कुतूहल अध्याय 10 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पौधों और जंतुओं के जीवन-चक्र में समानताओं और भिन्नताओं को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर

समानताएँ

  • दोनों एक छोटे से आरंभ-बिंदु से शुरू होते हैं— पौधे में बीज, जंतु में अंडा या नवजात।
  • दोनों एक निश्चित क्रम में अनेक अवस्थाओं से गुजरते हैं।
  • दोनों वृद्धि एवं विकास करते हैं और इसके लिए उन्हें भोजन, जल तथा वायु चाहिए।
  • दोनों ऐसी अवस्था तक पहुँचते हैं जहाँ वे जनन करके अगली पीढ़ी उत्पन्न कर सकें।
  • दोनों अंततः मर जाते हैं, जबकि उनकी जाति अगली पीढ़ी के रूप में चलती रहती है।
  • दोनों में यह चक्र फिर दोहराया जाता है— बीजों से नए पौधे, अंडों से नए जंतु।

भिन्नताएँ

 पौधाजंतु
आरंभिक अवस्थाबीजअंडा या नवजात शिशु
पहले चरण का नामअंकुरणस्फुटन या जन्म
प्रमुख अवस्थाएँबीज → अंकुरण → पत्तियाँ → फूल → बीजयुक्त फलअंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क (मच्छर); अंडा → टैडपोल → मंडूक → वयस्क (मेंढक)
स्थानजीवन भर एक ही स्थान पर स्थिरचलता-फिरता है; आवास जल से थल में बदल सकता है
भोजनसूर्य के प्रकाश से स्वयं भोजन बनाता हैभोजन के लिए पौधों या अन्य जंतुओं पर निर्भर
वृद्धिप्रायः जीवन भर चलती रहती हैसामान्यतः वयस्क अवस्था में रुक जाती है
अगली पीढ़ी कैसेबीज फल के भीतर बनते और बिखरते हैंअंडे दिए जाते हैं या बच्चे जन्म लेते हैं और प्रायः उनकी देखभाल की जाती है
प्र2.
नीचे तालिका में कुछ विवरण (डाटा) दिया गया है। तालिका का अध्ययन कीजिए और दूसरे व तीसरे स्तंभ में दी गई स्थितियों के लिए उपयुक्त उदाहरणों का पता लगाने का प्रयास कीजिए। यदि आपको लगता है कि नीचे दी गई किसी भी स्थिति के लिए उदाहरण संभव नहीं है, तो स्पष्ट कीजिए कि ऐसा क्यों है? (1. वृद्धि— नहीं, श्वास— नहीं; 2. वृद्धि— नहीं, श्वास— हाँ; 3. वृद्धि— हाँ, श्वास— नहीं; 4. वृद्धि— हाँ, श्वास— हाँ)
उत्तर

प्रत्येक पंक्ति को अलग-अलग लीजिए। तीन पंक्तियों के उदाहरण मिल जाते हैं; एक का नहीं मिलता— और क्यों नहीं मिलता यही असली उत्तर है।

