कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.4: आइए, खोज करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किसी परिवर्तन के होने में कितना समय लगा? आपके द्वारा देखे गए विभिन्न परिवर्तन तालिका 10.4 में चित्रांकित कीजिए।
उत्तर

एक फली का बीज लगाइए, नियमित जल दीजिए और तीन माह तक अवलोकन कीजिए। जब भी कुछ नया दिखे, तिथि लिखिए। भारतीय मौसम में फली के पौधे के सामान्य समय के साथ भरी हुई तालिका 10.4 इस प्रकार होगी—

दिनांक (क्रियाकलाप का दिन)अवलोकनचित्र जो बनाना है
दिन 1बीज बोए गएमिट्टी के भीतर फली का बीज
दिन 3–4बीज फूल गया, बीजावरण फट गया और छोटी सफेद जड़ नीचे की ओर निकलीछोटी जड़ सहित बीज
दिन 5–7मिट्टी के ऊपर मुड़ा हुआ प्ररोह निकला और सीधा हो गया; दो मोटी बीजपत्रीय पत्तियाँ खुलींहुक जैसा प्ररोह, फिर दो पत्तियाँ
दिन 10–15वास्तविक हरी पत्तियाँ निकलीं; तना लंबा हुआ; जड़ में शाखाएँ बनीं4–6 पत्तियों वाला नन्हा पौधा
दिन 25–40पौधा घना हुआ, प्रतान या पार्श्व शाखाएँ निकलींपूरा पत्तेदार पौधा
दिन 40–55पहले फूल दिखाई दिएफूलों सहित पौधा
दिन 55–70पंखुड़ियाँ सूखकर गिरीं; पीछे एक नन्ही हरी फली रह गई जो फूलने लगीसूखे फूल के साथ नन्ही फली
दिन 70–90फलियाँ पूरे आकार की हो गईं और उनमें बीज बने; वे सूखकर भूरी होने लगींखुली हुई फली, भीतर बीज
दिन 90 के बादजल देते रहने पर भी पौधा पीला पड़कर सूख गया— उसका जीवन पूरा हो गयासूखा, पीला पौधा
संकेत: तिथियाँ सच्ची रखिए। आपका पौधा ग्रीष्म में एक सप्ताह पहले और शीत में देर से भी चल सकता है— यह भूल नहीं, एक सच्चा अवलोकन है जिसे अवश्य लिखिए।
प्र2.
कितने दिनों के बाद पहला फूल दिखाई दिया?
उत्तर

फली के पौधे में पहला फूल सामान्यतः बोने के लगभग 40 से 55 दिन बाद दिखाई देता है— अर्थात लगभग छह से आठ सप्ताह। अपने पौधे के दिन ठीक-ठीक लिखिए।

पौधाबोने से पहले फूल तक के दिन
सेम / राजमालगभग 40–55 दिन
मूँगलगभग 30–35 दिन
सूरजमुखीलगभग 55–65 दिन
गेंदालगभग 45–60 दिन
सरसोंलगभग 40–50 दिन
फूल आने में इतना समय क्यों: फूल खिलाने से पहले पौधे को पर्याप्त शरीर बनाना पड़ता है— अच्छी जड़ें और इतनी पत्तियाँ कि भरपूर भोजन बन सके। फूल बनाने और फिर बीज भरने में बहुत भोजन खर्च होता है। इसीलिए पौधा कई सप्ताह की पत्तेदार वृद्धि के बाद ही फूलता है, आरंभ के कुछ दिनों में कभी नहीं।
प्र3.
फूल के कुछ भागों के सूखने के बाद, क्या आपको आगे कोई अन्य वृद्धि दिखाई दी? फूल के शेष भाग किस प्रकार की संरचना में विकसित हुए? क्या आपने फूल से विकसित किसी बीजयुक्त फली या फल को देखा?
उत्तर

हाँ— फूल के सूखने के बाद भी वृद्धि चलती रहती है। किसी एक फूल को ध्यान से देखिए और उसे तोड़िए मत।

  1. पहले रंगीन पंखुड़ियाँ मुरझाकर गिर जाती हैं। लगता है फूल समाप्त हो गया।
  2. फूल के आधार पर का छोटा हरा भाग वहीं बना रहता है और फूलने लगता है
  3. यही भाग फल— फली के पौधे में एक फली के रूप में विकसित होता है।
  4. फली के भीतर बीज बनते और बड़े होते जाते हैं।
  5. अंत में फली सूखकर भूरी हो जाती है और उसे चीरने पर नए बीज दिखाई देते हैं।
फूल → पंखुड़ियाँ सूखकर गिरीं → शेष भाग फूला → फल (फली)भीतर बीज

