए गए हैं।
सीख: पैमाना आँकड़ों के आकार के अनुसार होना चाहिए। छोटी संख्याएँ → 1 प्रतीक = 1 इकाई। बड़ी संख्याएँ → 1 प्रतीक = 5, 10, 100 … इकाई। परंतु पैमाने को आँकड़ों को ठीक-ठीक विभाजित भी करना चाहिए, अन्यथा अगली समस्या खड़ी हो जाती है — अगला प्रश्न देखिए।
प्र2.
यदि कक्षा में उपस्थित विद्यार्थियों की संख्या 33 या 27 हो, तो एक ऐसा चित्रालेख तैयार करते समय क्या चुनौतियाँ हो सकती हैं?
उत्तर
संगीता की कुंजी है “एक प्रतीक = 10 विद्यार्थी”, तथा आधा प्रतीक = 5 विद्यार्थी। अब 33 और 27 देखिए—
33 = 3 × 10 + 3 → 3 प्रतीक और 3 विद्यार्थी शेष
27 = 2 × 10 + 7 → 2 प्रतीक और 7 विद्यार्थी शेष
शेष 3 विद्यार्थियों को दर्शाने के लिए प्रतीक का तीन-दसवाँ भाग और 7 विद्यार्थियों के लिए सात-दसवाँ भाग बनाना पड़ेगा। चित्र के इतने छोटे भाग न तो ठीक से बनाए जा सकते हैं और न ही पढ़े जा सकते हैं।
आधे प्रतीक से भी काम नहीं चलेगा: 10 का आधा 5 होता है, जो न 3 है और न 7।
एक ही अधूरे प्रतीक से दो पाठक दो अलग संख्याएँ अनुमानित करेंगे। तब चित्रालेख यथार्थ नहीं रह जाता।
इसके स्थान पर क्या करें—
ऐसा पैमाना चुनिए जो सभी मानों को पूरा-पूरा विभाजित करे — 33 और 27 के लिए 1 प्रतीक = 1 विद्यार्थी बिल्कुल सही है (यद्यपि लंबा है); यदि सभी संख्याएँ 3 के गुणज होतीं तो पैमाना 3 उपयुक्त रहता।
अथवा चित्रालेख छोड़कर दंड आलेख बनाइए, जिसमें दंड किसी भी ऊँचाई का बन सकता है, अत: 33 और 27 ठीक-ठीक दर्शाए जा सकते हैं।
गणित चर्चा: 12, 18, 24 और 30 के लिए आप कौन-सा पैमाना चुनेंगे? (पैमाना 6 पूर्णत: उपयुक्त है — 2, 3, 4 और 5 प्रतीक।) अब यही 12, 19, 24 और 30 के लिए कीजिए। चर्चा कीजिए कि कठिनाई कहाँ आती है।
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