क्रम सं.क्या इसकी वृद्धि होती है?क्या यह श्वास लेता है?उदाहरणटिप्पणी
1.नहींनहींपत्थर, कुर्सी, साइकिल, प्लास्टिक की बोतल, चॉक का टुकड़ाएक सामान्य निर्जीव वस्तु। दोनों में से कोई भी प्रक्रम नहीं होता क्योंकि वहाँ कोई सजीव शरीर है ही नहीं।
2.नहींहाँपूर्ण वयस्क मनुष्य, वयस्क गाय, पूरी बढ़ चुकी पुरानी बरगद, वयस्क मच्छरसजीव। वयस्क होने पर आमाप की वृद्धि रुक जाती है, किंतु श्वसन जीवन के हर क्षण चलता रहता है क्योंकि ऊर्जा की आवश्यकता निरंतर बनी रहती है।
3.हाँनहींकोई सजीव उदाहरण संभव नहीं है। केवल ऐसी निर्जीव वस्तुएँ जो बढ़ती हुई प्रतीत होती हैं— तश्तरी में नमक या तूतिया के क्रिस्टल, गुफा में लटकते स्तंभ, बर्फ की लटकन, बालू का टीला, लुढ़कता बर्फ का गोलासजीव श्वसन के बिना वृद्धि नहीं कर सकता, क्योंकि नए भाग बनाने की ऊर्जा और पदार्थ श्वसन से ही मिलते हैं। सूचीबद्ध वस्तुएँ बड़ी अवश्य होती हैं, पर केवल बाहर से पदार्थ जुड़ने के कारण— यह सच्ची वृद्धि नहीं है और यहाँ श्वसन होता ही नहीं।
4.हाँहाँबच्चा, पिल्ला, फली का नवोद्भिद, आम का छोटा पौधा, टैडपोलसजीव और अभी बढ़ रहा। दोनों प्रक्रम साथ-साथ चल रहे हैं— यह प्रत्येक बढ़ते सजीव की सामान्य स्थिति है।
पंक्ति 3 सबसे रोचक क्यों है: यह आपसे वृद्धि की ठीक-ठीक परिभाषा माँगती है। “वह बड़ी हो जाती है” कहना पर्याप्त नहीं। सजीव में नया पदार्थ भोजन के रूप में लिया जाता है, शरीर के भीतर बदला जाता है और शरीर का अंग बनता है— और इसके लिए श्वसन से मिली ऊर्जा चाहिए। क्रिस्टल में कण केवल बाहर से आकर बैठ जाते हैं। आँखों को परिणाम एक-सा दिखता है, प्रक्रम बिल्कुल भिन्न है।
प्र3.
आपने सीखा है कि बीजों के अंकुरण के लिए भिन्न-भिन्न परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। अनाजों और दालों के उपयुक्त भंडारण के लिए हम इस ज्ञान का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर

भंडारित अनाज से ठीक वही चीजें दूर रखिए जो बीज को अंकुरण के लिए चाहिए— जल, वायु और गरमी। अनाज और दालें बीज ही हैं; भंडार में अंकुरित हो जाएँ या उनमें फफूँद लगे तो वे नष्ट हो जाते हैं।

अंकुरण के लिए क्या चाहिएभंडारण में हम क्या करते हैंयह क्यों काम करता है
जल / नमीभंडारण से पहले अनाज को धूप में अच्छी तरह सुखाइए; सूखे कमरे में रखिए; बोरियाँ फर्श और दीवार से हटकर लकड़ी के तख्ते पर रखिए; डिब्बे में सूखी राख या चूने की पोटली रखिएनमी के बिना बीजावरण कभी मुलायम नहीं होगा और भ्रूण प्रसुप्त बना रहेगा
वायुवायुरोधी टिन, ड्रम, कोठी या सील बंद थैलों में भरिए; पात्र ऊपर तक भरिएवायु के बिना बीज श्वसन नहीं कर सकता, अतः अंकुरित भी नहीं होगा— और भीतर बंद कीट भी जीवित नहीं रहेंगे
गरमीभंडार ठंडा, छायादार और हवादार रखिए; चूल्हे के पास या धूप में कभी नहींठंडे अनाज में न अंकुरण होता है, न कीट और फफूँद पनपते हैं
नमी और हानि लाने वाले कीटसूखी नीम की पत्तियाँ, हल्दी या सूखी लाल मिर्च मिलाइए; भरने से पहले पात्र साफ कीजिए; कुछ महीनों बाद अनाज फिर धूप दिखाइएकीट और नमी दूर रहते हैं, अतः बीज प्रसुप्त और साबुत बना रहता है
एक पंक्ति का सिद्धांत: जब तक बीज सूखा, ठंडा और वायुरहित है, वह बीज ही बना रहेगा। भारत की हर पारंपरिक भंडारण-विधि— मिट्टी की कोठी, कसकर ढका धातु का ड्रम, अप्रैल में छत पर दाल सुखाना— इन्हीं तीन में से कोई एक काम कर रही है।
स्वयं जाँचिए: दो मुट्ठी मूँग लीजिए। एक कसकर बंद सूखे जार में रखिए और दूसरी रसोई के नम कोने में खुली कटोरी में। वर्षा ऋतु में पखवाड़े भर बाद तुलना कीजिए। खुली मूँग से सीलन की गंध आएगी और वह अंकुरित भी हो सकती है।
प्र4.
आपने सीखा है कि टैडपोल की एक पूँछ होती है लेकिन जब वृद्धि के बाद यह मेंढक बनता है तो पूँछ लुप्त हो जाती है। टैडपोल अवस्था में पूँछ होने से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर

पूँछ टैडपोल का तैरने का अंग है। टैडपोल पूर्णतः जल में रहता है और आरंभिक अवस्था में उसके पैर होते ही नहीं, अतः चलने-फिरने का उसके पास यही एकमात्र साधन है।

पूँछ टैडपोल को क्या-क्या करने देती है—

  • तैरना। पुस्तक स्पष्ट कहती है— पूँछ उन्हें जल में तैरने में सहायता करती है। चपटी पूँछ के इधर-उधर झटके उसे आगे धकेलते हैं।
  • भोजन ढूँढ़ना। वह तालाब में घूमकर काई और कोमल वनस्पति तक पहुँच सकता है।
  • बचकर भागना। पूँछ के एक झटके से वह मछलियों, जल-कीटों और पक्षियों से दूर निकल जाता है।
  • भोजन संचित रखना। पूँछ में पर्याप्त पदार्थ संचित रहता है। मंडूक बनते समय जब वह बहुत कम खाता है, तब यही पूँछ धीरे-धीरे शरीर में सोख ली जाती है— इसीलिए वह “लुप्त होती” प्रतीत होती है।
वयस्क मेंढक उसे क्यों नहीं रखता: थल पर लंबी पूँछ केवल बोझ होगी और कूदने में बाधा डालेगी। वयस्क मजबूत पिछले पैरों की छलाँग से चलता है, इसलिए पूँछ की आवश्यकता नहीं रह जाती। मेंढक उसे व्यर्थ नहीं करता— उसका पदार्थ अपने शरीर में वापस ले लेता है।
प्र5.
चरण का कहना है लकड़ी का लट्ठा निर्जीव है क्योंकि इसमें गति नहीं होती। इसके विपरीत चारु इसे सजीव मानती हैं, क्योंकि यह वृक्षों से प्राप्त होता है। चरण और चारु के कथनों के पक्ष या विपक्ष में अपने-अपने तर्क दीजिए।
उत्तर

लकड़ी का लट्ठा निर्जीव है— अतः चरण का निष्कर्ष सही है किंतु उसका कारण कमजोर है; और चारु का कारण तो पूरी तरह गलत है।

चरण के कारण (“इसमें गति नहीं होती”) के विपक्ष में—

  • गति न होना निर्जीव होने का प्रमाण नहीं है। बरगद का पेड़ अपने स्थान से कभी नहीं हिलता और पूरी तरह सजीव है।
  • उल्टी बात भी गलत है— कार, नदी और पंखा तीनों गति करते हैं और तीनों निर्जीव हैं।
  • अतः केवल गति से यह प्रश्न कभी नहीं सुलझ सकता। चरण सही उत्तर तक कमजोर तर्क से पहुँचा है।

चारु के कारण (“यह वृक्ष से आया है”) के विपक्ष में—

  • महत्व इस बात का नहीं कि वस्तु कहाँ से आई, बल्कि इसका है कि वह अब क्या करती है
  • लट्ठा न वृद्धि करता है, न भोजन लेता है, न श्वसन करता है, न उत्सर्जन करता है, न स्पर्श-ताप-प्रकाश पर अनुक्रिया करता है, और न दूसरा लट्ठा उत्पन्न कर सकता है।
  • इसी तर्क से सूती कमीज (कपास के पौधे से), कागज का पन्ना (लकड़ी से) और चमड़े का बैग भी सजीव कहलाने लगेंगे— जो स्पष्टतः असंगत है।