हाँ, बीजयुक्त फली फूल से ही विकसित होती है। यही इस क्रियाकलाप का सबसे महत्वपूर्ण अवलोकन है: जिन बीजों से आपने आरंभ किया और जो बीज अंत में मिले, वे एक ही प्रकार के हैं— बस एक पीढ़ी आगे।

स्वयं जाँचिए: पौधे के सबसे पहले फूल की डंडी पर एक धागा ढीला-सा बाँध दीजिए। दो सप्ताह बाद देखिए— आपका धागा अब एक नन्ही फली के नीचे बँधा मिलेगा। यह स्पष्ट प्रमाण है कि फली उसी फूल से बनी।
प्र4.
बीजयुक्त फलों के बनने के बाद पौधे का क्या हुआ?
उत्तर

पौधा धीरे-धीरे बढ़ना बंद कर देता है, पीला पड़ता है, सूख जाता है और मर जाता है— भले ही आप जल देते रहें।

  • पत्तियों का हरा रंग जाता रहता है, वे पीली, फिर भूरी और कागज जैसी हो जाती हैं।
  • नई पत्तियाँ और फूल आना बंद हो जाता है।
  • तना सूखा और भुरभुरा हो जाता है; हिलाने पर फलियाँ खड़खड़ाती हैं।
  • अंततः जीवन की सभी गतिविधियाँ समाप्त हो जाती हैं और पौधे को मृत मान लिया जाता है।
फल बनने के बाद पौधा क्यों मर जाता है: फली का पौधा केवल एक ऋतु जीता है। वह जो भी भोजन बनाता है उसका लगभग सारा हिस्सा बीज भरने में लगा देता है। वह काम पूरा होते ही उसका कार्य समाप्त— अगली पीढ़ी फलियों के भीतर तैयार है। आम या नीम इससे बहुत भिन्न हैं, जो दशकों तक हर वर्ष फूलते और फलते रहते हैं।
पौधा तब मृत कहलाता है जब वह बढ़ना बंद कर देता है और सभी आवश्यक परिस्थितियों की उपलब्धता के बाद भी उसमें जीवन की गतिविधियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं
प्र5.
फलों के बनने के बाद आपने क्या-क्या परिवर्तन देखे? क्या आपके द्वारा इसमें निरंतर पानी डाले जाने के बाद भी पौधा पीला हो कर सूख गया? अपने फली के पौधे से प्राप्त बीजों को उगाइए और देखिए कि बीज किस प्रकार फली के पौधों की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाता है।
उत्तर

हाँ— नियमित जल देने पर भी पौधा पीला पड़कर सूख गया। जीवन-चक्र पूरा हो जाने के बाद केवल जल पौधे को जीवित नहीं रख सकता।

अब अपनी ही फलियों के बीज बोइए। लगभग एक सप्ताह में वे अंकुरित हो जाएँगे और पूरी कहानी फिर से आरंभ हो जाएगी। यही वृत्त पूरा करता है और जीवन-चक्र का अर्थ समझाता है।

बीज → नन्हा पौधा → परिपक्व पौधा → फूल → बीजयुक्त फल (फली) → पौधों की नई पीढ़ी

पुस्तक के शब्दों में: बीज से पौधा और फिर बीजों की अगली पीढ़ी तक की संपूर्ण प्रक्रिया को पौधे का जीवन-चक्र कहा जाता है। चित्र 10.4 की पाँच अवस्थाएँ हैं—

अवस्थाक्या दिखाई देता है
अवस्था 1बीज
अवस्था 2बीज का अंकुरण
अवस्था 3पत्तियों का प्रकटन
अवस्था 4फूलों का प्रकटन
अवस्था 5फलों का प्रकटन— बीज सहित फली, और उसके बाद पौधे की मृत्यु
मूल विचार: पौधा मर जाता है, किंतु उसकी जाति नहीं। बीज जीवन को आगे ले जाते हैं। यही बात आपने तब भी देखी थी जब पूछा गया था कि जनन क्यों अनिवार्य है— वह जीवन की निरंतरता के लिए आवश्यक है।
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