एक फली का बीज लगाइए, नियमित जल दीजिए और तीन माह तक अवलोकन कीजिए। जब भी कुछ नया दिखे, तिथि लिखिए। भारतीय मौसम में फली के पौधे के सामान्य समय के साथ भरी हुई तालिका 10.4 इस प्रकार होगी—
| दिनांक (क्रियाकलाप का दिन) | अवलोकन | चित्र जो बनाना है |
|---|---|---|
| दिन 1 | बीज बोए गए | मिट्टी के भीतर फली का बीज |
| दिन 3–4 | बीज फूल गया, बीजावरण फट गया और छोटी सफेद जड़ नीचे की ओर निकली | छोटी जड़ सहित बीज |
| दिन 5–7 | मिट्टी के ऊपर मुड़ा हुआ प्ररोह निकला और सीधा हो गया; दो मोटी बीजपत्रीय पत्तियाँ खुलीं | हुक जैसा प्ररोह, फिर दो पत्तियाँ |
| दिन 10–15 | वास्तविक हरी पत्तियाँ निकलीं; तना लंबा हुआ; जड़ में शाखाएँ बनीं | 4–6 पत्तियों वाला नन्हा पौधा |
| दिन 25–40 | पौधा घना हुआ, प्रतान या पार्श्व शाखाएँ निकलीं | पूरा पत्तेदार पौधा |
| दिन 40–55 | पहले फूल दिखाई दिए | फूलों सहित पौधा |
| दिन 55–70 | पंखुड़ियाँ सूखकर गिरीं; पीछे एक नन्ही हरी फली रह गई जो फूलने लगी | सूखे फूल के साथ नन्ही फली |
| दिन 70–90 | फलियाँ पूरे आकार की हो गईं और उनमें बीज बने; वे सूखकर भूरी होने लगीं | खुली हुई फली, भीतर बीज |
| दिन 90 के बाद | जल देते रहने पर भी पौधा पीला पड़कर सूख गया— उसका जीवन पूरा हो गया | सूखा, पीला पौधा |