सही तर्क—

लट्ठा किसी सजीव वृक्ष का भाग था
काटे जाने के बाद उसमें जीवन की एक भी विशेषता नहीं है।
→ अतः वह निर्जीव है, इसलिए नहीं कि वह हिल नहीं सकता, बल्कि इसलिए कि जीवन के आठों प्रक्रम रुक चुके हैं।
क्या आप जानते हैं? यह ठीक अध्याय के आरंभ वाले घोंघे के खोल जैसा प्रश्न है, बस उल्टी दिशा से। खोल निर्जीव लगता है फिर भी सजीव घोंघे का अंग है; लट्ठा सजीव वृक्ष से आया है फिर भी अब निर्जीव है। सामने रखी वस्तु को सदा सभी विशेषताओं की कसौटी पर परखिए।
प्र6.
मच्छर और मेंढक के जीवन-चक्र में क्या समानताएँ और क्या विभेदकारी विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर

समानताएँ

  • दोनों चार अवस्थाओं से गुजरते हैं।
  • दोनों का जीवन जल पर या जल के समीप दिए गए अंडे से आरंभ होता है।
  • दोनों में शिशु अवस्थाएँ जल में रहती हैं और वयस्क जल से बाहर आ सकता है।
  • दोनों में बाह्य आकृति, शरीर के आकार और संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं और आवास भी बदलता है।
  • दोनों में शिशु वयस्क से बिल्कुल भिन्न दिखता है।
  • दोनों का अंत ऐसे वयस्क पर होता है जो जनन करता है और चक्र चलता रहता है।

विभेदकारी विशेषताएँ

बिंदुमच्छरमेंढक
चारों अवस्थाएँअंडा → लार्वाप्यूपा → वयस्कअंडा (जलांडक) → टैडपोलमंडूक → वयस्क
अंडेबहुत छोटे, अकेले या छोटे समूहों में सीधे जल पर या समीपसैकड़ों एक साथ जेली जैसे समूह में, जिसे जलांडक कहते हैं
विश्राम अवस्थाहै— प्यूपा न भोजन लेता है, न वृद्धि करता हैनहीं— टैडपोल भोजन लेता रहता है और धीरे-धीरे बदलता है
परिवर्तन का ढंगअचानक छलाँगों में, प्यूपा के भीतर पूरा शरीर नए सिरे से बनता हैक्रमशः— पहले पैर निकलते हैं, फिर पूँछ छोटी होकर लुप्त हो जाती है
कुल समयलगभग 1 से 2 सप्ताह; वयस्क 10 से 15 दिन जीता हैवयस्क बनने में लगभग 14 सप्ताह; वयस्क कई वर्ष जीता है
वयस्क का आवासवायु और थल— वह उड़ता हैजल और थल दोनों
जंतु का प्रकारकीट— छह पैर और पंखउभयचर— चार पैर, पंख नहीं
हमारे लिएमादा खून चूसती है और मलेरिया, डेंगू तथा चिकनगुनिया फैलाती हैलाभदायक— वह बड़ी संख्या में कीट खाता है, मच्छरों सहित
प्र7.
एक पौधे को उसकी वृद्धि के लिए उपयुक्त सभी स्थितियाँ उपलब्ध कराई गई हैं (चित्र 10.9)। एक सप्ताह पश्चात आप इस पौधे के प्ररोह और जड़ में क्या देखने की अपेक्षा करते हैं? उसका चित्र बनाइए। इसके कारण भी लिखिए।
उत्तर

चित्र 10.9 में गमला भूमि पर एक ओर लिटाकर रखा गया है, इसलिए नवोद्भिद बगल की ओर निकला है— प्ररोह मिट्टी से क्षैतिज बाहर की ओर और जड़ मिट्टी के भीतर क्षैतिज।

“एक सप्ताह बाद” के लिए क्या बनाना है: प्ररोह अपने सिरे के पास मुड़कर ऊपर की ओर बढ़ने लगा है, और जड़ मुड़कर नीचे की ओर मिट्टी में जा रही है। दोनों के पुराने निचले भाग जहाँ थे वहीं रहते हैं, इसलिए दोनों में एक स्पष्ट मोड़ बनता है— अंग्रेजी के अक्षर L जैसा।

अभी (चित्र 10.9) एक सप्ताह बाद प्ररोह और जड़ दोनों बगल की ओर प्ररोह ऊपर मुड़ा, जड़ नीचे मुड़ी हरा = प्ररोह  •  बैंगनी = जड़  •  भूरा भाग = भूमि पर लिटाए गमले की मिट्टी मोड़ बढ़ते हुए सिरों के पास बनते हैं; पुराने भाग जैसे थे वैसे ही रहते हैं।
प्रश्न 7 के लिए बनाया जाने वाला चित्र: एक सप्ताह बाद प्ररोह ऊपर की ओर और जड़ नीचे की ओर मुड़ जाती है, जबकि गमला हिलाया तक नहीं गया।

कारण

  • पौधों के प्ररोह ऊपर की ओर बढ़ते हैं और सूर्य के प्रकाश की ओर गति प्रदर्शित करते हैं, अतः प्ररोह मुड़कर ऊपर जाएगा ताकि पत्तियाँ प्रकाश और वायु तक पहुँचकर भोजन बना सकें।
  • पौधों की जड़ें नीचे की ओर बढ़ती हैं, अतः जड़ मुड़कर मिट्टी में जाएगी, जहाँ वह पौधे को जमाकर जल और खनिज ले सके।
  • यह ठीक क्रियाकलाप 10.3 के बीकर ‘ख' का परिणाम है— उल्टा रखा नवोद्भिद स्वयं को सुधार लेता है, जड़ नीचे और प्ररोह ऊपर मुड़ जाता है। एक ओर लिटाया गमला उसी परीक्षण का दूसरा रूप है।
  • केवल नया बढ़ता हुआ भाग ही मुड़ सकता है, इसलिए परिवर्तन सिरे के पास मोड़ के रूप में दिखता है, पूरा पौधा घूमकर नहीं।
प्र8.
तारा और विजय ने एक प्रयोग का सेट-अप तैयार किया है जिसे चित्र 10.10 में दर्शाया गया है। आप क्या सोचते हैं कि वे क्या पता करना चाहते हैं? और, उन्हें यह कैसे पता चलेगा कि वे सही हैं?
उत्तर

चित्र 10.10 में क्या दिखाया गया है: मिट्टी से भरे तीन एक जैसे पारदर्शी पात्र, और प्रत्येक में एक अंकुरित बीज अलग-अलग स्थिति में रखा गया है।

पात्रनवोद्भिद किस स्थिति में रखा है
पहलाबगल की ओर— प्ररोह एक ओर और जड़ दूसरी ओर, दोनों क्षैतिज
दूसराउल्टा— प्ररोह नीचे मिट्टी में और जड़ ऊपर की ओर
तीसरासीधा— प्ररोह ऊपर मिट्टी से बाहर, जड़ नीचे (सामान्य स्थिति, तुलना के लिए)

वे क्या पता करना चाहते हैं: यह कि बीज जिस दिशा में बोया जाए क्या उसी दिशा में उसकी जड़ और प्ररोह बढ़ते हैं— अथवा बीज चाहे जैसे रखा जाए, जड़ सदा नीचे और प्ररोह सदा ऊपर ही बढ़ता है।

उन्हें कैसे पता चलेगा कि वे सही हैं: पात्रों को लगभग एक सप्ताह बिना छेड़े रखकर पारदर्शी दीवारों से देखकर।

  • यदि तीनों पात्रों में जड़ें मुड़कर नीचे और प्ररोह मुड़कर ऊपर हो गए हैं, तो उनका विचार सही है— बोने की दिशा से कोई अंतर नहीं पड़ता।
  • यदि प्रत्येक नवोद्भिद उसी दिशा में बढ़ता रहा जिसमें उसे रखा गया था, तो उनका विचार गलत है।
अपेक्षित परिणाम → हर पात्र में: जड़ नीचे मुड़ेगी, प्ररोह ऊपर मुड़ेगा
तीसरा (सीधा) पात्र क्यों आवश्यक है: वह नियंत्रण (कंट्रोल) है। वह दिखाता है कि जब कुछ असामान्य न किया जाए तो नवोद्भिद क्या करता है। उसके बिना तारा और विजय निश्चित नहीं कर पाते कि दूसरे दोनों पात्रों के मोड़ स्थिति के कारण आए या मिट्टी अथवा जल जैसे किसी और कारण से।
अपने प्रयोग के लिए संकेत: काँच के गिलास का उपयोग कीजिए और बीजों को भीतरी दीवार से सटाकर रखिए, ताकि जड़ और प्ररोह को खोदे बिना प्रतिदिन देखा जा सके। चित्र के नवोद्भिद इसी कारण दिखाई दे रहे हैं।
प्र9.
बीज अंकुरण पर तापमान के प्रभाव की जाँच करने के लिए एक प्रयोग की योजना लिखिए।
उत्तर

उद्देश्य: यह पता करना कि तापमान बीज के अंकुरण को प्रभावित करता है या नहीं।

सामग्री: 40 स्वस्थ फली या चने के बीज, चार एक जैसे कटोरे या छोटे पारदर्शी डिब्बे, रुई, जल, चार लेबल, एक तापमापी।

विधि— तापमान के अतिरिक्त सब कुछ समान रखिए

  1. प्रत्येक कटोरे में बराबर मात्रा में रुई बिछाकर बराबर मात्रा में जल से नम कीजिए। उन पर क, ख, ग और घ लेबल लगाइए।
  2. प्रत्येक कटोरे में एक ही प्रकार, नाप और गुणवत्ता के 10 बीज इस प्रकार फैलाइए कि सबको वायु मिले।
  3. चारों कटोरे चार भिन्न तापमानों पर रखिए—
    कटोराकहाँ रखा गयालगभग तापमान
    रेफ्रिजरेटर के भीतरलगभग 5 °C — बहुत ठंडा
    कमरे के ठंडे, छायादार कोने मेंलगभग 15 °C — ठंडा
    सामान्य कमरे के तापमान पर अलमारी में (नियंत्रण)लगभग 25–30 °C — गरम
    गरम स्थान पर, जैसे चूल्हे के पास (उस पर नहीं) या धूप में खड़ी बंद गाड़ी मेंलगभग 45–50 °C — बहुत गरम
  4. प्रतिदिन प्रत्येक कटोरे में बराबर कुछ बूँदें जल डालिए ताकि कोई सूखे नहीं। चारों को या तो अँधेरे में रखिए या चारों को प्रकाश में— पर एक जैसा।
  5. 7 दिन बाद गिनिए कि किस कटोरे में कितने बीज अंकुरित हुए और अंकुरों की लंबाई मापिए।

अपेक्षित परिणाम एवं निष्कर्ष

कटोरा10 में से कितने अंकुरितयह क्या दर्शाता है
क (5 °C)0 या 1बहुत ठंडा— बीज की जैव क्रियाएँ लगभग रुक जाती हैं
ख (15 °C)4 या 5, धीमे और छोटेअंकुरण होता तो है पर धीमा
ग (25–30 °C)9 या 10, स्वस्थ अंकुरसर्वोत्तम— यही अनुकूल परास है
घ (45–50 °C)0 से 2; कुछ बीज सूख या सड़ जाते हैंबहुत गरम— भ्रूण को क्षति पहुँचती है
निष्कर्ष: तापमान अंकुरण को प्रभावित करता है। बीज मध्यम, गरम तापमान पर सर्वोत्तम अंकुरित होते हैं; बहुत कम और बहुत अधिक तापमान अंकुरण घटा देते हैं या रोक देते हैं।
यह निष्पक्ष परीक्षण क्यों है: चारों कटोरों में बीज, उनकी संख्या, रुई, जल और प्रकाश समान हैं। केवल तापमान बदला गया है। यदि हर कटोरे में अलग-अलग प्रकार के बीज होते तो कभी पता नहीं चलता कि अंतर किस कारण आया। एक के बजाय दस बीज रखने से यह भी सुनिश्चित हो जाता है कि किसी एक खराब बीज से परिणाम न बिगड़े।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